देहरादून (उत्तराखंड): उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सरकारी योजनाओं का गलत तरीके से लाभ उठाने वालों पर प्रशासन ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। समाज कल्याण और महिला कल्याण विभाग के अंतर्गत दी जाने वाली विभिन्न पेंशन योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए एक व्यापक ‘भौतिक सत्यापन अभियान’ (Physical Verification Drive) का बिगुल फूंक दिया गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के कड़े रुख के बाद मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि 15 जून तक जिले के हर एक पेंशन लाभार्थी का शत-प्रतिशत सत्यापन सुनिश्चित किया जाए।
क्यों पड़ी इस अभियान की जरूरत?
अक्सर यह शिकायतें मिलती रही हैं कि कई अपात्र लोग सांठगांठ करके पेंशन का लाभ ले रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में लाभार्थी की मृत्यु के बावजूद उनके बैंक खातों में पेंशन की राशि लगातार भेजी जा रही है। इस भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बर्बादी को रोकने के लिए विभाग ने अब ‘फिल्टर’ लगाने की तैयारी कर ली है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अपात्र, फर्जी और मृत लाभार्थियों को सूची से बाहर करना है ताकि योजना का पैसा केवल उन लोगों तक पहुंचे जो वास्तव में इसके हकदार हैं।
1.30 लाख से अधिक लाभार्थी जांच के दायरे में
देहरादून जिले में पेंशन लाभार्थियों की संख्या काफी बड़ी है। इस अभियान के तहत जिले के लाखों लोगों के दस्तावेजों और उनकी वर्तमान स्थिति की जांच होगी। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जांच के दायरे में आने वाले मुख्य वर्ग इस प्रकार हैं:
- वृद्धावस्था पेंशन: 76,128 लाभार्थी
- विधवा पेंशन: 32,011 लाभार्थी
- दिव्यांग पेंशन: 11,596 लाभार्थी
- परित्यक्ता पेंशन: 8,140 लाभार्थी
- दिव्यांग बच्चे (0-18 वर्ष): 1,121 लाभार्थी
- किसान पेंशन: 672 लाभार्थी
- विशेष श्रेणियां: तीलू रौतेली और बौना पेंशन लाभार्थी।
कैसे होगा सत्यापन? घर-घर जाएगी टीम
प्रशासन ने इस अभियान को युद्ध स्तर पर चलाने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। शहरी क्षेत्रों में उप जिलाधिकारी (SDM) और ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारी (BDO) को इसकी कमान सौंपी गई है।
इन अधिकारियों के नेतृत्व में पटवारी, लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) की टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें घर-घर जाकर लाभार्थी की वास्तविक स्थिति की जांच करेंगी।
- मृतक श्रेणी: यदि सत्यापन के दौरान कोई लाभार्थी मृत पाया जाता है, तो टीम को उसकी मृत्यु की सटीक तिथि दर्ज करनी होगी।
- अपात्र श्रेणी: यदि कोई व्यक्ति पेंशन की शर्तों को पूरा नहीं करता (जैसे आय सीमा अधिक होना या गलत दस्तावेज), तो उसे ‘अपात्र’ घोषित कर नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
अधिकारियों को सख्त चेतावनी: लापरवाही पर होगी कार्रवाई
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने साफ कर दिया है कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 15 जून की समयसीमा को ‘अंतिम’ माना गया है। सत्यापन पूरा होने के बाद सभी नोडल अधिकारियों को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सहायक समाज कल्याण अधिकारी को सौंपनी होगी। इसके बाद डाटा को अपडेट किया जाएगा और फर्जी तरीके से ली गई पेंशन की रिकवरी पर भी विचार किया जा सकता है।
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पारदर्शिता की ओर एक बड़ा कदम
जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर शुरू हुआ यह अभियान न केवल सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अवैध बोझ को कम करेगा, बल्कि वेटिंग लिस्ट में बैठे पात्र लाभार्थियों के लिए रास्ते भी खोलेगा। प्रशासन का मानना है कि इस अद्यतन (Update) डाटा के बाद विभाग के पास वास्तविक जरूरतमंदों की एक सटीक सूची होगी, जिससे भविष्य की योजनाओं के क्रियान्वयन में आसानी होगी।
- मुख्य उद्देश्य: देहरादून जिले में समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजनाओं (वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग आदि) से फर्जी, अपात्र और मृत लाभार्थियों के नाम हटाना।
- समयसीमा: जिलाधिकारी के निर्देश पर यह शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन अभियान 15 जून तक पूरा किया जाना है।
- जांच का दायरा: जिले के लगभग 1.30 लाख लाभार्थी जांच के दायरे में हैं, जिनमें सबसे अधिक 76,128 वृद्धावस्था पेंशनर हैं।
- सत्यापन प्रक्रिया: पटवारी, लेखपाल और ग्राम विकास अधिकारियों की टीमें घर-घर जाकर लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच करेंगी।
- नोडल अधिकारी: शहरी क्षेत्रों में SDM और ग्रामीण क्षेत्रों में BDO को इस अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- सख्त निर्देश: लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी; सत्यापन के बाद अपात्रों के नाम काटकर सूची को अपडेट किया जाएगा।







