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चम्पावत में खेल के मैदान में पसरा मातम: भाला लगने से पॉलिटेक्निक छात्र की दर्दनाक मौत, परिजनों में कोहराम

On: April 18, 2026 8:38 AM
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चम्पावत पॉलिटेक्निक मैदान जहाँ छात्र को भाला लगा और पुलिस जांच की प्रतीकात्मक तस्वीर |

​चंपावत। उत्तराखंड के शांत पर्वतीय जिले चम्पावत से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ खेल की गतिविधियों के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में 18 वर्षीय पॉलिटेक्निक छात्र की जान चली गई। मृतक छात्र के गले में साथी खिलाड़ी द्वारा फेंका गया भाला (Javelin) जा घुसा, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण उसकी मौत हो गई। इस घटना ने जहाँ एक ओर खेल जगत को स्तब्ध कर दिया है, वहीं मृतक के परिवार में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

​कैसे हुआ यह भीषण हादसा?

​मिली जानकारी के अनुसार, चम्पावत स्थित पॉलिटेक्निक संस्थान के मैदान में शनिवार को नियमित खेल गतिविधियां और अभ्यास चल रहा था। 18 वर्षीय सोमेंद्र सिंह, जो कि संस्थान का मेधावी छात्र था, अपने साथियों के साथ अभ्यास सत्र में हिस्सा ले रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अभ्यास के दौरान एक अन्य खिलाड़ी ने भाला फेंका, लेकिन दुर्भाग्यवश सोमेंद्र उसकी दिशा को भांप नहीं सका और वह सीधा उसके गले में जा लगा।

​भाला लगते ही सोमेंद्र लहूलुहान होकर मैदान पर गिर पड़ा। मैदान में मौजूद अन्य छात्रों और प्रशिक्षकों के बीच अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में छात्र को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन घाव इतना गहरा था कि उपचार के दौरान ही सोमेंद्र ने दम तोड़ दिया।

​परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

​सोमेंद्र सिंह की मौत की खबर मिलते ही उसके गांव और घर में मातम छा गया। जैसे ही एंबुलेंस से शव घर पहुँचा, परिजनों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गमगीन हो गया। सोमेंद्र के माता-पिता अपने जवान बेटे को खोने के गम में सुध-बुध खो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सोमेंद्र न केवल पढ़ाई में अच्छा था, बल्कि खेल के प्रति भी उसका काफी रुझान था। वह भविष्य में खेल के माध्यम से अपने जिले का नाम रोशन करना चाहता था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

​सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

​इस घटना ने खेल के मैदानों पर सुरक्षा मानकों को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भाला फेंक (Javelin Throw) जैसे खेलों के अभ्यास के दौरान विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए। अभ्यास के समय मैदान का वह हिस्सा पूरी तरह खाली होना चाहिए जहाँ भाला गिरता है।

  • ​निगरानी की कमी: क्या अभ्यास के दौरान कोई कोच या सुरक्षा निरीक्षक वहां मौजूद था?
  • ​दूरी का अभाव: क्या खिलाड़ी सुरक्षित दूरी बनाए रखने के नियमों का पालन कर रहे थे?
  • ​प्रशिक्षण का स्तर: क्या छात्रों को खेल के जोखिमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई थी?

​इन सभी सवालों के जवाब अब प्रशासन और संस्थान को देने होंगे। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐसे खतरनाक खेलों के अभ्यास के लिए उचित घेराबंदी और पेशेवर निगरानी अनिवार्य की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी और सोमेंद्र को अपनी जान न गंवानी पड़े।

​पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

​घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस बल अस्पताल पहुँचा और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह प्रथम दृष्टया एक दुर्घटना का मामला लग रहा है, लेकिन खेल के मैदान में मौजूद अन्य छात्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या यह महज एक हादसा था या इसमें किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई थी।
​पॉलिटेक्निक संस्थान के प्रबंधन ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतक छात्र के सम्मान में संस्थान को कुछ समय के लिए बंद रखने का निर्णय लिया है।

​खेल जगत में शोक की लहर

​चंपावत ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के खेल जगत में इस घटना के बाद शोक की लहर है। कई स्थानीय नेताओं और खेल संघों ने सोमेंद्र की मौत पर संवेदना व्यक्त की है। खेल प्रेमियों का कहना है कि एक उभरते हुए खिलाड़ी का इस तरह जाना राज्य की खेल प्रतिभा के लिए एक बड़ी क्षति है।

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​निष्कर्ष

​खेल हमें अनुशासन और टीम भावना सिखाते हैं, लेकिन असावधानी इसे जानलेवा बना सकती है। सोमेंद्र की मौत केवल एक परिवार का नुकसान नहीं है, बल्कि यह खेल प्रशिक्षण प्रणालियों के लिए एक चेतावनी भी है। प्रशासन को चाहिए कि वह खेल मैदानों पर सुरक्षा घेरा (Safety Perimeter) सुनिश्चित करे ताकि अभ्यास कर रहे खिलाड़ी सुरक्षित महसूस कर सकें।

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