अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

Badrinath Donation Controversy: बद्रीनाथ चढ़ावा चोरी मामले में पहली गिरफ्तारी, प्रमोद नौटियाल अरेस्ट, जांच हुई तेज

On: July 13, 2026 10:18 AM
Follow Us:
Badrinath Donation Controversy: First arrest made in the Badrinath offering theft case; Pramod Nautiyal arrested, investigation intensifies.

Badrinath Donation Controversy को लेकर उत्तराखंड में चल रहे चर्चित मामले में पहली बड़ी गिरफ्तारी हो गई है। बद्रीनाथ मंदिर में दान और चढ़ावे की गणना के दौरान कथित हेराफेरी के आरोपों के बीच बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक विभागीय जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी। फिलहाल आरोपी से बद्रीनाथ थाने में गहन पूछताछ की जा रही है, जबकि समानांतर रूप से शासन स्तर पर गठित जांच समिति भी पूरे मामले की जांच कर रही है।

Badrinath Donation Controversy में कैसे हुई पहली गिरफ्तारी?

चमोली पुलिस के अनुसार Badrinath Donation Controversy से जुड़े मामले में रविवार रात प्रमोद नौटियाल को उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। चमोली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें बद्रीनाथ लाया गया, जहां पुलिस टीम उनसे लगातार पूछताछ कर रही है।

मामले में दर्ज एफआईआर और विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित हेराफेरी कितनी बार हुई और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।

दान की गिनती के दौरान लगे थे चोरी के आरोप

Badrinath Donation Controversy की शुरुआत 2 जुलाई को तब हुई, जब भैरव सेना ने आरोप लगाया कि बद्रीनाथ मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती के दौरान पैसों की कथित हेराफेरी की गई है। संगठन का दावा था कि पूरी घटना मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है।

आरोप सामने आने के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति ने मामले को गंभीरता से लिया। समिति अध्यक्ष की संस्तुति पर चार सदस्यीय विभागीय जांच समिति गठित की गई, जिसने बद्रीनाथ पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच की।

18 पन्नों की जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया?

चार सदस्यीय समिति ने अपनी जांच पूरी कर 18 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में Badrinath Donation Controversy से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2 जुलाई को आरोपी प्रमोद नौटियाल को एक से अधिक बार पैसों में कथित हेराफेरी करते हुए देखा गया। इसके अलावा 29 जून की सीसीटीवी फुटेज में भी उन्हें पैसों जैसी वस्तु अपने साथ ले जाते हुए देखा गया है।

इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर समिति के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) ने 7 जुलाई को प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

निलंबन के बाद फोन बंद कर हो गए थे लापता

निलंबन के बाद Badrinath Donation Controversy ने नया मोड़ तब लिया, जब प्रमोद नौटियाल अचानक बद्रीनाथ से गायब हो गए। बताया गया कि 8 जुलाई से उनका मोबाइल फोन भी बंद था, जिससे पुलिस को उनकी तलाश में अतिरिक्त प्रयास करने पड़े।

इसी दौरान उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और संभावित गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट का भी रुख किया। हालांकि पुलिस ने जांच जारी रखी और आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

पीए होने के बावजूद मिली थी दान गणना की जिम्मेदारी

जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि प्रमोद नौटियाल मूल रूप से समिति अध्यक्ष के निजी सहायक (पीए) के रूप में कार्यरत थे। इसके बावजूद उन्हें Badrinath Donation Controversy से जुड़े सबसे संवेदनशील कार्यों में शामिल किया गया था।

मंदिर समिति ने उन्हें बद्रीनाथ मंदिर में प्रोटोकॉल व्यवस्था और दान-चढ़ावे की गणना की जिम्मेदारी भी सौंप रखी थी। यही जिम्मेदारी अब विवाद का प्रमुख कारण बनी हुई है।

2014 से 2018 तक पदोन्नति को लेकर भी उठे सवाल

Badrinath Donation Controversy के सामने आने के बाद प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में उन्हें इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के रूप में स्थायी नियुक्ति मिली थी। बाद में वर्ष 2018 में उन्हें पदोन्नत कर मंदिर समिति अध्यक्ष का निजी सहायक बना दिया गया। इसके साथ ही उन्हें मंदिर के महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों में भी जिम्मेदारी दी गई।

अब जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि उन्हें संवेदनशील जिम्मेदारियां किस प्रक्रिया के तहत सौंपी गई थीं।

सरकारी स्तर पर भी जारी है अलग जांच

पुलिस जांच के अलावा Badrinath Donation Controversy की जांच शासन स्तर पर गठित एक उच्चस्तरीय समिति भी कर रही है। गढ़वाल मंडल के कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित यह समिति पूरे मामले के सभी पहलुओं की समीक्षा कर रही है।

इस जांच में विभागीय रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, मंदिर समिति के रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों के बयान भी शामिल किए जा रहे हैं। यदि किसी अन्य स्तर पर भी अनियमितता सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

आरोपी ने खुद को बताया बेगुनाह

गिरफ्तारी के बाद जब प्रमोद नौटियाल को पुलिस लेकर जा रही थी, तब पत्रकारों ने उनसे आरोपों के बारे में सवाल किया। इस पर उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे निर्दोष हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं हैं।

हालांकि पुलिस का कहना है कि Badrinath Donation Controversy से जुड़े सभी आरोपों की जांच उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

जांच के नतीजों पर टिकी सभी की नजर

बद्रीनाथ मंदिर देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है और यहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में Badrinath Donation Controversy ने मंदिर प्रशासन और दान प्रबंधन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सभी की निगाहें पुलिस की विस्तृत जांच, सरकारी समिति की रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि दान प्रबंधन प्रणाली में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी बड़े प्रशासनिक फैसलों का आधार बन सकता है। वहीं यदि आरोपी के दावे सही साबित होते हैं तो जांच एजेंसियों को उसके पक्ष में मिले तथ्यों पर भी विचार करना होगा। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Leave a Comment