नई दिल्ली:
भारत के ऑटोमोबाइल बाजार और सोशल मीडिया जगत में इस समय इथेनॉल-ब्लेंडेड (E20) पेट्रोल को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। इस विवाद की शुरुआत देश के सबसे लोकप्रिय डेली व्लॉगर सौरव जोशी (Sourav Joshi) के एक वीडियो से हुई, जिसमें उन्होंने अपनी करोड़ों रुपये की मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz) लग्जरी एसयूवी के माइलेज में आई अचानक और भारी गिरावट के लिए सीधे तौर पर E20 पेट्रोल को जिम्मेदार ठहराया।
वीडियो के वायरल होते ही जर्मन कार निर्माता कंपनी मर्सिडीज-बेंज इंडिया तुरंत एक्शन में आई और कंपनी ने इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति साफ करते हुए एक आधिकारिक कस्टमर एडवाइजरी जारी की है।
सौरव जोशी का सनसनीखेज दावा: 48 घंटे में 17 से 5 पर आया माइलेज
लोकप्रिय यूट्यूबर सौरव जोशी ने अपने हालिया व्लॉग में अपनी मर्सिडीज कार के डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर (स्क्रीन) के लाइव आंकड़े दिखाते हुए गहरी चिंता व्यक्त की थी। उनके द्वारा किए गए मुख्य दावे निम्नलिखित हैं:
- माइलेज में अभूतपूर्व गिरावट: सौरव ने लाइव आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि महज 48 घंटों के भीतर उनकी गाड़ी की ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) पूरी तरह से ध्वस्त हो गई। उन्होंने दर्शकों से कहा, “कल मैंने आपको दिखाया था कि कार का माइलेज 17 से सीधे 9 पर आ गया था। और आज यह सिर्फ 5 रह गया है… देखिए, यह स्क्रीन पर सिर्फ 5 का माइलेज दिखा रहा है।”
- ड्राइविंग रेंज हुई आधी: व्लॉगर के मुताबिक, पहले जब वह अपनी एसयूवी का पेट्रोल टैंक फुल करवाते थे, तो गाड़ी लगभग 800 किलोमीटर की ड्राइविंग रेंज दिखाती थी। लेकिन अब, रिफ्यूलिंग के बाद स्क्रीन पर अनुमानित रेंज घटकर सिर्फ 480 किलोमीटर रह गई है।
- इथेनॉल को ठहराया जिम्मेदार: सौरव ने इस खराबी का सीधा दोष पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले इथेनॉल-मिश्रित ईंधन को दिया। उन्होंने बिना झिझक दावा किया कि यह सब ‘E20 पेट्रोल’ की वजह से हो रहा है।
- इंजन डैमेज होने का डर: इस अप्रत्याशित गिरावट ने सौरव को इस कदर डरा दिया है कि उन्हें अब अपनी महंगी जर्मन एसयूवी का इंजन अंदर से पूरी तरह खराब होने का डर सता रहा है। उन्होंने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा, “पता नहीं यह कार कब बीच सड़क पर बंद हो जाएगी… आजकल मुझे पेट्रोल पंप पर जाकर तेल भरवाने में भी डर लगने लगा है।”
हालांकि, सौरव ने यह भी राहत जताई कि उनके पास मर्सिडीज की ही एक अन्य लग्जरी एसयूवी, G-Wagon का इलेक्ट्रिक वेरिएंट (EV) भी है, जिसके चलते कम से कम उस गाड़ी में उन्हें इथेनॉल से जुड़ी इस टेंशन का सामना नहीं करना पड़ता।
मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने जारी की एडवाइजरी: दावों को किया खारिज
जैसे ही सौरव जोशी का यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ और कार प्रेमियों के बीच ई20 पेट्रोल को लेकर डर का माहौल बनने लगा, मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने स्थिति को संभालने के लिए बिना देर किए कदम उठाया। कंपनी ने सीधे तौर पर सौरव का नाम तो नहीं लिया, लेकिन एक आधिकारिक कस्टमर एडवाइजरी जारी कर अपने वाहनों की विश्वसनीयता पर मुहर लगा दी।
1. सभी BS-VI गाड़ियां हैं पूरी तरह अनुकूल
लग्जरी कार निर्माता ने स्पष्ट किया कि मर्सिडीज-बेंज की भारत में बिकने वाली सभी पेट्रोल BS-VI (बीएस 6) गाड़ियां E20 ईंधन के साथ चलने के लिए पूरी तरह से अनुकूल (Compatible) हैं। ग्राहकों को इसके इस्तेमाल से घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
2. सरकारी अथॉरिटीज से मिला है प्रमाण पत्र
कंपनी ने कहा कि उनके वाहनों को भारतीय बाजार में उतारने से पहले संबंधित सरकारी और प्रासंगिक अधिकारियों द्वारा E20 ईंधन पर सुचारू रूप से चलने के लिए बकायदा प्रमाणित (Certified) किया जा चुका है।
3. ग्राहकों की सुरक्षा और परफॉर्मेंस सर्वोपरि
मर्सिडीज-बेंज ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “हमारे लिए ग्राहकों की सुरक्षा, वाहनों की विश्वसनीयता और उनका परफॉर्मेंस सबसे ज्यादा मायने रखता है। हम तकनीकी तौर पर अपने ग्राहकों की हर समस्या का समाधान करने के लिए चौबीसों घंटे तैयार हैं। हम देश में सस्टेनेबल मोबिलिटी (टिकाऊ गतिशीलता) के लक्ष्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
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आखिर क्या है E20 ईंधन और इस पर क्यों हो रहा है विवाद?
भारत सरकार पर्यावरण प्रदूषण को कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए तेजी से इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को बढ़ावा दे रही है।
क्या है E20 पेट्रोल?
E20 एक ऐसा मोटर ईंधन है जिसमें 80 प्रतिशत पारंपरिक पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल (जो मुख्य रूप से गन्ने और अनाज से तैयार किया जाता है) का मिश्रण होता है।
विवाद और चिंताओं की वजह
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और कई वाहन मालिकों का मानना है कि इथेनॉल की प्रकृति थोड़ी संक्षारक (Corrosive) होती है। यदि वाहन का इंजन इसके अनुकूल नहीं बनाया गया है, तो यह पुरानी गाड़ियों के फ्यूल पाइप्स, रबर पार्ट्स और इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही, शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण माइलेज में भी थोड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। यही वजह है कि इसे लेकर देश भर के वाहन चालकों के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
सरकार का रुख: देश के लिए गेम-चेंजर है इथेनॉल प्रोग्राम
आम जनता और वाहन मालिकों के बीच माइलेज घटने और इंजन खराब होने की चिंताओं के बीच, भारत सरकार ने इस इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम का पुरजोर बचाव किया है। सरकार की ओर से जारी हालिया बयानों में इसके आर्थिक और सामाजिक फायदों को रेखांकित किया गया है:
- मजबूत हुई शुगर इकोनॉमी: सरकार का कहना है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण देश की चीनी अर्थव्यवस्था (Sugar Economy) को भारी मजबूती मिली है, जिससे मिलों की वित्तीय स्थिति सुधरी है।
- किसानों की आय में वृद्धि: गन्ने और अन्य खाद्यान्नों से इथेनॉल बनने के कारण सीधे तौर पर देश के अन्नदाताओं यानी किसानों की जेब में पैसा पहुंच रहा है और उनकी आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।
- विदेशी मुद्रा की बंपर बचत: सरकार के मुताबिक, साल 2014-15 से लेकर अब तक इस इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति की बदौलत भारत ने कच्चे तेल के आयात को कम करके अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की भारी बचत की है।
निष्कर्ष
मर्सिडीज-बेंज के इस आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि नई बीएस-6 तकनीक वाली गाड़ियों को ई20 पेट्रोल से कोई सीधा खतरा नहीं है। हालांकि, सौरव जोशी की कार में दिखे तकनीकी ग्लिच या अचानक माइलेज ड्रॉप के पीछे ईंधन की गुणवत्ता, ड्राइविंग स्टाइल या कोई अन्य सॉफ्टवेयर बग भी वजह हो सकता है, जिसकी जांच कंपनी के विशेषज्ञ कर रहे हैं। लेकिन इस घटना ने देश में ई20 ईंधन को लेकर एक व्यापक बहस को जरूर हवा दे दी है।










