अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

​’गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे सरकार’: देहरादून में बकरीद की नमाज के बाद मुस्लिम संगठन की बड़ी मांग

On: March 14, 2026 10:12 AM
Follow Us:
देहरादून ईदगाह के बाहर हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करते मुस्लिम सेवा संगठन के लोग।

​देहरादून।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सौहार्द और एक बड़े सामाजिक संदेश के बीच एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। यहाँ चकराता रोड स्थित ऐतिहासिक ईदगाह में बकरीद (ईद-उल-अजहा) की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद एक मुस्लिम संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई है।

‘मुस्लिम सेवा संगठन’ के बैनर तले जुटे पदाधिकारियों और समाज के लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया और सरकार से अपील की कि गाय के नाम पर होने वाली राजनीति को अब हमेशा के लिए बंद किया जाना चाहिए।


​त्योहार के इस पावन मौके पर मुस्लिम समुदाय की ओर से उठी इस मांग ने न केवल सबका ध्यान खींचा है, बल्कि सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक नई बहस भी छेड़ दी है।

​ईदगाह के बाहर हाथों में तख्तियां लेकर जुटे लोग

​सोमवार को देहरादून के चकराता रोड स्थित ईदगाह में मुस्लिम समुदाय के हजारों लोगों ने पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ बकरीद की नमाज अदा की। देश और राज्य में अमन-चैन की दुआ मांगी गई। नमाज खत्म होते ही ईदगाह के मुख्य परिसर के बाहर मुस्लिम सेवा संगठन के कार्यकर्ता और पदाधिकारी इकट्ठा हो गए।


​इन लोगों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर साफ तौर पर लिखा था कि सरकार अविलंब गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित करे। संगठन के पदाधिकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हुए कहा कि यह मांग किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि देश में स्थायी भाईचारा कायम करने के उद्देश्य से की जा रही है।

​’गाय के नाम पर राजनीति और मुस्लिमों को निशाना बनाना बंद हो’

​मुस्लिम सेवा संगठन के उपाध्यक्ष आकिब कुरैशी ने इस दौरान मीडिया से बात करते हुए सरकार की नीयत पर सीधे सवाल उठाए। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा:


​”देश में लंबे समय से गाय को लेकर लगातार घटिया राजनीति की जा रही है। इस संवेदनशील मुद्दे की आड़ में अक्सर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जाता है और समाज में ध्रुवीकरण की कोशिश की जाती है। हमारा संगठन आज से नहीं, बल्कि पिछले लंबे समय से यह मांग करता आ रहा है कि सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दे। अगर सरकार सच में गाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो उसे यह कदम उठाने से कौन रोक रहा है?”

​केंद्र सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

​आकिब कुरैशी ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार अक्सर यह दावा करती है कि वह देश के बहुसंख्यक (हिंदू) समाज के समर्थन और उनकी आस्था के बल पर सत्ता में आई है। ऐसे में यदि बहुसंख्यक समाज के लिए गाय वास्तव में इतनी बड़ी आस्था, श्रद्धा और सम्मान का विषय है, तो फिर सरकार उसे अब तक राष्ट्रीय पशु घोषित क्यों नहीं कर पाई?


​संगठन का आरोप है कि केवल चुनावों के समय राजनीतिक लाभ लेने और समाज को बांटने के लिए ही गाय के मुद्दे को जानबूझकर हवा दी जाती है। चुनाव खत्म होते ही इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है, जो कि बिल्कुल भी उचित नहीं है। अब समय आ गया है कि सरकार को इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और एक ठोस निर्णय लेना चाहिए।

ये भी पढ़े➜हरिद्वार में पाकिस्तान कनेक्शन से करोड़ों का ट्रांजेक्शन, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने युवती को लिया हिरासत में

​गाय भारतीय संस्कृति का अटूट हिस्सा: मुस्लिम संगठन

​मुस्लिम सेवा संगठन के पदाधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि गाय केवल किसी एक धर्म या वर्ग की नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हमारी प्राचीन परंपराओं का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा को किसी भी तरह की संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।


​संगठन के सदस्यों का मानना है कि यदि गाय को कानूनी रूप से राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिल जाता है, तो इसके संरक्षण के लिए कड़े नियम बनेंगे, जिससे आवारा घूम रही गायों की स्थिति में सुधार होगा और इसके नाम पर समाज में नफरत फैलाने वाले तत्वों के हाथ से एक बड़ा मुद्दा हमेशा के लिए छिन जाएगा।

​समाज में भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने की अपील

​बकरीद के मौके पर संगठन ने समाज के सभी वर्गों से एकजुट रहने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधता से भरे देश में आपसी भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द सबसे बड़ी पूंजी है। इस सौहार्द को बचाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल पूरी तरह से बंद होना चाहिए।

​इस प्रदर्शन और मांग के दौरान ईदगाह परिसर के बाहर मुस्लिम सेवा संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह मुस्तैद दिखी।इस मांग के बाद अब देखना यह होगा कि उत्तराखंड की धामी सरकार या केंद्र सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment