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कुदरत का कहर: जम्मू-कश्मीर के डोडा में 48 घंटे में तीसरी बार भारी तबाही, मलबे में तब्दील हुआ ठठरी कस्बा

On: July 7, 2026 7:54 AM
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​डोडा (जम्मू-कश्मीर): जम्मू-कश्मीर का पर्वतीय जिला डोडा इस समय प्रकृति के भयानक प्रकोप से जूझ रहा है। जिले के ठठरी कस्बे में सोमवार देर रात और मंगलवार तड़के हुई मूसलाधार बारिश के बाद आए भीषण सैलाब और भूस्खलन (landslide) ने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई है।

पिछले 48 घंटों के भीतर डोडा और पड़ोसी जिले किश्तवाड़ में फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) की यह तीसरी बड़ी घटना है। इस आपदा में ठठरी कस्बे का करीब 4 किलोमीटर का दायरा पूरी तरह मलबे और पत्थरों से पट गया है, जिससे कई मकान, दुकानें और गाड़ियां मलबे के नीचे दफन हो गई हैं। राहत की बात यह रही कि समय रहते लोग सुरक्षित स्थानों पर चले गए, जिससे किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

​आधी रात को गूंजी चीखें: प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी तबाही का मंजर

​स्थानीय निवासियों के अनुसार, आपदा की शुरुआत सोमवार रात करीब 12:00 बजे के बाद शुरू हुई अत्यधिक भारी बारिश से हुई। ठठरी के निवासी शमाउद्दीन ने बताया, “हम सब सो रहे थे कि अचानक रात करीब 12:30 बजे बादलों के तेज गर्जन और मूसलाधार बारिश की आवाज से हमारी नींद खुली। पानी का बहाव लगातार बढ़ रहा था। फिर तड़के करीब 3:00 बजे अचानक पहाड़ियों से गड़गड़ाहट की आवाज के साथ मलबे और पत्थरों का एक विशाल सैलाब नीचे बाजार की तरफ आया।

सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई लोग सिर्फ अपनी जान बचाकर सुरक्षित ऊंचाई वाले इलाकों की तरफ भागे।”


​सैलाब का वेग इतना तीव्र था कि सड़कों पर खड़ी गाड़ियां खिलौनों की तरह बह गईं। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि मलबे के साथ कुछ वाहन बहकर सीधे पास ही बहने वाली चिनाब नदी में समा गए हैं।

​10 घर और 25 दुकानें क्षतिग्रस्त, हाईवे पूरी तरह बंद

​सुबह की रोशनी होते ही ठठरी कस्बे में तबाही की जो तस्वीरें सामने आईं, वे बेहद डरावनी थीं। ठठरी के तहसीलदार सतीश राणा ने प्रारंभिक नुकसान का आकलन करते हुए मीडिया को बताया, “रात को शुरू हुई अत्यधिक बारिश के कारण ऊपरी इलाकों से भारी मात्रा में कीचड़, विशाल चट्टानें और मलबा रिहायशी इलाकों में घुस गया। हमारी शुरुआती जांच और गिनती के अनुसार, कम से कम 10 घरों और 25 व्यावसायिक दुकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। कई घरों के भीतर कई फीट तक कीचड़ भर गया है।”


​इस भूस्खलन और सैलाब के कारण डोडा-किश्तवाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-244) पूरी तरह बाधित हो गया है। सड़क पर कई फीट ऊंचे मलबे और बोल्डर जमा होने के कारण यातायात ठप है, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले सैकड़ों यात्री और मालवाहक वाहन रास्ते में ही फंस गए हैं।

​बादल फटना या ‘क्लाउडबर्स्ट’ की अफवाह? प्रशासन ने दी सफाई

​सोशल मीडिया पर इस घटना को ‘बादल फटना’ (Cloudburst) बताए जाने के बाद जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। डोडा के उपायुक्त (DC) कृष्ण लाल ने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए कहा, “इसे आधिकारिक तौर पर बादल फटना कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है।

यह असल में अत्यधिक तीव्र वर्षा (Heavy Rainfall) का मामला है। चूंकि यह एक अत्यधिक पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए भारी बारिश के कारण ढलानों से ढीली मिट्टी और पत्थर तेजी से नीचे आ जाते हैं। प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और सभी प्रभावित सड़कों को साफ करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।”


​उन्होंने जनता से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी अपुष्ट खबर पर विश्वास करने से पहले जिला नियंत्रण कक्ष (District Control Room) से जानकारी सत्यापित जरूर करें।

​48 घंटे में तीसरी घटना: लगातार बढ़ रही है चिंता

​मौसम का यह उग्र रूप पिछले दो दिनों से लगातार जारी है। इससे ठीक एक दिन पहले सोमवार को किश्तवाड़ जिले में निर्माणाधीन 540 मेगावाट के क्वाड़ जलविद्युत परियोजना (Kwar Hydroelectric Power Project) के पास भी इसी तरह की अचानक आई बाढ़ से राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था और कई उपयोगिता वाहन मलबे में दब गए थे।

इसके अलावा डोडा के ही भलेसा और प्रेमनगर क्षेत्रों में भी पिछले 24 घंटों में भारी तबाही देखी गई थी, जहाँ एक ऐतिहासिक शिव मंदिर के हिस्से को भी आंशिक नुकसान पहुंचा था। लगातार हो रही इन घटनाओं ने पूरी चेनाब घाटी के लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

​युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य जारी

​घटना की भयावहता को देखते हुए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और भारतीय सेना की टुकड़ियों ने मोर्चा संभाल लिया है। मलबे में दबी गाड़ियों और घरों से सामान निकालने तथा सड़कों को साफ करने के लिए भारी जेसीबी मशीनों को काम पर लगाया गया है।

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प्रशासन की प्राथमिकता सबसे पहले राष्ट्रीय राजमार्ग को बहाल करना और बेघर हुए लोगों को सुरक्षित आश्रय व राहत सामग्री पहुंचाना है। प्रभावित परिवारों ने शिकायत की है कि आपदा के कारण उनका सब कुछ नष्ट हो गया है और उनके पास पहनने-ओढ़ने तक के कपड़े नहीं बचे हैं, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने तत्काल तंबू और कंबल बांटने के निर्देश दिए हैं।

​मौसम विभाग का अलर्ट: अगले 24 घंटे भारी

​भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, डोडा में सोमवार को 26.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो इस अवधि की सामान्य बारिश (4.1 मिमी) से कई गुना अधिक है। मौसम विभाग ने जम्मू संभाग सहित डोडा, किश्तवाड़, रामबन, उधमपुर और रियासी जिलों के लिए अगले 24 घंटों तक ‘लाइट टू मॉडरेट’ और कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अलर्ट जारी रखा है। प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर यात्रियों और स्थानीय लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और नदी-नालों के पास न जाने की सख्त हिदायत दी है।

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