विशेष संवाददाता, देहरादून (डोईवाला)
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश अब मैदानी और तराई इलाकों के लिए आफत बनने लगी है। पहाड़ों पर लगातार जारी तेज वर्षा के कारण डोईवाला विधानसभा क्षेत्र की नदियां और बरसाती खाले उफान पर हैं। शनिवार को क्षेत्र के शीला चौकी मार्ग पर स्थित बरसाती खाले में अचानक पानी का भारी सैलाब आ गया, जिससे वहां लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई अस्थाई पुलिया और एप्रोच मार्ग पूरी तरह बह गया।
इस घटना के कारण क्षेत्र के करीब आधा दर्जन (6) गांवों का मुख्य मार्ग और बाजार से संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे हजारों की आबादी संकट में आ गई है।
एक साल बाद भी नहीं बना पक्का पुल: दावों की खुली पोल
स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। डोईवाला विधानसभा क्षेत्र की गडूल ग्राम सभा के अंतर्गत आने वाले शीला चौकी क्षेत्र स्थित इस खाले पर पिछले वर्ष (2025) आई भीषण आपदा के दौरान मुख्य संपर्क पुल और रास्ता पूरी तरह जमींदोज हो गया था।
आपदा को बीते एक वर्ष से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा इस महत्वपूर्ण पुल का पुनर्निर्माण नहीं कराया जा सका। विभाग ने केवल औपचारिकता निभाते हुए एक अस्थाई पुलिया और मार्ग तैयार किया था, जो मानसून की पहली तेज बारिश का दबाव भी नहीं झेल सका और तिनके की तरह बह गया।
जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त: इन बुनियादी जरूरतों पर लगा ब्रेक
अस्थाई मार्ग के बह जाने से प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों का जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है। बरसात शुरू होते ही इन गांवों के सामने मुख्य सड़क, तहसील मुख्यालय और नजदीकी बाजार तक पहुँचने का कोई रास्ता नहीं बचता। पुल के अभाव में सबसे ज्यादा संकट निम्नलिखित क्षेत्रों पर पड़ रहा है:
• स्कूली बच्चों की शिक्षा प्रभावित: मार्ग बंद होने से स्कूली बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई परिवारों को अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शहर में महंगे किराए के कमरे लेकर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
• मरीजों और बुजुर्गों के लिए जीवन का संकट: क्षेत्र में किसी के अचानक बीमार होने या गर्भवती महिलाओं को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुँचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। खाले में पानी का स्तर इतना अधिक है कि एम्बुलेंस का आना तो दूर, पैदल पार करना भी जान जोखिम में डालने जैसा है।
• किसानों का आर्थिक नुकसान: खेती और पशुपालन पर निर्भर रहने वाले स्थानीय किसानों के लिए अपने उत्पादों (दूध, सब्जियां) को मुख्य बाजार तक पहुँचाना असंभव हो गया है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने खोला मोर्चा: सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन
प्रशासनिक उदासीनता से नाराज ग्रामीणों का सब्र शनिवार को टूट गया। क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) रविन्द्र रावत के नेतृत्व में भारी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा उफनते खाले के किनारे इकट्ठा हुए और सरकार व संबंधित विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों की चेतावनी: प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि पिछले साल पुल बहने के बाद से वे लगातार शासन, प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के चक्कर काट रहे हैं। हर बार सिर्फ खोखले आश्वासन मिले, जिसका नतीजा आज पूरा क्षेत्र भुगत रहा है। यदि जल्द ही पक्के पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।
मौके पर पहुंचे ब्लॉक प्रमुख: समस्याओं के त्वरित समाधान का आश्वासन
ग्रामीणों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव सिंह भी प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने उफनते खाले और बही हुई पुलिया का निरीक्षण किया और प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की गंभीर समस्याओं को सुना।
ब्लॉक प्रमुख ने ग्रामीणों को ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि वे इस मामले को तत्काल उच्चाधिकारियों और सरकार के समक्ष उठाएंगे, ताकि आपदा मद या अन्य योजनाओं के तहत जल्द से जल्द पक्के पुल की स्वीकृति दिलाकर निर्माण कार्य शुरू कराया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को आपातकालीन स्थिति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए।
आगामी दिनों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाला पानी मैदानी इलाकों के नदी-नालों के जलस्तर को और अधिक बढ़ाएगा। जिला प्रशासन ने शीला चौकी मार्ग सहित अन्य संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों से अपील की है कि वे उफनते नदी-नालों को पार करने का दुस्साहस न करें और पूरी तरह सतर्कता बरतें।





