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सीएम धामी का बड़ा फैसला: देहरादून-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना के लिए पेड़ों के कटान पर तत्काल रोक, जनभावनाओं के सम्मान में लिया निर्णय

On: July 18, 2026 11:05 AM
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Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami stops tree cutting for Dehradun-Rishikesh highway project due to environmental concerns.


​देहरादून, 18 जुलाई 2026

​उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और योग नगरी ऋषिकेश के बीच प्रस्तावित फोर/सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को लेकर चल रहे विवादों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बेहद संवेदनशील और बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोपरि रखते हुए इस परियोजना के मार्ग में आने वाले पेड़ों के कटान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

सीएम ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी हितधारकों और स्थानीय जनता के बीच एक संतोषजनक सहमति और विश्वास का माहौल नहीं बन जाता, तब तक इस क्षेत्र में एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा।

​पिछले कुछ दिनों से इस महत्वकांक्षी सड़क परियोजना को लेकर स्थानीय नागरिकों, पर्यावरणविदों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं और सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे थे।

मुख्यमंत्री धामी ने इन सभी चिंताओं और सुझावों का स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन को पुनर्विचार और संवाद स्थापित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

​NHAI की परियोजना में हैं कड़े सुरक्षा मानक

​मुख्यमंत्री ने आधिकारिक बयान में इस बात को स्पष्ट किया कि देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसंरचना (Infrastructure) परियोजना है।

इस परियोजना पर आगे की कार्यवाही माननीय उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों तथा सभी आवश्यक वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों और विधिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन करते हुए ही की जा रही थी।


​सरकार का उद्देश्य इस व्यस्ततम मार्ग पर यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाना है, क्योंकि वर्तमान में इस मार्ग पर वाहनों के बढ़ते दबाव के कारण आए दिन जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बनी रहती है।

​मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए विशेष इंतजाम

​इस परियोजना की खूबियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण का भी इसमें विशेष ध्यान रखा गया है। चूंकि यह मार्ग राजाजी नेशनल पार्क के बफर जोन और वन्यजीव गलियारों के करीब से गुजरता है, इसलिए एनएचएआई की इस योजना में लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा एक विशाल ‘हाथी अंडरपास’ (Elephant Underpass) शामिल किया गया है।

इसके अलावा, छोटे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष कल्वर्ट (Culverts) की व्यवस्था भी डिजाइन में जोड़ी गई है।


​इन आधुनिक प्रावधनों का मुख्य उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से होने वाली वन्यजीवों की दर्दनाक मौतों को रोकना है, जो इस हाईवे पर अक्सर देखने को मिलती हैं।

​संवाद और सर्वसम्मति से ही आगे बढ़ेगा कार्य: सीएम

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास और पर्यावरण के संतुलन को रेखांकित करते हुए कहा, “उत्तराखंड के आर्थिक और ढांचागत विकास के लिए बेहतर सड़कों का होना बेहद आवश्यक है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण की रक्षा और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई भी निर्णय नहीं लिया जाएगा। हमारी सरकार जनता की भावनाओं का सम्मान करने वाली सरकार है।”


​इसी उद्देश्य के साथ मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव (लोक निर्माण विभाग) और संबंधित जिलाधिकारियों व अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे आंदोलनरत स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के साथ मेज पर बैठकर पुनः एक विस्तृत और पारदर्शी संवाद स्थापित करें।

​उच्च न्यायालय के निर्देशों का होगा सम्मान

​सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए सभी निर्देशों और भावी निर्णयों का अक्षरशः पालन और पूर्ण सम्मान करेगी। सीएम ने कहा कि किसी भी विकास कार्य का उद्देश्य जनता को सुविधा देना होता है, न कि उनके मन में संशय पैदा करना।

इसलिए, जब तक पर्यावरणविदों और स्थानीय जनता को इस परियोजना के सभी पहलुओं से संतुष्ट नहीं कर दिया जाता और उनके बीच विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता, तब तक पेड़ों के कटान की प्रक्रिया पूरी तरह से स्थगित (Suspend) रहेगी।

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​मुख्यमंत्री के इस फैसले का उत्तराखंड के पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय जनता ने स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि इस कदम से न केवल दून घाटी के हरित आवरण (Green Cover) को बचाने में मदद मिलेगी, बल्कि एक लोकतांत्रिक संवाद के जरिए विकास की नई राह खुलेगी।

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