मुख्य बिंदु:
- चुनावी कार्यक्रम: निर्वाचन आयोग (EC) ने घोषित की तारीखें; 18 जून को सुबह से शाम तक मतदान और उसी दिन आएंगे परिणाम।
- दायरा: 12 राज्यों की कुल 26 सीटों पर घमासान; 10 राज्यों में नियमित चुनाव और 2 राज्यों में होने हैं उपचुनाव।
- हाई-प्रोफाइल सीटें: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, दिग्विजय सिंह, रवनीत सिंह बिट्टू और पूर्व पीएम देवेगौड़ा समेत 24 सांसदों का कार्यकाल हो रहा खत्म।
- उपचुनाव: महाराष्ट्र से सुनेत्रा पवार और तमिलनाडु से सी. वे. षणमुगम के इस्तीफे से खाली सीटों पर भी इसी दिन होगी वोटिंग।
देश के 12 राज्यों में उच्च सदन के लिए सियासी हलचल तेज
नई दिल्ली (ब्यूरो): भारतीय राजनीति में लोकसभा के बाद अब संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के लिए सियासी गोटियां बिछनी शुरू हो गई हैं। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने देश के 12 राज्यों की कुल 26 राज्यसभा सीटों पर चुनाव कराने की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इन सभी सीटों के लिए आगामी 18 जून को देशव्यापी स्तर पर मतदान कराया जाएगा। लोकतंत्र की पारदर्शिता को बनाए रखते हुए आयोग ने तय किया है कि मतदान संपन्न होने के तुरंत बाद उसी दिन शाम को मतों की गणना भी कर दी जाएगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव संसद के भीतर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के संख्या बल को प्रभावित करेगा। खासकर उन राज्यों में जहाँ हालिया विधानसभा समीकरण बदले हैं, वहाँ सीटों का गणित काफी दिलचस्प होने वाला है।
24 नियमित सीटों के साथ 2 सीटों पर उपचुनाव का पूरा समीकरण
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी विस्तृत बयान के मुताबिक, यह चुनावी प्रक्रिया दो हिस्सों में विभाजित है। इसमें 24 सीटों पर नियमित चुनाव होने हैं, जबकि 2 सीटों पर रिक्त स्थान को भरने के लिए उपचुनाव का सहारा लिया जाएगा।
10 राज्यों में नियमित चुनाव का ब्योरा:
जिन 10 राज्यों में नियमित चुनाव हो रहे हैं, वहां के मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई के बीच अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होने जा रहा है। आयोग ने समय से पूर्व ही इन सीटों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्यों के अनुसार सीटों का विवरण इस प्रकार है:
| राज्य का नाम | खाली होने वाली सीटें |
| आंध्र प्रदेश | 04 |
| गुजरात | 04 |
| कर्नाटक | 04 |
| मध्य प्रदेश | 03 |
| राजस्थान | 03 |
| झारखंड | 02 |
| मणिपुर | 01 |
| मेघालय | 01 |
| अरुणाचल प्रदेश | 01 |
| मिजोरम | 01 |
महाराष्ट्र और तमिलनाडु में क्यों हो रहे हैं उपचुनाव?
10 राज्यों की 24 नियमित सीटों के अलावा निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र और तमिलनाडु की एक-एक खाली सीट पर भी उपचुनाव कराने का फैसला किया है।
- महाराष्ट्र: यहाँ से राज्यसभा सांसद रहीं और वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के कारण यह सीट खाली हुई थी।
- तमिलनाडु: एआईएडीएमके (AIADMK) के वरिष्ठ नेता सी. वे. षणमुगम के सदन से इस्तीफे के बाद यह सीट रिक्त चल रही थी।
इन दोनों सीटों पर भी 18 जून को ही वोट डाले जाएंगे, जिससे राज्यों के प्रतिनिधित्व में कोई कमी न रहे।
संसद के इन दिग्गज नेताओं की कुर्सी दांव पर
इस बार का राज्यसभा चुनाव इस मायने में बेहद खास है क्योंकि देश की राजनीति के कई शीर्ष चेहरे इस कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त (Retire) हो रहे हैं। इनमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के कद्दावर नेता शामिल हैं, जिनके भाग्य का फैसला उनकी संबंधित राज्य विधानसभाओं के विधायक करेंगे।
कार्यकाल समाप्त होने वाले प्रमुख नेताओं में:
- मल्लिकार्जुन खरगे: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता।
- एच डी देवेगौड़ा: देश के पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ राजनेता।
- दिग्विजय सिंह: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर रणनीतिकार।
- जॉर्ज कूरियन: केंद्रीय मंत्रिमंडल के अहम सदस्य।
- रवनीत सिंह बिट्टू: केंद्रीय राज्य मंत्री और पंजाब की राजनीति का प्रमुख चेहरा।
इनके अलावा कुल 24 सांसदों की विदाई के बाद नए और पुराने चेहरों के मिश्रण से राज्यसभा का नया स्वरूप तैयार होगा।
चुनाव आयोग की तैयारी और सुरक्षात्मक मानक
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए सभी संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं। मतपेटियों, ईवीएम (जहाँ लागू हो) और मतदान केंद्रों पर वीडियोग्राफी की विशेष व्यवस्था की जाएगी। विधायकों के दलीय व्हिप और मतदान प्रक्रिया पर भी आयोग की पैनी नजर रहेगी ताकि क्रॉस-वोटिंग जैसी स्थितियों पर नजर रखी जा सके।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार:
”जून के महीने में पड़ने वाली भीषण गर्मी को देखते हुए सभी मतदान केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है। मतों की गिनती भी उसी शाम को सुनिश्चित की गई है ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी या विवाद से बचा जा सके।”
Doon Prime News का राजनीतिक विश्लेषण
इस चुनाव के बाद उच्च सदन (Upper House) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट के बीच शक्ति संतुलन में थोड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में जहाँ भाजपा का पलड़ा भारी है, वहीं कर्नाटक, झारखंड और आंध्र प्रदेश में स्थानीय सियासी समीकरणों के आधार पर सीटों का बंटवारा बेहद कड़ा होने की उम्मीद है। सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के चयन के लिए मंथन शुरू कर दिया है।











