मूसलाधार बारिश के बाद उफान पर आया तमक नाला, ग्रामीणों के घर और खेत जलमग्न; SDRF और राहत दल मौके के लिए रवाना
चमोली / जोशीमठ:
देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर कुदरत का खौफनाक रूप देखने को मिला है। सोमवार को चमोली जिले की नीती घाटी में अचानक बादल फटने से तबाही मच गई। उफान पर आए तमक नाले के तेज बहाव में सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण तमक पुल बह गया, जिससे भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।
बीआरओ (BRO) का एक कर्मचारी लापता
इस प्राकृतिक आपदा में सीमा सड़क संगठन (BRO) का एक कर्मचारी भी नाले के तेज बहाव में बह गया है, जिसका फिलहाल कोई सुराग नहीं लग सका है। राहत और बचाव दल लापता कर्मी की तलाश में जुटे हुए हैं। पुल बह जाने के कारण नीती घाटी के दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय और शेष दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट गया है।
रिहायशी इलाकों और खेतों में घुसा मलबा
सोमवार दिन में हुई इस भीषण अतिवृष्टि के कारण तमक नाले के आसपास स्थित कई मकानों और खेतों को भारी नुकसान पहुंचा है। नाले से आए भारी मलबे और पानी ने ग्रामीणों की फसलें तबाह कर दी हैं। चारों तरफ मलबे का साम्राज्य देखने को मिल रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।
प्रशासन अलर्ट मोड़ पर, सुरक्षित स्थानों पर भेजे जा रहे लोग
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत हरकत में आ गईं। आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही राहत एवं बचाव दलों (SDRF और NDRF) को तत्काल प्रभाव से मौके के लिए रवाना कर दिया गया है।
प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर तमक नाले के तटीय और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले सभी परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित होने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
सामरिक और स्थानीय स्तर पर बड़ा असर
तमक पुल का बह जाना भारतीय सेना और स्थानीय निवासियों दोनों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि यह मार्ग सीमावर्ती क्षेत्रों तक रसद और सुरक्षा बलों की आवाजाही का मुख्य जरिया था। फिलहाल प्राथमिकता लापता कर्मी की खोजबीन और प्रभावित ग्रामीणों तक त्वरित राहत सामग्री पहुँचाने की है।










