imran khan health update को लेकर पाकिस्तान की सियासत में हलचल तेज है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा मेडिकल जांच पूरी करने के तुरंत बाद उन्हें वापस रावलपिंडी की अदियाला जेल में शिफ्ट कर दिया गया। इस घटनाक्रम की पुष्टि पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सूत्रों ने की है। सरकारी पक्ष का कहना है कि मेडिकल बोर्ड ने पूर्व प्रधानमंत्री को जेल में रहने के लिए पूरी तरह चिकित्सकीय रूप से फिट पाया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और imran khan health update
पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उन्हें निजी अस्पताल में चिकित्सीय जांच कराने की अनुमति दी थी। अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि इमरान खान को इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजा जाए, ताकि विशेषज्ञ चिकित्सकों का बोर्ड उनके स्वास्थ्य और आंखों की समस्या की गहन जांच कर सके।
इस आदेश के तहत इमरान खान के निजी चिकित्सक डॉ. फैसल सुल्तान और उनकी बहन डॉ. उजमा खान को भी मेडिकल प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहने की अनुमति मिली थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि कैदी के स्वास्थ्य और सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जा सकती, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
शिफा अस्पताल में 6 विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड
अस्पताल लाए जाने के बाद विभिन्न विभागों के छह विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक पैनल ने इमरान खान का विस्तृत चेकअप किया। इस टीम में नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist), हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) और फिजिशियन शामिल थे।
बोर्ड ने पूर्व प्रधानमंत्री के विटल्स, रक्तचाप, ईसीजी और दृष्टि की स्थिति की गहन समीक्षा की। घंटों चली जांच प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि उनकी स्थिति स्थिर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती रखने की तात्कालिक आवश्यकता नहीं है। इसके बाद देर रात कड़ी सुरक्षा घेरे के बीच उन्हें वापस अदियाला जेल की सेल में पहुंचा दिया गया।
इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर क्या था विवाद?
इमरान खान की सेहत को लेकर विवाद उस समय गहराया जब उनके परिवार और वकीलों ने दावा किया कि जेल में रहते हुए उनकी दाईं आंख की रोशनी लगभग 85% तक घट गई है। डॉक्टरों ने उन्हें ‘सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन’ (CRVO) की समस्या से ग्रस्त पाया था। पीटीआई का आरोप था कि सरकारी तंत्र उन्हें बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रख रहा है।
दूसरी तरफ, जेल प्रशासन और सरकारी वकीलों ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर इस दावे का खंडन किया था। जेल अधिकारियों के मुताबिक, इलाज के बाद इमरान खान की आंख की रोशनी में 70% तक सुधार हुआ है और उनकी हालत सामान्य के करीब पहुंच चुकी है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भारी पुलिस बल की तैनाती
पूर्व प्रधानमंत्री के अस्पताल स्थानांतरण को देखते हुए रावलपिंडी और इस्लामाबाद पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए थे। इस्लामाबाद के आईजीपी सैयद अली नासिर रिजवी ने खुद मौके पर जाकर अस्पताल परिसर और रूट की सुरक्षा का जायजा लिया।
अदियाला जेल के गेट नंबर 1 से लेकर अस्पताल के प्रवेश द्वार तक रास्ते को सील कर दिया गया था और भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे। इस दौरान बड़ी संख्या में पीटीआई समर्थक भी अस्पताल के आसपास जमा हो गए थे, जिन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दूर रखा गया।
जरूरत पड़ने पर विदेश भेजने पर विचार: मंत्री तारिक फजल
संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार शीर्ष अदालत के हर आदेश का अक्षरशः पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि डॉक्टरों के अनुसार देश के भीतर समुचित इलाज संभव नहीं हुआ, तो सरकार उन्हें बेहतर उपचार के लिए विदेश भेजने के विकल्प पर भी विचार कर सकती है।
फिलहाल, 73 वर्षीय इमरान खान, जो अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव से सत्ता से हटने के बाद से दर्जनों कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं और 2023 से जेल में बंद हैं, अदियाला जेल में ही रहेंगे। अदालत इस पूरे मामले और मेडिकल रिकॉर्ड्स की अगली समीक्षा सितंबर में करेगी।
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