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सीएम धामी का बड़ा एलान: ‘देवभूमि की सड़कों पर नमाज बर्दाश्त नहीं, कानून से ऊपर कोई नहीं’

On: May 22, 2026 10:59 AM
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Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami speaking at a press conference in Dehradun about law and order and road safety.

​देहरादून,

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सूबे की कानून व्यवस्था और धार्मिक स्थलों के उपयोग को लेकर एक बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री ने साफ और दो टूक शब्दों में एलान किया है कि ‘देवभूमि’ कहे जाने वाले उत्तराखंड की सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी स्थिति में नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य में कानून का राज सर्वोपरि है और व्यवस्था से ऊपर उठकर काम करने की इजाजत किसी को भी नहीं है।

​मुख्यमंत्री के इस कड़े बयान के बाद राज्य के प्रशासनिक और पुलिस अमले में हलचल तेज हो गई है। सीएम ने जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि वे सार्वजनिक मार्गों पर होने वाली ऐसी गतिविधियों पर पैनी नजर रखें और बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आएं।

​’सड़कें आवाजाही के लिए हैं, धार्मिक आयोजनों के लिए नहीं’

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार सभी धर्मों और नागरिकों की आस्था का पूरा सम्मान करती है, लेकिन आस्था के नाम पर आम जनता के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “सड़कें आम जनता के सुगम आवागमन, आपातकालीन सेवाओं और व्यापारिक गतिविधियों के लिए बनाई गई हैं। इन्हें किसी भी प्रकार के धार्मिक अवरोध, प्रदर्शन या समागम का जरिया नहीं बनने दिया जा सकता।”

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​सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों को बंधक बनाकर आम नागरिकों के लिए असुविधा खड़ी करना या शहर की गतिशीलता को रोकना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग नियमों का उल्लंघन कर सड़कों को जाम करने की कोशिश करेंगे, प्रशासन उनके खिलाफ बिना किसी हिचकिचाहट के कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

​’मस्जिद और ईदगाह जैसे निर्धारित स्थानों का ही करें उपयोग’

​नमाज के संदर्भ में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इबादत के लिए पहले से ही धार्मिक स्थल और स्थान तय हैं। उन्होंने कहा, “नमाज पूरी तरह से मस्जिदों, ईदगाहों और प्रशासन द्वारा चिन्हित या निर्धारित किए गए स्थानों के भीतर ही पढ़ी जानी चाहिए। जब पवित्र परिसरों और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था उपलब्ध है, तो सड़कों पर आकर लोगों के लिए परेशानी खड़ी करने का कोई औचित्य नहीं बनता है।”

​धार्मिक अनुशासन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि अपनी पवित्रता, शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। ऐसे में राज्य के मूल सांस्कृतिक और अनुशासित स्वरूप को बनाए रखना सभी समुदायों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

​चारधाम यात्रा के मद्देनजर सरकार बेहद गंभीर

​अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वर्तमान में चल रही देश-प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस समय देश और दुनिया के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक बाबा केदार, बदरी विशाल, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। ऐसे संवेदनशील समय में राज्य की कानून व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और शांतिपूर्ण माहौल को अक्षुण्ण रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

​सीएम ने कहा, “यात्रियों की भारी आमद के कारण सड़कों पर पहले से ही यातायात का भारी दबाव है। ऐसे में यदि सार्वजनिक मार्गों पर किसी भी तरह का व्यवधान उत्पन्न होता है, तो इससे न केवल स्थानीय कानून व्यवस्था चरमराएगी, बल्कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं में भी राज्य की छवि को लेकर नकारात्मक संदेश जाएगा। सरकार देवभूमि के शांत वातावरण से खिलवाड़ करने की किसी को भी छूट नहीं देगी।”

​विपक्ष पर साधा निशाना, तुष्टिकरण की राजनीति का लगाया आरोप

​मुख्यमंत्री धामी ने इस मुद्दे को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और नेता महज अपने तुच्छ वोट बैंक को साधने के लिए इस प्रकार की अराजकता और सड़कों पर नमाज जैसी गतिविधियों का परोक्ष रूप से समर्थन कर रहे हैं।


​सीएम ने कहा, “तुष्टिकरण की राजनीति ने हमेशा समाज के ताने-बाने को नुकसान पहुंचाया है। कुछ ताकतें उत्तराखंड के भीतर भी इसी एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती हैं, लेकिन हमारी सरकार की नीति और नीयत पूरी तरह साफ है। उत्तराखंड में सिर्फ और सिर्फ कानून का राज चलेगा, तुष्टिकरण का नहीं। हम किसी भी वर्ग या संगठन के दबाव में आकर राज्य की सांस्कृतिक मर्यादा को धूमिल नहीं होने देंगे।”

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​अराजकता फैलाने वालों को सख्त चेतावनी

​आर्टिकल के अंत में मुख्यमंत्री के कड़े लहजे का जिक्र करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि देवभूमि की शांति और सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो भी तत्व कानून अपने हाथ में लेने या सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा डालकर अराजकता फैलाने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ पुलिस सख्त कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करेगी। सरकार का विजन साफ है—उत्तराखंड के विकास के लिए शांति, अनुशासन और सुरक्षा सबसे बुनियादी जरूरतें हैं, और इसे हर हाल में कायम रखा जाएगा।

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