पूर्व मेदिनीपुर: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रथम चरण के मतदान में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में राज्य में चुनावी सरगर्मी के साथ-साथ प्रशासन की सख्ती भी चरम पर है। रविवार को पूर्व मेदिनीपुर जिले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग वाहनों से कुल 1 करोड़ 27 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और विपक्षी दलों ने भी सत्तारूढ़ प्रशासन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
नाका चेकिंग के दौरान मिली बड़ी सफलता
चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, राज्य की सीमाओं और जिला मुख्यालयों को जोड़ने वाली सड़कों पर गहन ‘नाका चेकिंग’ अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को पूर्व मेदिनीपुर पुलिस ने वाहनों की तलाशी ली।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध कार को रोका गया। जब अधिकारियों ने वाहन की सघन तलाशी ली, तो उसमें से 1 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। इसी के कुछ समय बाद, एक निजी बस की तलाशी में 23 लाख रुपये की अतिरिक्त नकदी मिली। इतनी बड़ी राशि के स्रोत के बारे में वाहन सवार कोई भी पुख्ता दस्तावेज तुरंत पेश नहीं कर सके।
क्या यह बैंक का पैसा है या चुनावी प्रलोभन?
शुरुआती पूछताछ में कार से मिले 1 करोड़ रुपये के बारे में दावा किया जा रहा है कि यह राशि तमलुक घाटाल कोऑपरेटिव बैंक से संबंधित है। हालांकि, पुलिस इस दावे को संदेह की नजर से देख रही है।
- जांच का विषय: क्या बैंक की नकदी को बिना सुरक्षा प्रोटोकॉल और पर्याप्त दस्तावेजों के एक निजी वाहन में ले जाया जा सकता है?
- संदेह: क्या यह राशि चुनाव से ठीक पहले मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किसी राजनीतिक दल द्वारा भेजी जा रही थी?
पुलिस अब बैंक अधिकारियों से संपर्क कर इस लेनदेन की सत्यता की पुष्टि कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह बैंक की आधिकारिक राशि है, तो इसके ट्रांजेक्शन स्लिप और अनुमति पत्र होने अनिवार्य हैं।
प्रथम चरण के मतदान से पहले ‘अलर्ट मोड’ पर प्रशासन
23 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान होना है। चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव में धनबल और बाहुबल के इस्तेमाल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आयोग की फ्लाइंग स्क्वॉड (FS) और स्टैटिक सर्विलांस टीम (SST) राज्य भर में सक्रिय हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, चुनाव की घोषणा के बाद से अब तक बंगाल के विभिन्न हिस्सों से करोड़ों रुपये की नकदी, अवैध शराब और ड्रग्स जब्त किए जा चुके हैं। पूर्व मेदिनीपुर की यह घटना बताती है कि प्रशासन की सतर्कता के बावजूद अवैध धन का प्रवाह रोकने की चुनौती कितनी बड़ी है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
चुनावी माहौल में इतनी बड़ी बरामदगी ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू कर दिया है। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि चुनाव को ‘कैश’ के दम पर जीतने की कोशिश की जा रही है। वहीं, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
प्रमुख बिंदु जो जांच के घेरे में हैं:
- बस से बरामद 23 लाख रुपये का मालिक कौन है और यह पैसा कहां ले जाया जा रहा था?
- क्या इन दोनों बरामदगी के बीच कोई आपसी संबंध है?
- चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन को लेकर क्या संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी?
चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी
चुनाव आयोग ने राज्य में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। आयोग ने निर्देश दिया है कि 50,000 रुपये से अधिक की नकद राशि ले जाने पर संबंधित व्यक्ति के पास वैध दस्तावेज होने चाहिए, अन्यथा राशि जब्त की जा सकती है।
पूर्व मेदिनीपुर की घटना के बाद, राज्य के अन्य संवेदनशील जिलों जैसे बीरभूम, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना में भी सुरक्षा व्यवस्था और नाका चेकिंग को और अधिक सख्त कर दिया गया है।
निष्कर्ष
फिलहाल, पुलिस ने बरामद की गई पूरी नकदी को जब्त कर लिया है और उसे सुरक्षित कोषागार (Treasury) में रखवाया गया है। आयकर विभाग (Income Tax Department) को भी इस मामले की जानकारी दी जा सकती है। जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह महज एक बैंक ट्रांसफर था या लोकतंत्र के महापर्व को दूषित करने की कोई गहरी साजिश।
आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब पुलिस और चुनाव आयोग के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं। यह घटना एक बार फिर इस सवाल को जन्म देती है कि क्या हम वास्तव में ‘कैश-फ्री’ चुनाव की ओर बढ़ रहे हैं?








