पेट्रोल पंप के पास दिनदहाड़े सड़क पर आया गुलदार, मोबाइल कैमरे में कैद हुई तस्वीर; आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप
देहरादून/डोईवाला।
राजधानी देहरादून के सीमावर्ती व वनीय क्षेत्रों से सटे रिहायशी इलाकों में मानव और वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। डोईवाला स्थित लच्छीवाला वन रेंज से सटे ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ समय से गुलदार (तेंदुए) की लगातार आवाजाही ने स्थानीय निवासियों की नींद उड़ा दी है। गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब दूधली मार्ग पर स्थित एक पेट्रोल पंप के ठीक सामने बीच सड़क पर एक गुलदार खुलेआम घूमता नजर आया।
दिनदहाड़े मुख्य मार्ग पर गुलदार को देखकर राहगीरों और वाहन चालकों में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद एक साहसी ग्रामीण ने इस पूरे दृश्य की तस्वीर अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर ली, जो देखते ही देखते इंटरनेट मीडिया (सोशल मीडिया) पर जमकर वायरल हो गई। इस घटना के बाद से पूरे डोईवाला और आसपास के क्षेत्रों में खौफ और दहशत का माहौल और गहरा गया है।
दिन में भी थमने लगी ग्रामीणों की आवाजाही, घरों में दुबकने को मजबूर लोग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह केवल एक दिन की घटना नहीं है। लच्छीवाला रेंज से सटे गाँव—दूधली, सिमलास ग्रांट, झड़ोंद, नागल और बुलंदावाला सहित कई आसपास की बस्तियों में पिछले कई हफ्तों से गुलदार का मूवमेंट लगातार देखा जा रहा है। रात के समय तो दूर, अब शाम ढलते ही लोग अपने घरों से बाहर निकलने में कतराने लगे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, गुलदार कई बार देर रात घरों की छतों, आंगनों और तंग गलियों में घूमता पाया गया है। कई स्थानों पर स्थानीय निवासियों के घरों में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में भी गुलदार की चहलकदमी दर्ज हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले वे फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले और बस्तियों में घुस आने वाले जंगली हाथियों की वजह से परेशान थे, और अब गुलदार के इस तरह रिहायशी इलाकों में सक्रिय होने से लोगों की जान पर बन आई है। बच्चे, बुजुर्ग और मवेशियों को लेकर परिजन बेहद चिंतित हैं।
वन विभाग के रवैये से जनता में भारी आक्रोश
गुलदार की बढ़ती धमक के बावजूद वन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने से स्थानीय लोगों में गहरा असंतोष व्याप्त है। क्षेत्रवासियों का सीधा आरोप है कि बार-बार पत्राचार करने और शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद वन प्रभाग की टीम न तो क्षेत्र में गश्त बढ़ा रही है और न ही वन्यजीव को पकड़ने के लिए पिंजरा लगा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की यह कथित सुस्ती किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है। यदि समय रहते गुलदार को नहीं पकड़ा गया तो आबादी वाले इलाकों में कभी भी कोई दुखद घटना घटित हो सकती है।
जनप्रतिनिधियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मोर्चा खोल दिया है। ब्लॉक प्रमुख गौरव सिंह ने वन विभाग के ढुलमुल रवैये पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने प्रभावित इलाकों में तुरंत प्रभाव से सुरक्षा उपाय नहीं किए, तो क्षेत्रवासी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
ब्लॉक प्रमुख और स्थानीय प्रतिनिधिमंडल ने वन विभाग से निम्नलिखित प्रमुख मांगें की हैं:
• पिंजरा लगाने की मांग: प्रभावित गांवों और दूधली मार्ग के संवेदनशील स्थानों पर तत्काल सुरक्षा पिंजरे स्थापित किए जाएं।
• सघन गश्त (Patrolling): वन कर्मियों की विशेष टीमों का गठन कर दिन और रात के समय रिहायशी इलाकों में नियमित गश्त शुरू की जाए।
• निगरानी एवं ट्रैपिंग: आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन या नाइट-विजन कैमरों के जरिए गुलदार की लोकेशन ट्रैक की जाए ताकि उसे जल्द से जल्द जंगल की ओर खदेड़ा या पकड़ा जा सके।
वन विभाग को त्वरित कार्रवाई करने की आवश्यकता
देहरादून के आसपास के इलाकों में वनों का घनत्व और मानव बस्तियों का विस्तार अक्सर वन्यजीवों को भोजन व पानी की तलाश में आबादी की तरफ खींच लाता है। हालांकि, जब वन्यजीव खुलेआम व्यस्त मार्गों और पेट्रोल पंपों के पास दिखने लगें, तो यह सीधे तौर पर जनसुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाता है।
अब देखना यह होगा कि सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल होने और जनआक्रोश बढ़ने के बाद लच्छीवाला वन रेंज की टीम क्या ठोस कदम उठाती है। क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि धरातल पर पिंजरा लगाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की सख्त जरूरत है।








