देहरादून।
वैश्विक मोर्चे पर बढ़ते तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव का सीधा असर अब आम जनता की जेब पर पड़ने लगा है।
सोमवार को देशभर के साथ-साथ उत्तराखंड में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस ताजा इजाफे के बाद प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर गई हैं। राजधानी देहरादून समेत राज्य के तमाम पहाड़ी और मैदानी इलाकों में ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम आदमी का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
क्यों बढ़ रहे हैं अचानक दाम? (मुख्य कारण)
बाजार विश्लेषकों और जानकारों के मुताबिक, घरेलू बाजार में तेल की कीमतों में आई इस अचानक तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं:
- पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) बुरी तरह प्रभावित हुई है।
- अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें: वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है, जिसका सीधा असर भारतीय तेल कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है।
- रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य में आई गिरावट ने भी आग में घी का काम किया है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा हो गया है।
आज कितनी हुई बढ़ोतरी?
सोमवार सुबह तेल कंपनियों द्वारा जारी की गई नई दरों के मुताबिक, उत्तराखंड में ईंधन की कीमतों में एक बार फिर बड़ा जंप देखा गया है:
- पेट्रोल: प्रति लीटर ₹2.61 की भारी बढ़ोतरी की गई है।
- डीजल: प्रति लीटर ₹2.71 महंगा हो गया है।
लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका दिया है। इससे पहले बीते शनिवार को भी कीमतों में वृद्धि की गई थी, जिसके बाद राजधानी देहरादून में पेट्रोल ₹2.68 बढ़कर ₹96.25 प्रति लीटर और हरिद्वार में ₹2.72 बढ़कर ₹95.41 प्रति लीटर पर पहुंच गया था। लेकिन सोमवार को हुई इस नई बढ़ोतरी ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और कीमतें ₹100 के पार निकल गई हैं।
उत्तराखंड के इन जिलों में सबसे महंगा हुआ पेट्रोल
भौगोलिक स्थिति और परिवहन लागत (फ्रेट चार्ज) के कारण उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में ईंधन हमेशा से मैदानी इलाकों की तुलना में थोड़ा महंगा रहता है। सोमवार को हुई इस भारी वृद्धि के बाद राज्य के चार जिलों में पेट्रोल सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है:
जिला
स्थिति
बागेश्वर
₹100 प्रति लीटर के पार
चमोली
₹100 प्रति लीटर के पार
टिहरी
₹100 प्रति लीटर के पार
उत्तरकाशी
₹100 प्रति लीटर के पार
इन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को अब अपनी गाड़ियों में तेल डलवाने के लिए पहले से कहीं ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है।
देहरादून और हरिद्वार में आज की नई कीमतें (Dehradun Petrol-Diesel Price)
शनिवार को देहरादून में पेट्रोल की कीमत ₹96.25 थी, जिसमें आज ₹2.61 का नया इजाफा होने के बाद अब राजधानी में भी पेट्रोल ₹98.86 प्रति लीटर के आसपास पहुंच गया है, वहीं डीजल की कीमतें भी ₹93 से ₹94 प्रति लीटर के पार जा चुकी हैं। (विभिन्न फ्यूल स्टेशनों पर स्थानीय स्तर पर कुछ पैसों का अंतर हो सकता है)।
हरिद्वार की बात करें तो शनिवार को यहाँ पेट्रोल ₹95.41 था, जो आज बढ़कर ₹98.02 प्रति लीटर के स्तर को छू रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति रही, तो जल्द ही देहरादून और हरिद्वार में भी पेट्रोल शतक लगा देगा।
आम जनता और व्यापार जगत पर क्या होगा असर?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस चौतरफा बढ़ोतरी का सीधा असर केवल वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि हर आम और खास इंसान पर पड़ने वाला है।
महंगाई बढ़ने की आशंका: डीजल की कीमतों में ₹2.71 की बड़ी बढ़ोतरी के कारण माल ढुलाई (Transportation Cost) महंगी हो जाएगी। फल, सब्जियां, दूध और अन्य रोजमर्रा के जरूरी सामानों को एक शहर से दूसरे शहर ले जाने का खर्च बढ़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में महंगाई का ग्राफ ऊपर जाना तय है।
इसके अलावा, उत्तराखंड एक पर्यटन राज्य है। ऐसे में जो सैलानी अपनी गाड़ियों से चारधाम यात्रा या अन्य पर्यटन स्थलों (जैसे मसूरी, नैनीताल) का रुख कर रहे हैं, उनका ट्रैवल बजट भी इस बढ़ोतरी के कारण काफी बिगड़ जाएगा। स्थानीय टैक्सी और ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने भी किरायों में बढ़ोतरी के संकेत देने शुरू कर दिए हैं।
निष्कर्ष
वैश्विक परिस्थितियों के दबाव में भारतीय तेल विपणन कंपनियों (HPCL, IOCL, BPCL) के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। लेकिन उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए, जहाँ जीवनयापन पहले से ही चुनौतीपूर्ण है, वहां तेल की कीमतों का ₹100 के पार जाना आम जनता के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या आने वाले दिनों में सरकार टैक्स में कटौती कर जनता को कुछ राहत देती है, या फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार के सुधरने का इंतजार करना होगा।








