वर्तमान में बढ़ते उत्तराखंड महंगाई दर ने देहरादून समेत पूरे प्रदेश के आम नागरिकों और मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई का पूरा बजट बिगाड़ दिया है। पिछले दो हफ्तों के भीतर चीनी, आटा, सरसों का तेल, रिफाइंड और दालों जैसी जरूरी खाद्य सामग्रियों की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल देखा गया है। बाजार में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के लगातार महंगे होने से उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा और गहरा असर पड़ रहा है।
देहरादून के थोक और खुदरा बाजारों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में आई यह तेजी आम जनता के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है। रसोई की बुनियादी जरूरतों का सामान महंगा होने के कारण हर घर का मासिक राशन खर्च काफी बढ़ चुका है।
चीनी और मीठे उत्पादों पर उत्तराखंड महंगाई दर का असर
रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों में सबसे बड़ा झटका चीनी की कीमतों में लगा है। लगभग 12 दिन पहले तक देहरादून के खुदरा बाजार में चीनी 48 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर आसानी से उपलब्ध थी। इसके बाद भाव धीरे-धीरे बढ़कर 55 रुपये और अब सीधे 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं।
मात्र आधे महीने के अंतराल में चीनी पर 22 रुपये प्रति किलो की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। चीनी के साथ-साथ अन्य मीठे उत्पादों के दाम भी तेजी से बढ़े हैं:
- गुड़ की कीमतें: 12 दिन पहले 50 रुपये प्रति किलो बिकने वाला गुड़ अब खुदरा दुकानों पर 70 रुपये प्रति किलो मिल रहा है।
- मिश्री के भाव: मिश्री का भाव 55 रुपये से बढ़कर 65 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया है।
मीठे उत्पादों की कीमतों में इस तीव्र वृद्धि ने आम परिवारों के साथ-साथ हलवाइयों और छोटे चाय-नाश्ते के दुकानदारों की लागत भी बढ़ा दी है।
आटा और चक्की उत्पादों में उत्तराखंड महंगाई दर की मार
चीनी और तेल के अलावा बुनियादी भोजन का मुख्य हिस्सा माने जाने वाले आटे के दामों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आढ़त बाजार के थोक कारोबारियों के अनुसार, चक्की आटे से लेकर तमाम ब्रांडेड कंपनियों के पैकेटबंद आटे की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है।
थोक बाजार में 15 दिन पहले चक्की आटे का 10 किलोग्राम का बैग 285 रुपये में मिल रहा था, जिसका दाम अब बढ़कर 315 रुपये हो गया है। मौजूदा समय में थोक स्तर पर यह आटा 335 रुपये प्रति बैग तक के भाव पर बिक रहा है। वहीं खुदरा दुकानों पर उपभोक्ताओं को चक्की आटा 42 से 44 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से खरीदना पड़ रहा है।
खाद्य तेलों के थोक और खुदरा दामों में बड़ा इजाफा
खाद्य तेलों की कीमतों में आया उछाल रसोई के बजट को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा रहा है। सरसों तेल के 15 लीटर वाले कोल्हू टीन के थोक भाव में 300 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की तेजी आई है। पहले 2200 रुपये में मिलने वाला सरसों तेल का टीन अब थोक में 2500 से 2700 रुपये तक बिक रहा है। इसका सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ा है, जहां सरसों का तेल 190 से 200 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
रिफाइंड तेल के दामों में भी भारी वृद्धि देखी गई है। रिफाइंड का 15 लीटर का टीन थोक में पहले 1930 रुपये में मिलता था, जो अब बढ़कर 2200 रुपये प्रति टीन हो चुका है। इस तरह एक टीन पर सीधे 270 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है, जिससे खुदरा में रिफाइंड तेल की कीमतें 150 से 160 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं।
बाजार विशेषज्ञों की राय: उत्तराखंड महंगाई दर बढ़ने के मुख्य कारण
व्यापारियों और आढ़त बाजार के जानकारों का कहना है कि बाहरी मंडियों से आपूर्ति में कमी, ढुलाई लागत में वृद्धि और उत्पादन से जुड़ी लागत बढ़ने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है। इसके साथ ही विभिन्न दालों के खुदरा भावों में भी 10 से 15 रुपये प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई है।
दाल, रोटी, तेल और चीनी जैसी रोजमर्रा की मूलभूत चीजों के एक साथ महंगे होने से आम परिवारों का मासिक खर्च 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। उपभोक्ताओं ने स्थानीय प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग से बाजार में जमाखोरी रोकने और मूल्य नियंत्रण के लिए नियमित निगरानी की मांग की है।
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