“देहरादून में कूड़ा उठान व्यवस्था चरमराई, 10-10 दिन तक नहीं पहुंच रही निगम की गाड़ियां, नागरिकों में आक्रोश”

देहरादून। नगर निगम भले ही दावा कर रहा हो कि शहर के 80 प्रतिशत क्षेत्रों में नियमित रूप से कूड़ा उठान हो रहा है और निगरानी भी की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे एकदम अलग है। शहर के कई हिस्सों में हफ्तों तक कूड़ा वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे स्थानीय लोग बेहद परेशान हैं। गर्मी और बरसात के मौसम में कूड़ा सड़ने से दुर्गंध फैल रही है और संक्रमण तथा मच्छरजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

शिकायतों का अंबार, निगम बेखबर

‘दैनिक जागरण’ द्वारा इस गंभीर समस्या को उजागर करने के लिए शिकायतें आमंत्रित की गईं तो गुरुवार को ही कार्यालय में 100 से अधिक लोगों ने अपनी समस्याएं साझा कीं। ये शिकायतें किसी एक मोहल्ले की नहीं थीं, बल्कि इनमें पॉश रिहायशी इलाकों से लेकर नगर निगम में हाल ही में शामिल हुए नए वार्ड भी शामिल रहे। शिकायतों में सबसे प्रमुख मुद्दा था कि कूड़ा उठान की गाड़ियां कई स्थानों पर हफ्ते में एक बार ही आती हैं, तो कुछ इलाकों में दस दिनों तक कोई वाहन नहीं पहुंचता।

वार्ड-66 रायपुर: सबसे ज्यादा उपेक्षित

शहर के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में वार्ड-66 रायपुर का नाम सबसे ऊपर है। यहां करीब नौ हजार की आबादी रोजाना कूड़े के ढेर के बीच जीवन जीने को मजबूर है। निगम की कूड़ा उठान सेवा इस क्षेत्र में हफ्ते में मुश्किल से एक बार पहुंच रही है। वैष्णव विहार और दुर्गा डेरी के आसपास स्थिति और भी खराब है। नालियों में कूड़ा जमा है, रास्तों पर गंदगी फैली है और बदबू के कारण लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है।

स्थानीय निवासी बताते हैं कि यह समस्या कोई नई नहीं है। पिछले डेढ़ महीने से स्थिति लगातार बिगड़ रही है। कई बार नगर निगम से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन मिल रहा है। लोगों का कहना है कि अब उनका सब्र जवाब दे रहा है और यदि जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे।

स्वच्छता की चुनौती और प्रशासन की उदासीनता

देहरादून जैसे शहर में जहां स्वच्छ भारत मिशन की बात की जाती है, वहां इस तरह की लापरवाही प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। नगर निगम की ओर से हर क्षेत्र में नियमित कूड़ा उठान के दावों की सच्चाई जनता के अनुभवों से अलग दिख रही है। ऐसे में आवश्यक है कि निगम अपने स्तर पर त्वरित कार्रवाई करे, निगरानी को और मजबूत बनाए और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल व्यवस्था सुधारे।

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