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हरिद्वार में पाकिस्तान कनेक्शन से करोड़ों का ट्रांजेक्शन, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने युवती को लिया हिरासत में

On: March 14, 2026 9:56 AM
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हरिद्वार के पिरान कलियर में करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन मामले में युवती को हिरासत में ले जाती जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड पुलिस।

​हरिद्वार/पिरान कलियर।

उत्तराखंड के धार्मिक नगरी हरिद्वार के कलियर क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से पिरान कलियर थाना क्षेत्र के आसफनगर गांव में छापेमारी कर एक 26 वर्षीय युवती को हिरासत में लिया है।

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

युवती पर आरोप है कि उसके बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये का संदिग्ध वित्तीय लेनदेन (ट्रांजेक्शन) किया गया है, जिसके तार सीमा पार यानी पाकिस्तान से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

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​शुरुआती जांच में मामला अंतरराज्यीय साइबर और वित्तीय अपराध (Financial Fraud) के साथ-साथ देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस टीम युवती से इस पूरे नेटवर्क को लेकर गहन पूछताछ कर रही हैं।

​कठुआ में दर्ज मामले से खुला राज

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले का भंडाफोड़ जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में दर्ज एक मुकदमे के बाद हुआ। कठुआ पुलिस ने वित्तीय धोखाधड़ी और संदिग्ध लेनदेन के एक मामले में हाल ही में एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। जब पुलिस ने उस आरोपी को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने हरिद्वार के पिरान कलियर क्षेत्र के आसफनगर की रहने वाली ‘सोनम’ नाम की युवती का नाम उगला।


​आरोपी से मिली इनपुट के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस तुरंत हरकत में आई और एक विशेष टीम हरिद्वार पहुंची। स्थानीय कलियर पुलिस को साथ लेकर आसफनगर गांव में दबिश दी गई और सोनम को उसके घर से हिरासत में ले लिया गया।

​कमीशन के खेल में देश की सुरक्षा से खिलवाड़!

​जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा खेल डिजिटल बैंकिंग और कमीशन के लालच पर आधारित था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि सोनम के अलग-अलग बैंक खातों में देश के विभिन्न राज्यों से भारी-भरकम रकम ट्रांसफर की जाती थी। जैसे ही रकम खाते में आती थी, सोनम को उसे तुरंत दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार अन्य संदिग्ध बैंक खातों में ट्रांसफर करना होता था।

​हर ट्रांजेक्शन पर मिलता था कमीशन:

पूछताछ में पता चला है कि इस काम के बदले सोनम को हर एक ट्रांजेक्शन पर 500 रुपये से लेकर 1,000 रुपये तक का कमीशन दिया जाता था। इसी चंद रुपयों के कमीशन के चक्कर में वह इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा बन गई। हालांकि, पुलिस की छापेमारी के दौरान युवती के घर से कोई नकद राशि (कैश) बरामद नहीं हुई है।

​पोस्ट ग्रेजुएट है आरोपी सोनम, ऐसे फंसी जाल में

​हैरानी की बात यह है कि हिरासत में ली गई 26 वर्षीय सोनम अनपढ़ नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित (पोस्ट ग्रेजुएट) है। पढ़े-लिखे होने के बावजूद वह साइबर अपराधियों के झांसे में आ गई। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से सोनम कुछ संदिग्ध लोगों के संपर्क में आई थी।


​उन लोगों ने सोनम को अपने दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड) भेजकर नए बैंक खाते खुलवाने के लिए कहा। खाता खुलते ही उसमें अचानक हजारों और करोड़ों रुपये की डिजिटल एंट्री होने लगी। सोनम को केवल पैसे को एक खाते से दूसरे खाते में भेजकर अपनी ‘चेन’ को आगे बढ़ाना था।

​जांच एजेंसियों के सामने खड़े हुए ये बड़े सवाल

​मामले में ‘पाकिस्तान कनेक्शन’ की बात सामने आने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियां भी अलर्ट हो गई हैं। अब जांच का दायरा केवल साइबर ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे टेरर फंडिंग या देश विरोधी गतिविधियों की आशंकाओं को भी खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसियां मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर तफ्तीश कर रही हैं:

  • ​नेटवर्क की गहराई: क्या सोनम सिर्फ कमीशन के लालच में बैंक खाता उपलब्ध कराने वाली एक मोहरा (Money Mule) थी, या वह इस पूरे नेटवर्क के कर्ता-धर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से जानती थी?
  • ​मास्टरमाइंड कौन?: पाकिस्तान में बैठे किन लोगों के इशारे पर भारत में यह सिंडिकेट चलाया जा रहा है और कठुआ से लेकर हरिद्वार तक इसके कितने मददगार फैले हैं?
  • ​फंड का इस्तेमाल: खातों में आने वाले करोड़ों रुपये आखिर किस काम के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे? क्या इसका इस्तेमाल साइबर अपराध के जरिए ठगे गए पैसों को ठिकाने लगाने (Money Laundering) के लिए हो रहा था?
    ​पुलिस सोनम के मोबाइल फोन, डिजिटल ट्रांजेक्शन हिस्ट्री, कॉल डिटेल्स (CDR) और उसके संपर्क सूत्रों की बारीकी से स्क्रूटनी कर रही है।

​स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म

​इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी के बाद शांत माने जाने वाले कलियर और आसफनगर क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। हर तरफ इस बात की चर्चा है कि कैसे एक ग्रामीण इलाके की पढ़ी-लिखी युवती इतने बड़े संदिग्ध नेटवर्क में शामिल हो गई।

​क्या कहती है स्थानीय पुलिस?

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। कलियर कोतवाली निरीक्षक कमल मोहन भंडारी ने आधिकारिक तौर पर बताया कि यह पूरा मामला जम्मू-कश्मीर में दर्ज एक मुकदमे से संबंधित है।

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इसलिए, इस पूरी कानूनी कार्रवाई और जांच का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर पुलिस ही कर रही है। स्थानीय पुलिस ने नियम के अनुसार केवल आवश्यक सहयोग और सुरक्षा बल उपलब्ध कराया है। आगे की पूछताछ और वैधानिक कार्रवाई जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा ही अमल में लाई जाएगी।

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