मुख्य बिंदु:
- मंगलवार देर रात भारी पुलिस बल ने भवाली स्थित आवास पर दी दबिश; हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद आरोपी हिरासत में।
- पीड़िता की शिकायत पर मल्लीताल कोतवाली में दर्ज है मुकदमा; निचली अदालत से लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट तक से खारिज हो चुकी है अग्रिम जमानत।
- पुलिस कार्रवाई के दौरान फेसबुक लाइव आकर आरोपी ने दी आत्मदाह और जहर पीने की धमकी; पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप।
- एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी का बयान: “वांछित आरोपी बना रहा भ्रामक माहौल, जांच में मिले हैं पुख्ता सबूत।”
नैनीताल/भवाली।
उत्तराखंड के नैनीताल जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। भवाली व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेश पांडे को मंगलवार देर रात पुलिस ने उनके आवास से हिरासत में ले लिया है। नरेश पांडे पर एक नाबालिग छात्रा के शारीरिक शोषण, पॉक्सो एक्ट (POCSO Act), जबरन गर्भपात कराने, ब्लैकमेलिंग और रंगदारी जैसे कई संगीन मामलों में मुकदमा दर्ज है।
पिछले काफी समय से फरार चल रहे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही थी, जिसे आखिरकार मंगलवार रात एक बेहद हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच पुलिस टीम ने दबोच लिया।
हाईकोर्ट से झटका लगते ही बढ़ गई थीं मुश्किलें
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब नैनीताल के एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में पढ़ने वाली छात्रा ने नरेश पांडे पर डरा-धमकाकर शारीरिक शोषण करने और बाद में दबाव बनाकर गर्भपात कराने के बेहद गंभीर आरोप लगाए। पीड़िता की तहरीर पर नैनीताल की मल्लीताल कोतवाली में पोक्सो और दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।
मामला दर्ज होने के बाद आरोपी नरेश पांडे ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी दांवपेच आजमाए। उसने पहले निचली अदालत और उसके बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। हालांकि, अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत और उच्च न्यायालय दोनों ने ही उसकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत से राहत न मिलने के बाद से ही आरोपी पुलिस की रडार पर था।
रात के अंधेरे में पुलिस की छापेमारी और फेसबुक लाइव का ड्रामा
अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद से फरार चल रहे नरेश पांडे की सोशल मीडिया पर सक्रियता अचानक बढ़ गई थी। मंगलवार रात पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि आरोपी भवाली स्थित अपने घर पर मौजूद है। सूचना मिलते ही नैनीताल पुलिस की एक विशेष टीम तीन से चार वाहनों में भारी बल के साथ रात करीब 9:30 बजे उसके आवास पर पहुँच गई।
पुलिस के आने की भनक लगते ही आरोपी नरेश पांडे ने आत्मसमर्पण करने के बजाय एक नया पैंतरा आजमाया। वह तुरंत अपने सोशल मीडिया अकाउंट (फेसबुक) पर लाइव आ गया और पुलिस कार्रवाई का लाइव प्रसारण करने लगा। लगभग एक घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान आरोपी ने पुलिस पर बिना वारंट के प्रताड़ित करने और घर में घुसकर परिजनों के साथ मारपीट करने के आरोप लगाए।
आत्मदाह और जहर पीने का दावा, परिजनों से अभद्रता का आरोप
फेसबुक लाइव के दौरान आरोपी नरेश पांडे ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। उसने कैमरे के सामने एक बोतल दिखाते हुए दावा किया कि वह जहर पी रहा है और उसने पुलिस को आत्मदाह करने की धमकी भी दी।
पांडे ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उसकी नाबालिग बेटी के साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता की है, साथ ही साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल फोन भी जबरन छीन लिए हैं। हालांकि, आरोपी द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र रूप से कोई पुष्टि नहीं हो सकी है।
लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत और हंगामे के बाद पुलिस टीम ने उसे सुरक्षित रूप से हिरासत में ले लिया और अपने साथ ले गई।
बॉडीगार्ड्स और हथियारों के लाइसेंस को लेकर भी विवाद
नरेश पांडे का विवादों से पुराना नाता रहा है। व्यापार मंडल अध्यक्ष होने के नाते उसने अपनी सुरक्षा के लिए चार से पांच निजी बॉडीगार्ड्स तैनात कर रखे थे, जो हमेशा हथियारों के साथ उसके साथ चलते थे। जब युवती ने पांडे पर दुष्कर्म और शोषण के आरोप लगाए, तब पुलिस ने इस बिंदु पर भी जांच तेज कर दी थी।
पुलिस की ओर से पांडे के निजी अंगरक्षकों से भी लंबी पूछताछ की जा चुकी है, और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर उनके शस्त्र लाइसेंसों को निलंबित करने की संस्तुति भी जिला प्रशासन से की गई थी।
एसएसपी का सख्त बयान: ‘कानून के शिकंजे से नहीं बचेगा आरोपी’
इस पूरे घटनाक्रम और फेसबुक लाइव के ड्रामे पर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. मंजूनाथ टीसी ने पुलिस का रुख पूरी तरह साफ किया है। उन्होंने आरोपी के सभी दावों को खारिज करते हुए इसे सहानुभूति बटोरने का हथकंडा करार दिया।
”नरेश पांडे के खिलाफ दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग, रंगदारी, पोक्सो और जबरन गर्भपात कराने जैसे बेहद संगीन और गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज है। वह कानून की नजर में एक नामजद और वांछित अपराधी है। हमारी विवेचना के दौरान आरोपी के खिलाफ कई महत्वपूर्ण और अकाट्य साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर ही यह कार्रवाई की गई है।
आरोपी अपनी गिरफ्तारी से बचने, तथ्यों को प्रभावित करने और जनता के बीच भ्रामक माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहा है। कानून अपना काम कर रहा है और आगे की वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।”
— डॉ. मंजूनाथ टीसी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नैनीताल
अन्य महिलाओं ने भी सौंपे सबूत, बढ़ सकती हैं धाराएं
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नरेश पांडे की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होने वाली हैं। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद कुछ अन्य महिलाओं ने भी पुलिस से संपर्क साधा है और पांडे के खिलाफ शारीरिक व मानसिक शोषण के डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं।
पुलिस इन नए साक्ष्यों की भी गहनता से जांच कर रही है। यदि ये आरोप भी सही पाए जाते हैं, तो मुकदमे में कई अन्य गंभीर धाराएं जोड़ी जा सकती हैं, जिससे आरोपी का लंबे समय के लिए जेल जाना तय माना जा रहा है।
निष्कर्ष
भवाली के एक रसूखदार व्यापारी नेता की इस तरह संगीन अपराधों में संलिप्तता और फिर गिरफ्तारी ने पूरे उत्तराखंड के व्यापारिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। पुलिस द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई की जहाँ कानूनविद् सराहना कर रहे हैं, वहीं इस घटना ने देवभूमि में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।









