अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

चमोली सुरंग हादसा: विष्णुगाड-पीपलकोटी प्रोजेक्ट में 7 मजदूरों की मौत, सीएम धामी ने की 4-4 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा

On: August 15, 2026 2:28 AM
Follow Us:
Chamoli Tunnel Accident rescue operation at Vishnugad-Pipalkoti hydroelectric project with SDRF teams and CM Pushkar Singh Dhami

​The Chamoli tunnel accident in Uttarakhand . उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में अचानक भूस्खलन और भारी जलभराव के कारण सात श्रमिकों की दुखद मौत हो गई, जबकि तीन मजदूर 24 घंटे बीत जाने के बाद भी लापता हैं. शुक्रवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीधे ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर हालात का मुआयना किया और पीड़ित परिवारों के लिए ₹4-4 लाख के मुआवजे के साथ-साथ मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराने के सख्त निर्देश दिए.

​Chamoli Tunnel Accident: कैसे और कब हुआ यह दर्दनाक हादसा?

​यह हृदयविदारक घटना गुरुवार शाम करीब पौने सात बजे घटी. चमोली जिले के पीपलकोटी (स्यासैंण हाट) क्षेत्र में अलकनंदा नदी पर टीएचडीसी (THDC) द्वारा संचालित विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की टेल रेस टनल (TRT) में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा था.

​प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के अनुसार, टनल के भीतर कैविटी की पैकिंग के उपरांत ग्राउटिंग का काम जारी था. उस समय पहली शिफ्ट खत्म होने में केवल एक घंटे का समय बचा था और टनल के अंदर लगभग 22 से 28 मजदूर अपनी शिफ्ट पर तैनात थे. अचानक पहाड़ी हिस्से में भूस्खलन हुआ और लूज जोन टूटने से भारी मात्रा में मलबा और पानी तेज रफ्तार से सुरंग के भीतर घुस गया. कुछ ही मिनटों में टनल का एक बड़ा हिस्सा दलदल और मलबे में तब्दील हो गया, जिससे वहां मौजूद कामगारों को बाहर निकलने का अवसर ही नहीं मिला.

​7 शव बरामद, 12 घायलों का चल रहा इलाज

​हादसे की जानकारी मिलते ही नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF), सीआईएसएफ (CISF), आईटीबीपी और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने युद्धस्तर पर राहत व बचाव अभियान शुरू किया.

​बचाव दल ने अब तक टनल से 19 श्रमिकों को निकाल लिया था, जिनमें से 7 मजदूरों को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया. मृतकों में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कामगार शामिल हैं. वहीं हादसे में घायल 12 अन्य मजदूरों को तुरंत गोपेश्वर जिला अस्पताल और श्रीनगर बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है और वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं.

​Relief Efforts in Chamoli Tunnel Accident: लापता 3 मजदूरों की खोज जारी

​टनल के भीतर 1800 से 1850 मीटर अंदर तक भारी सिल्ट और पानी भर जाने की वजह से रेस्क्यू टीमों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. लापता तीन श्रमिकों की सुरक्षित वापसी के लिए अभियान निरंतर चल रहा है.

  • पानी की निकासी: भारी क्षमता वाले सबमर्सिबल और डीवाटरिंग पंपों की मदद से टनल से गंदे पानी को बाहर निकाला जा रहा है.
  • मलबा हटाना: हेवी अर्थमूविंग मशीनों और लोडर की सहायता से अंदर जमे मलबे और दलदल को साफ किया जा रहा है.
  • अंडरवाटर व सर्च उपकरण: सर्च टीमों द्वारा विशेष उपकरणों और ऑक्सीजन सपोर्ट के जरिए आगे बढ़कर फंसे हुए कामगारों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है.

​सीएम पुष्कर सिंह धामी ने लिया जायजा, दिए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश

​शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं चमोली पहुंचे और उन्होंने टनल के अंदर जाकर ग्राउंड जीरो की स्थिति का निरीक्षण किया। सीएम ने बचाव दलों, जिला प्रशासन और टीएचडीसी के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत कर चल रहे ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद वे जिला अस्पताल भी पहुंचे, जहां उन्होंने घायल श्रमिकों से मिलकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और डॉक्टरों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

​मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि:

  1. मुआवजा राशि: सभी मृतक श्रमिकों के आश्रितों को राज्य सरकार की ओर से 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
  2. मजिस्ट्रेटी जांच: पूरी घटना के कारणों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
  1. लापता श्रमिकों के लिए त्वरित प्रयास: सीएम ने निर्देश दिया कि अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने तक रेस्क्यू अभियान लगातार बिना रुके चलता रहेगा।

​पहाड़ों में निर्माणाधीन परियोजनाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल

​इस भीषण Chamoli tunnel accident ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में चल रहे टनल व हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स की भूगर्भीय सुरक्षा मानकों पर बहस छेड़ दी है। स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान पर्वतीय संरचनाओं में पानी के दबाव और सीपेज के चलते लूज रॉक्स का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद सुरक्षा मानकों और कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की जाएगी। 

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment