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US Attacks Iran: अमेरिका ने ईरान के 80 सैन्य ठिकानों पर किए ताबड़तोड़ हमले, होर्मुज जलडमरूमध्य में भारी तनाव से तेल बाजार में हड़कंप

On: July 8, 2026 4:59 AM
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Digital artwork depicting US fighter jets launching airstrikes on Iranian military installations with massive explosions and smoke.

​नई दिल्ली / वाशिंगटन / तेहरान

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में शांति की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। लंबे समय से सुलग रही युद्ध की चिंगारी अब एक भीषण दावानल में बदलती दिख रही है। अमेरिकी सैन्य बल ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (CENTCOM) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर विनाशकारी हमले शुरू कर दिए हैं।

पेंटागन से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के भीतर और उसके नियंत्रण वाले करीब 80 रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इस अचानक हुई सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं, जिससे वैश्विक कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के बाजार में जबरदस्त हड़कंप मच गया है।

​क्यों भड़का अमेरिका का गुस्सा?

​अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह जवाबी कार्रवाई कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है, बल्कि ईरान की लगातार बढ़ती आक्रामकता का सीधा नतीजा है। वाशिंगटन द्वारा जारी बयान के मुताबिक, ईरान ने पिछले महीने हुए द्विपक्षीय सीजफायर (युद्धविराम) का सरेआम उल्लंघन किया है।


​तनाव की हालिया वजह होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) में हुई वह घटना बनी, जहां ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इन जहाजों पर निर्दोष नागरिक और चालक दल के सदस्य सवार थे। अमेरिका ने ईरान की इस हरकत को बेहद गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक बताते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार मार्ग और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा के लिए ईरान को कड़ा सबक सिखाना जरूरी हो गया था।

​ईरान के किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?

​अमेरिकी रक्षा अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह ऑपरेशन बेहद सटीक और बड़े पैमाने पर प्लान किया गया था। इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस युद्ध क्षमता को ध्वस्त करना था जिसके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाता रहा है। अमेरिकी हमलों में मुख्य रूप से निम्नलिखित सैन्य संपत्तियों को टारगेट किया गया:

  • ​एयर डिफेंस सिस्टम: ईरान के रडार और विमान भेदी प्रणालियों को नष्ट किया गया ताकि अमेरिकी विमान सुरक्षित ऑपरेट कर सकें।
  • ​तटीय निगरानी प्रणाली: समुद्र में जहाजों पर नजर रखने वाले ईरानी कोस्टल मॉनिटरिंग रडार्स को तबाह कर दिया गया।
  • ​मिसाइल नेटवर्क: सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (SAM) और जहाजों को उड़ाने वाली एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों के गोदामों को निशाना बनाया गया।
  • ​ड्रोन लॉन्च पैड्स: हाल के दिनों में जहाजों पर हमले के लिए इस्तेमाल होने वाले ईरानी सुसाइड ड्रोन के लॉन्चिंग पैड्स को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया।

​स्थानीय सूत्रों और रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, दक्षिणी ईरान के प्रमुख बंदरगाह शहरों जैसे सिरीक, केशम और बंदर अब्बास में रातभर एक के बाद एक कई तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। आसमान में आग की लपटें और धुएं का गुबार साफ देखा जा सकता था।

​ईरान की जवाबी चेतावनी: “उठाएंगे सख्त कदम”

​इस भीषण हमले के बाद ईरान के तेवर भी बेहद कड़े नजर आ रहे हैं। वह झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

​ईरानी विदेश मंत्रालय का बयान:

“इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का विदेश मंत्रालय, अमेरिका द्वारा पिछले समझौते और सीजफायर का उल्लंघन किए जाने के गंभीर नतीजों के बारे में खुली चेतावनी देता है। ईरान अपने राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए कोई भी जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।”

​तेहरान के इस रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष थमने की बजाय और ज्यादा हिंसक रूप ले सकता है।

​ग्लोबल ऑयल मार्केट में मची खलबली

​होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में युद्ध शुरू होने की खबर फैलते ही वैश्विक तेल बाजार (क्रूड ऑयल मार्केट) में हड़कंप मच गया है।

कच्चे तेल की कीमतों में अचानक भारी उछाल देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव लंबा खिंचा या ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने की कोशिश की, तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ेगा।

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​निष्कर्ष और आगे की राह

​फिलहाल मिडिल ईस्ट एक ऐसे मुहाने पर खड़ा है जहां से एक छोटी सी चूक भी तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक नेताओं ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन जमीनी हालात को देखते हुए शांति की उम्मीद बेहद कम नजर आ रही है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी हमले के बाद ईरान का अगला कदम क्या होगा।

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