अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

बिहार राजनीति: प्रशांत किशोर ने ढहाया BJP का किला, बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज की ऐतिहासिक जीत

On: August 3, 2026 2:54 PM
Follow Us:

तीन दशक पुराने भाजपा के गढ़ में प्रशांत किशोर की बड़ी सेंध, 19,324 वोटों के अंतर से दर्ज की पहली चुनावी जीत।
पटना/बांकीपुर: बिहार की राजनीति में एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में एक ऐतिहासिक जीत हासिल कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 31 साल पुराने अभेद्य किले को ध्वस्त कर दिया है। 19,324 वोटों के भारी अंतर से मिली इस जीत के साथ ही प्रशांत किशोर ने राज्य की राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी है।

​भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रशांत किशोर को कुल 64,151 वोट मिले। दूसरे स्थान पर रहे भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा (नीरज कुमार) को 44,827 वोट प्राप्त हुए, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता (रेखा कुमारी) 14,273 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर पिछड़ गईं।

​31 साल पुराना राजनीतिक गढ़ ध्वस्त

​बांकीपुर सीट पिछले तीन दशकों से भाजपा का पारंपरिक और सुरक्षित गढ़ मानी जाती रही है। प्रशांत किशोर की इस शानदार जीत ने न केवल इस पुराने वोट बैंक समीकरण को तोड़ा है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि मतदाता पारंपरिक गठबंधनों से हटकर नए राजनीतिक विकल्प की ओर रुख कर रहे हैं।

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज का जमीनी अभियान, शिक्षा, रोजगार और सुशासन पर केंद्रित मुद्दे शहरी मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रहे हैं।

ये भी पढ़े➜देहरादून में कलयुगी मां का खौफनाक चेहरा: डेढ़ लाख में बेचा अपनी ही 15 साल की बेटी का सौदा, पुलिस ने मुजफ्फरनगर से बच्ची को छुड़ाकर 4 आरोपियों को भेजा जेल

​बिहार के सियासी समीकरणों पर प्रभाव

​इस चुनावी परिणाम ने एनडीए (NDA) और महागठबंधन (Mahagathbandhan) के बीच चलने वाली द्विपक्षीय लड़ाई के आख्यान को पूरी तरह बदल दिया है:

• ​भाजपा के लिए बड़ा झटका: शहरी क्षेत्र की अपनी सबसे सुरक्षित सीटों में से एक खोने के बाद भाजपा को अपनी स्थानीय रणनीति और जनसंपर्क अभियान की समीक्षा करने पर मजबूर होना पड़ेगा।

• ​राजद की शहरी पकड़ कमजोर: एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में तीसरे नंबर पर खिसकना यह दर्शाता है कि राजद के लिए शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाना अभी भी बड़ी चुनौती है।

• ​तीसरे विकल्प का उदय: जन सुराज की यह पहली संसदीय/विधानसभा जीत आगामी चुनावों से पहले प्रशांत किशोर को राज्य की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा करती है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment