ऋषिकेश / देहरादून
उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। धर्मनगरी ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के समीप पहुँचते हुए चेतावनी के निशान को पार कर गया है। गंगा में आई इस भीषण जल-वृद्धि के कारण तटीय इलाकों और प्रसिद्ध घाटों पर पानी भर गया है, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गए हैं तथा मुख्य सचिव ने अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश जारी किए हैं।
गंगा में उफान: चेतावनी के स्तर से ऊपर बह रहा जल
पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के कारण गंगा की सहायक नदियां—अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी—उफान पर हैं। इन सहायक नदियों का अतिरिक्त पानी निचले इलाकों में पहुँचने से ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ गया।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर 339.70 मीटर तक पहुँच गया है, जबकि यहाँ 339.50 मीटर को चेतावनी का स्तर (Warning Level) माना जाता है। चेतावनी निशान से 0.20 मीटर ऊपर पानी पहुँचने के कारण नदी का प्रवाह अत्यंत तेज और खतरनाक हो गया है।
प्रसिद्ध घाट और तटीय क्षेत्र जलमग्न
जलस्तर बढ़ने से ऋषिकेश के कई प्रमुख और ऐतिहासिक घाट पूरी तरह से पानी में डूब चुके हैं:
• त्रिवेणी घाट: जहाँ प्रतिदिन शाम को भव्य गंगा आरती होती है, वहाँ के निचले मंच और आरती स्थल पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं।
• स्वर्गाश्रम व रामझूला क्षेत्र: तटीय इलाकों में पानी भरने से पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को दूर रहने की सलाह दी गई है।
• मुनिकीरेती व ढालवाला: इन क्षेत्रों के तटीय हिस्से भी गंगा के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित हुए हैं।
प्रशासन और जल पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से तटीय इलाकों में मुनादी शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को गंगा के निकट न जाने की सख्त हिदायत दी जा रही है।
आपदा प्रबंधन और समीक्षा: मुख्य सचिव ने संभाला मोर्चा
उत्तराखंड में भारी वर्षा और नदियों के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न हुई परिस्थितियों को देखते हुए शासन स्तर पर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। प्रदेश के मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने स्वयं देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (State Emergency Operations Center) पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया।
“जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी विभाग आपसी समन्वय बनाकर 24×7 अलर्ट मोड पर काम करें ताकि किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।”
— आनंद बर्द्धन, मुख्य सचिव (उत्तराखंड)
मुख्य सचिव ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन से प्रदेशभर में बारिश की स्थिति, बंद मार्ग, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों और राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न जनपदों के जिलाधिकारियों (DMs) से फोन पर सीधे वार्ता कर धरातलीय स्थिति की समीक्षा की।
शासन द्वारा दिए गए प्रमुख दिशा-निर्देश
मुख्य सचिव ने आपदा प्रबंधन तंत्र और जिला प्रशासन को निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं:
1. अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचे मौसम अलर्ट: मौसम विभाग द्वारा जारी की जाने वाली चेतावनियाँ केवल कागज़ों या सरकारी दफ्तरों तक सीमित न रहें। सूचना प्रसारण तंत्र को इतना मजबूत किया जाए कि चेतावनी राज्य से लेकर जनपद, ब्लॉक, तहसील और सुदूर ग्राम स्तर तक हर नागरिक तक समय पर पहुँचे।
2. सड़कों को खोलने को प्राथमिकता: पहाड़ों में लगातार भूस्खलन के कारण बंद हो रहे राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण संपर्क मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोला जाए। संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी और आवश्यक भारी मशीनरी पहले से तैनात रखने के आदेश दिए गए हैं।
3. जलभराव और आवश्यक सेवाएं: शहरी और निचले इलाकों में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पम्पिंग सेटों की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाए। इसके अलावा, बिजली, पेयजल और दूरसंचार जैसी आवश्यक सेवाओं को बिना किसी बाधा के बहाल रखने के निर्देश दिए गए हैं।
4. 24×7 निरंतर निगरानी: राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी जनपदों के नियंत्रण कक्षों के साथ 24 घंटे लगातार संपर्क बनाए रखे और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत दल (SDRF/NDRF) को रवाना करे।
निष्कर्ष एवं अपील
ऋषिकेश और उसके आसपास के क्षेत्रों में गंगा का विकराल रूप देखकर स्थानीय प्रशासन मुस्तैद है। पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें घाटों पर गश्त कर रही हैं। शासन-प्रशासन की पहली प्राथमिकता किसी भी प्रकार की जनहानि को रोकना है।
प्रशासन ने आम जनता, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें, नदी-नालों के पास जाने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर बने रहें।








