रामनगर/देहरादून, 18 जुलाई 2026
उत्तराखंड के विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से शनिवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। प्रदेश के कुमाऊं और गढ़वाल मंडल को आपस में सीधे जोड़ने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाते हुए आखिरकार बहुप्रतीक्षित रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन सेवा का शुभारंभ हो गया है।
उत्तराखंड वासियों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग को केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से पूरा कर दिया गया है।
इस नई रेल सेवा का उद्घाटन भव्य तरीके से डिजिटल और जमीनी दोनों माध्यमों से किया गया। नई दिल्ली से केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और देहरादून से राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।
वहीं, रामनगर रेलवे स्टेशन पर आयोजित मुख्य समारोह में पौड़ी गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी, हरिद्वार के सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तथा स्थानीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को गंतव्य के लिए रवाना किया।
कुमाऊं और गढ़वाल का सफर होगा बेहद सुगम
अब तक कुमाऊं क्षेत्र के रामनगर, काशीपुर और आस-पास के इलाकों से राजधानी देहरादून आने-जाने वाले यात्रियों को सड़क मार्ग के लंबे और थकाऊ सफर पर निर्भर रहना पड़ता था, या फिर काठगोदाम से चलने वाली ट्रेनों का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन इस नई ट्रेन के शुरू हो जाने से ‘दून अब दूर नहीं’ का नारा सच साबित हो गया है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “यह ट्रेन केवल दो शहरों को नहीं, बल्कि उत्तराखंड के दो प्रमुख सांस्कृतिक और भौगोलिक क्षेत्रों—कुमाऊं और गढ़वाल को आपस में जोड़ रही है। भारतीय रेलवे देवभूमि के कोने-कोने तक आधुनिक और सुरक्षित परिवहन सुविधाएं पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में मुरादाबाद रेल मंडल में ट्रैक और बुनियादी ढांचे से जुड़े कुछ तकनीकी कार्य चल रहे हैं, जिसके कारण शुरुआती चरण में इस ट्रेन को सप्ताह में दो दिन चलाया जाएगा। हालांकि, जैसे ही रूट का काम पूरी तरह संपन्न हो जाएगा, इस ट्रेन को प्रतिदिन (Daily) चलाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
उत्तराखंड में रेल क्रांति: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना से बदलेगी तस्वीर
समारोह के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री ने उत्तराखंड में चल रही अन्य बड़ी रेल परियोजनाओं की प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह परियोजना आने वाले समय में राज्य की आर्थिकी और पर्यटन के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाली है।
इस परियोजना के पूरा होने से पर्वतीय क्षेत्रों में न केवल कनेक्टिविटी सुधरेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
यात्री सुरक्षा, दक्षता और क्षमता का नया कालखंड: सीएम धामी
देहरादून से वर्चुअल माध्यम से जुड़े मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश और विशेषकर उत्तराखंड में रेल सुविधाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। आज रेलवे की यात्री सुरक्षा, आधुनिक सुविधाएं, गति, दक्षता और परिचालन क्षमता नए आयाम छू रही है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस शुरू होने से कुमाऊं के लोग अपने सरकारी, व्यापारिक और व्यक्तिगत कार्यों के लिए बेहद आसानी और किफायती तरीके से देहरादून आ-जा सकेंगे।
इसके साथ ही, देश-विदेश से विश्व प्रसिद्ध ‘जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क’ (रामनगर) आने वाले पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए अब देहरादून या हरिद्वार से सीधे रामनगर पहुंचना बहुत आसान हो जाएगा, जिससे राज्य के पर्यटन उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा।
सांसद अनिल बलूनी और त्रिवेंद्र रावत ने जताया आभार
रामनगर स्टेशन पर मौजूद पौड़ी के सांसद अनिल बलूनी ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद जनता को बधाई देते हुए कहा, “इस रेल सेवा का सबसे बड़ा लाभ पौड़ी जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों और रामनगर के आम नागरिकों, छात्रों व व्यापारियों को मिलेगा।
राज्य में बुनियादी ढांचे का विकास बेहद तेजी से हो रहा है।” वहीं हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसे डबल इंजन सरकार की विकास नीतियों का एक और प्रत्यक्ष प्रमाण बताया।
ट्रेन की समय सारणी और संचालन व्यवस्था
रेलवे प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रामनगर से देहरादून के बीच चलने वाली यह ट्रेन सप्ताह में दो दिन संचालित की जाएगी। यात्री हर बुधवार और शुक्रवार को इस सेवा का लाभ उठा सकेंगे।
ट्रेन में आधुनिक कोच और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि यात्रियों का सफर आरामदायक और सुरक्षित हो सके। स्थानीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने भी इसे रामनगर क्षेत्र के विकास में एक मील का पत्थर करार दिया।




