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​अमेरिकी चुनाव में ड्रैगन की सेंध? ट्रंप का सनसनीखेज दावा— ‘चीन ने चुराया 22 करोड़ वोटरों का डेटा, खुफिया एजेंसियों ने दबाई सच्चाई’

On: July 17, 2026 3:42 AM
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Former US President Donald Trump delivering a serious national address from a podium, with a digital background showing cyber security data, data servers, and the Chinese national flag, symbolizing election data theft allegations.

​मुख्य बिंदु (Key Highlights)

• ​बड़ा आरोप: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा— चीन ने किया 2020 के अमेरिकी चुनाव में इतिहास का सबसे बड़ा डेटा हमला।
• ​डेटा की चोरी: 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की संवेदनशील फाइलें और डेटा चीन द्वारा अवैध रूप से हासिल करने का आरोप।
• ​एजेंसियों पर निशाना: CIA, FBI और अन्य खुफिया संगठनों पर जानबूझकर जानकारी छिपाने और राष्ट्रपति व कांग्रेस को गुमराह करने का आरोप लगाया।
• ​विदेशी वोटर्स का मुद्दा: होमलैंड सिक्योरिटी की जांच का हवाला देते हुए करीब 2.78 लाख गैर-नागरिकों के वोटर लिस्ट में रजिस्टर्ड होने का दावा।

​वाशिंगटन डीसी (अमेरिका)

​अमेरिकी लोकतंत्र और चुनावी निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम एक विशेष संबोधन में चीन और अपनी ही खुफिया एजेंसियों पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। ट्रंप का दावा है कि साल 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान चीन ने इतिहास की सबसे बड़ी चुनावी डेटा सेंधमारी की थी, जिसके तहत 22 करोड़ से अधिक अमेरिकी मतदाताओं का व्यक्तिगत और संवेदनशील डेटा अवैध रूप से चुराया गया।


​ट्रंप ने न केवल चीन पर इस चुनावी धांधली का आरोप मढ़ा, बल्कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA, FBI और ODNI) को भी कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उन्होंने इस महा-साजिश को जानबूझकर तत्कालीन राष्ट्रपति, कांग्रेस और अमेरिकी जनता से छिपाए रखा।

​चीन की ‘डेटा एक्सप्लॉइटेशन यूनिट’ का सनसनीखेज दावा

​डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सार्वजनिक हुए कुछ गोपनीय दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने के लिए एक विशेष ‘डेटा एक्सप्लॉइटेशन यूनिट’ (डेटा का गलत इस्तेमाल करने वाली यूनिट) तैनात की थी।


​ट्रंप के मुताबिक:


​”चीन ने 2020 के चुनाव के समय से लेकर कई वर्षों तक अमेरिकी चुनावी डेटा के साथ अब तक की सबसे बड़ी छेड़छाड़ की।

इस अवैध हैकिंग के जरिए चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी नागरिकों के नाम, पते, फोन नंबर, उनकी राजनीतिक पार्टी की पसंद और अन्य अति-संवेदनशील डेटा हासिल कर लिए। इस डेटा का इस्तेमाल वोट रजिस्ट्रेशन और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसी अवैध गतिविधियों में किया गया, जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक अभूतपूर्व संकट है।”

​18 राज्यों की वोटर फाइलों में सेंधमारी, खुफिया एजेंसियां खामोश रहीं?

​ट्रंप ने अमेरिकी खुफिया तंत्र पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि साल 2020 में ही एजेंसियों को यह भनक लग गई थी कि अमेरिका के कम से कम 18 राज्यों में करोड़ों वोटर्स की फाइलों के साथ छेड़छाड़ की गई है। आरोप है कि चीन ने इन राज्यों के डेटा को या तो खरीदा, चुराया या फिर हैक किया था।

​ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा, “जिन्हें समय रहते देश को सचेत करना चाहिए था, उन्होंने जानबूझकर इस सच पर पर्दा डाले रखा। उन्होंने राष्ट्रपति के तौर पर मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी और न ही अमेरिकी कांग्रेस को सूचित किया। वे लगातार देशवासियों से यही झूठ बोलते रहे कि यह अमेरिकी इतिहास का सबसे सुरक्षित चुनाव है।”

​ट्रंप को हराने और सत्ता से हटाने की थी चीनी नीति!

​संबोधन के दौरान ट्रंप ने एक कथित CIA रिपोर्ट का जिक्र किया। उनके अनुसार, 2018 के मध्य में ही चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने एक गुप्त नीति तैयार की थी। इस नीति का एकमात्र उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) का विरोध करने वाले घरेलू और विदेशी तत्वों का इस्तेमाल कर उनके वोट बैंक को कमजोर करना, उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर करना या फिर उनके दोबारा चुने जाने की राह में रोड़े अटकाना था।

ट्रंप का आरोप है कि चीन ने इस एजेंडे के तहत 2018 के मिड-टर्म इलेक्शन और फिर 2020 के मुख्य राष्ट्रपति चुनाव को सीधे तौर पर प्रभावित करने की कोशिश की।


​उन्होंने ‘ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ (ODNI), न्याय विभाग (DOJ), FBI और CIA से इस बात की तुरंत जांच करने की मांग की है कि आखिर इतनी संवेदनशील जानकारी देश से क्यों छिपाई गई? उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस साजिश को दबाने में शामिल अधिकारियों को तत्काल नौकरी से बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ सख्त आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं।

​ओबामा काल के ‘बर्न बैग्स’ और अवैध वोटर्स का मुद्दा

​अपने भाषण में ट्रंप ने एक और हैरान करने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में बड़ी संख्या में ऐसे ‘बर्न बैग्स’ (नष्ट की जाने वाली गोपनीय फाइलें) मिले हैं, जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान जलाने का आदेश दिया गया था। हालांकि, अयोग्यता या किसी अन्य तकनीकी कारण से वे बैग नष्ट होने से बच गए और अब उनमें छिपे हैरान करने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।


​इसके साथ ही, ट्रंप ने ‘डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ (DHS) की एक ताजा जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए अमेरिकी वोटर लिस्ट की सुरक्षा पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि राज्यों की वोटर लिस्ट के विश्लेषण से पता चला है कि लगभग 2,78,000 ऐसे लोग मतदाता सूची में रजिस्टर्ड हैं जो अमेरिकी नागरिक ही नहीं हैं, फिर भी वे संघीय चुनावों में वोट देने के योग्य बने हुए हैं। ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर आरोप लगाया कि उनके शासित राज्य अपनी वोटर फाइलें साझा नहीं करते, जिससे अवैध वोटर्स की यह संख्या असल में लाखों में हो सकती है।

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​”सुरक्षित चुनाव राजनीतिक मुद्दा नहीं होना चाहिए”

​भाषण के अंत में ट्रंप ने देश की चुनावी प्रणाली में सुधार की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि इस तरह के गंभीर सुरक्षा खतरों के बीच अमेरिकी नागरिकों का अपनी लोकतांत्रिक प्रणाली पर से भरोसा उठ रहा है।

​ट्रंप ने जोर देकर कहा:

​”हम दुनिया की सबसे सुरक्षित, ईमानदार और पारदर्शी चुनाव प्रणाली के हकदार हैं। चुनावों की सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करना कोई पार्टी या राजनीति का मुद्दा नहीं होना चाहिए, बल्कि यह राष्ट्र की संप्रभुता का सवाल है।”

​वर्तमान में इस बड़े खुलासे के बाद अमेरिका के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह होगा कि खुफिया एजेंसियां और वर्तमान प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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