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​₹743 करोड़ से चमकेगा भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे: बनेगा फोर-सिक्सलेन, हाथियों के सुरक्षित सफर के लिए बनेंगे 5 अंडरपास

On: July 8, 2026 7:16 AM
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​मुख्य बिंदु:

  • ​देहरादून, जॉलीग्रांट और ऋषिकेश के बीच 20 किमी लंबा एनएच-07 हाईवे होगा अपग्रेड।
  • ​हाइब्रिड एन्युटी मोड पर बनने वाली इस परियोजना पर खर्च होंगे ₹743 करोड़।
  • ​पर्यावरण संरक्षण की मिसाल: वन क्षेत्र में राइट ऑफ वे (ROW) को 60 मीटर से घटाकर किया गया सिर्फ 23 मीटर।
  • ​वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना और एंटी-ग्लेयर स्क्रीन जैसी तकनीक का होगा इस्तेमाल।

​देहरादून।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय योग नगरी ऋषिकेश के बीच का सफर जल्द ही बेहद सुगम, सुरक्षित और हाईटेक होने जा रहा है। भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-07) को फोर से सिक्स लेन में तब्दील करने की महापरियोजना को हरी झंडी मिल चुकी है।

लगभग 20 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर ₹743 करोड़ की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे आधुनिक विकास और संवेदनशील पर्यावरणीय संतुलन को एक साथ साधते हुए तैयार किया गया है।

​चारधाम यात्रियों और पर्यटकों को मिलेगी जाम से मुक्ति

​भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में इस दो लेन के मार्ग पर रोजाना करीब 18,456 वाहनों का भारी दबाव रहता है। वीकेंड, पर्यटन सीजन और चारधाम यात्रा के दौरान यह दबाव कई गुना बढ़ जाता है, जिससे यात्रियों को घंटों लंबे जाम और सड़क दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है।

आने वाले समय में जॉलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तार और बढ़ते पर्यटन को देखते हुए इस हाईवे का चौड़ीकरण बेहद जरूरी हो गया था। फोर-सिक्स लेन बनने से सड़क की ज्यामिति (Geometry) में सुधार होगा, जिससे तीखे मोड़ खत्म होंगे और यात्रा का समय आधा रह जाएगा।

​पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल: बदला गया हाईवे का मूल डिजाइन

​आमतौर पर हाईवे चौड़ीकरण के दौरान बड़े पैमाने पर जंगलों को काट दिया जाता है, लेकिन एनएचएआई ने इस परियोजना में पर्यावरण के प्रति बड़ी संवेदनशीलता दिखाई है। वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए इसके मूल डिजाइन में बड़ा बदलाव किया गया है।


​सामान्यतः ऐसे हाईवे के लिए 60 मीटर का राइट ऑफ वे (ROW – सड़क की कुल चौड़ाई के लिए अधिग्रहित भूमि) तय किया जाता है, जिसे इस परियोजना के वन क्षेत्र वाले हिस्से में घटाकर मात्र 23 मीटर कर दिया गया है।

इसके अलावा, फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) के वैज्ञानिकों की देखरेख में वैज्ञानिक आकलन किया गया है, जिसके तहत 754 बड़े और महत्वपूर्ण पेड़ों को काटने के बजाय ‘प्रतिरोपण’ (Transplantation) के लिए चिह्नित किया गया है।

इन पेड़ों को आगामी मानसून सत्र में सुरक्षित रूप से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा।

​हाथियों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ‘विशेष गलियारा’

​यह हाईवे बड़कोट, ऋषिकेश और थानो वन रेंज जैसे देश के सबसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जो मुख्य रूप से एशियाई हाथियों का प्राकृतिक रहवास और कॉरिडोर है। वन विभाग के डराने वाले आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5 वर्षों में इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से 29 वन्यजीवों की दर्दनाक मौत हुई है।


​इस गंभीर समस्या के स्थाई समाधान के लिए परियोजना में करीब 3.5 किलोमीटर लंबी एक एलिवेटेड संरचना (Elevated Structure) का निर्माण किया जा रहा है। इसके तहत वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए निम्नलिखित विशेष इंतजाम किए जाएंगे:

  • ​5 विशेष अंडरपास: हाथियों के पारंपरिक रास्तों को सुरक्षित रखने के लिए एक ‘ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास’ और चार समर्पित ‘एलीफेंट अंडरपास’ बनाए जाएंगे।
  • ​साउंड बैरियर और नो हॉर्न ज़ोन: जंगल वाले हिस्से में वाहनों के शोर से जानवरों को पैनिक होने से बचाने के लिए ‘साउंड बैरियर’ लगाए जाएंगे और इस पूरे स्ट्रेच को ‘नो हॉर्न ज़ोन’ घोषित किया जाएगा।
  • ​एंटी-ग्लेयर स्क्रीन: रात के समय वाहनों की तेज हेडलाइट सीधे जानवरों की आँखों पर न पड़े, इसके लिए सड़क के किनारों पर विशेष स्क्रीन लगाई जाएगी।
  • ​ग्रीन गाइड हेज: जानवरों को सीधे हाईवे पर आने से रोकने के लिए प्राकृतिक हरी झाड़ियों की बाड़ (Green Guide Hedge) तैयार की जाएगी, साथ ही जगह-जगह वन्यजीव चेतावनी संकेतक और स्पीड ब्रेकर (Speed Calming Measures) लगाए जाएंगे।

​हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) पर होगा निर्माण

​NHAI के अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत किया जा रहा है, जिससे काम की गुणवत्ता और समयसीमा दोनों सुनिश्चित हो सकेगी। यह मोड निर्माण एजेंसी और सरकार के बीच वित्तीय जोखिम को कम करता है, जिससे काम बिना किसी बजटीय रुकावट के तेजी से पूरा होता है।

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​निष्कर्ष

​भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे परियोजना इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे बुनियादी ढांचे का विकास पर्यावरण और वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाए बिना भी किया जा सकता है।

यह हाईवे न केवल उत्तराखंड की आर्थिकी और पर्यटन को नई गति देगा, बल्कि ‘इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर’ के मामले में पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल साबित होगा।

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