देहरादून, 1 जून 2026
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) एक बार फिर एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण का गवाह बनने जा रही है। भारत की राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू आगामी 12 और 13 जून को देहरादून के दो दिवसीय दौरे पर आ रही हैं। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण 13 जून की सुबह होने वाली आईएमए की बहुप्रतीक्षित पासिंग आउट परेड (Passing Out Parade – POP) होगी, जहाँ राष्ट्रपति मुख्य अतिथि और ‘समीक्षा अधिकारी’ (Reviewing Officer) के रूप में परेड की सलामी लेंगी।
इस वर्ष की पासिंग आउट परेड कई मायनों में बेहद खास और ऐतिहासिक होने जा रही है। पीआईबी (PIB) द्वारा इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद, सैन्य अकादमी के साथ-साथ पूरे प्रदेश में सुरक्षा और स्वागत की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं।
IMA के इतिहास में पहली बार: महिला कैडेट्स रचेंगी इतिहास
यह पासिंग आउट परेड भारतीय सैन्य इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगी, क्योंकि आईएमए के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब महिला कैडेट्स भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अंतिम पग पार करेंगी। महिला सैन्य अधिकारियों के पहले बैच का इस प्रीमियर ट्रेनिंग संस्थान से पास आउट होना देश के सैन्य सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को और भी ज्यादा यादगार बना देगी। इस बार परेड में 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स (TGC) के जेंटलमैन कैडेट्स के साथ महिला कैडेट्स भी अपनी ट्रेनिंग पूरी कर भारतीय सेना में बतौर अधिकारी कमीशन प्राप्त करेंगी। इसके तुरंत बाद ये सभी देश के अलग-अलग मोर्चों पर राष्ट्र की रक्षा के लिए तैनात कर दिए जाएंगे।
’Residual Heat’ जैसी ऊर्जा के साथ मैदान पर पसीना बहा रहे कैडेट्स
राष्ट्रपति के आगमन की सूचना ने आईएमए के कैंप पैड और ड्रिल स्क्वायर (Drill Square) पर अभ्यास कर रहे कैडेट्स के उत्साह को दोगुना कर दिया है। 13 जून को सुबह ठीक 7:30 बजे शुरू होने वाले मुख्य समारोह के लिए अकादमी के भीतर जबरदस्त जोश का माहौल है।
अकादमी के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की देखरेख में कैडेट्स के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। परेड की रीढ़ माने जाने वाले ‘मार्चिंग पास्ट’ और ‘हथियार ड्रिल’ को त्रुटिहीन (Perfect) बनाने के लिए सुबह-शाम कड़ा अभ्यास किया जा रहा है। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि परेड का स्तर सर्वोच्च बनाए रखने के लिए कैडेट्स की शारीरिक और मानसिक क्षमता को बेहतरीन शेप में रखा जा रहा है।
IMA का गौरवशाली सफर: 40 कैडेट्स से 1650 तक का सफर
भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) का इतिहास देश के शौर्य और पराक्रम की गाथाओं से भरा पड़ा है। एक नजर डालते हैं इसके अब तक के सफर पर:
ऐतिहासिक मील के पत्थर
विवरण
स्थापना दिवस
1 अक्टूबर 1932
उद्घाटनकर्ता
कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल सर फिलिप चेटवोड
शुरुआती क्षमता
मात्र 40 जेंटलमैन कैडेट्स
वर्तमान क्षमता
1,650 जेंटलमैन और महिला कैडेट्स
कुल गौरवशाली पूर्व छात्र
64,000 से अधिक अधिकारी देश को समर्पित
चेटवोड मोटो की सीख:
आईएमए की बुनियाद फील्ड मार्शल चेटवोड के उसी प्रसिद्ध सिद्धांत पर टिकी है जो सिखाता है कि—”आपके देश की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण हमेशा और हर बार सबसे पहले आता है।”
गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनेंगे देश के नए रखवाले
आईएमए की पासिंग आउट परेड में देश के राष्ट्रपति का आना अपने आप में एक बड़ा सम्मान माना जाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से पहले पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (2006), प्रतिभा पाटिल (2011) और रामनाथ कोविंद (2021) भी इस गरिमामयी समारोह की शोभा बढ़ा चुके हैं।
इस वर्ष जून में होने जा रही इस परेड के समापन के साथ ही, जब ये युवा कैडेट्स ‘कसम परेड’ के दौरान देश के संविधान और संप्रभुता की रक्षा की शपथ लेंगे, तो वह पल हर भारतीय को गौरवान्वित करने वाला होगा। देहरादून प्रशासन ने भी राष्ट्रपति के दो दिवसीय दौरे के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक रूट प्लान को लेकर ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है, ताकि इस राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम को पूरी भव्यता के साथ संपन्न कराया जा सके।
इस ऐतिहासिक परेड में पहली बार महिला अधिकारियों का पास आउट होना, भारतीय सेना के भविष्य को किस तरह प्रभावित करेगा?









