अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

मीट में मिर्च ज्यादा होने पर हुआ था मर्डर; नैनीताल कोर्ट ने हत्यारे को सुनाई उम्रकैद

On: May 21, 2026 7:26 AM
Follow Us:
नैनीताल कोर्ट द्वारा मीट में मिर्च विवाद हत्याकांड के दोषी को उम्रकैद की सजा का नाटकीय रूपांतरण दृश्य

​नैनीताल।

उत्तराखंड के नैनीताल जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज कानूनी फैसला सामने आया है। मामूली सी बात पर किसी की जान ले लेना कितना भारी पड़ सकता है, इसका उदाहरण नैनीताल की एक अदालत ने पेश किया है। कोर्ट ने साल 2019 में हुए एक हत्याकांड के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है।
​यह पूरा विवाद महज इस बात पर शुरू हुआ था कि पूजा के बाद बने मीट (मांस) में मिर्च तेज़ थी। इस मामूली बहस ने देखते ही देखते खूनी रूप अख्तियार कर लिया और एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी। अब लगभग 7 साल बाद अदालत ने पीड़ित परिवार को न्याय देते हुए दोषी को सख्त सजा से दंडित किया है।

​क्या है पूरा मामला? (घटनाक्रम)

​यह खूनी वारदात 7 सितंबर 2019 की रात की है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) राम सिंह रौतेला द्वारा कोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, नैनीताल जिले के पहाड़पानी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कालागढ़ी गधेरे में एक धार्मिक पूजा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस पारंपरिक पूजा में पशु बलि दी गई थी, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों के लिए मीट पकाया जा रहा था।
​पूजा संपन्न होने के बाद सभी लोग प्रसाद (मीट) ग्रहण कर रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद अशोक मेलकानी और धारी के ग्राम सकदीना निवासी ललित मोहन चौसाली के बीच मीट को लेकर बातचीत शुरू हुई। अशोक ने मीट में मिर्च ज्यादा होने की बात कही, जो ललित मोहन को नागवार गुजरी।

​’तुझे ही मिर्च क्यों लग रही है’ और फिर मर्डर

​प्रत्यक्षदर्शियों और अभियोजन पक्ष के अनुसार, मिर्च तेज होने की बात पर अभियुक्त ललित मोहन चौसाली अचानक उग्र हो गया। उसने गुस्से में अशोक से कहा, “बाकी सब भी खा रहे हैं, तुझे ही मिर्च क्यों लग रही है?”

​यह बात इतनी बढ़ी कि दोनों के बीच तीखी बहस और गाली-गलौज शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों में धक्का-मुक्की होने लगी। उस वक्त पूजा कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को शांत कराया और मामला रफा-दफा करने की कोशिश की। विवाद बढ़ता देख अशोक मेलकानी वहां से उठकर अपने घर की तरफ जाने लगा।
​लेकिन ललित मोहन के सिर पर खून सवार था। जैसे ही अशोक कार्यक्रम स्थल से थोड़ा आगे बढ़ा, ललित मोहन हाथ में तेजधार चाकू लेकर उसके पीछे दौड़ा। उसने सरेराह अशोक पर चाकू से ताबड़तोड़ कई प्रहार कर दिए। चाकू के गंभीर वार लगने के कारण अशोक लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई।

​राजस्व पुलिस से रेगुलर पुलिस को ट्रांसफर हुआ केस

​घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मृतक अशोक के भाई बबलू ने तुरंत इस मामले की शिकायत स्थानीय राजस्व पुलिस (पटवारी पुलिस) में दर्ज कराई। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में प्राथमिक जांच राजस्व पुलिस ही करती है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में इस हाई-प्रोफाइल केस को रेगुलर पुलिस (प्रांतीय पुलिस) के हवाले कर दिया गया। रेगुलर पुलिस ने मुस्तैदी से जांच करते हुए आरोपी ललित मोहन चौसाली को गिरफ्तार किया और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।

​गवाह मुकर गए, लेकिन दस्तावेजी सबूतों ने दिलाई सजा

​इस केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ भी आया। वारदात के वक्त मौके पर मौजूद चार अहम चश्मदीद गवाह अदालत में अपने बयानों से मुकर गए (होस्टाइल हो गए) और उन्होंने आरोपी ललित के पक्ष में गवाही दे दी। आम तौर पर गवाहों के मुकर जाने से केस कमजोर हो जाता है, लेकिन अभियोजन पक्ष ने हार नहीं मानी।

​सरकारी वकील ने कोर्ट के सामने वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों की झड़ी लगा दी। अभियोजन की ओर से अदालत में:

  • ​22 मजबूत दस्तावेजी साक्ष्य (जैसे- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट, घटना स्थल का नक्शा और बरामद चाकू) पेश किए गए।
  • ​इसके साथ ही एक बेहद मजबूत गवाह की गवाही दर्ज कराई गई, जो अंत तक अपने बयान पर कायम रहा।

​इन अकाट्य सबूतों के सामने आरोपी के वकीलों की दलीलें टिक नहीं सकीं और यह साबित हो गया कि हत्या ललित मोहन ने ही की थी।

​कोर्ट का सख्त फैसला और जुर्माना

​दोनों पक्षों की लंबी बहस और सबूतों को देखने के बाद, द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कुलदीप शर्मा की अदालत ने आरोपी ललित मोहन चौसाली को हत्या की धारा 302 के तहत दोषी पाया।

​अदालत का आदेश:

कोर्ट ने दोषी ललित मोहन चौसाली को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी पर 50,000 रुपये का आर्थिक दंड (जुर्माना) भी लगाया है। अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए यह भी आदेश दिया है कि जुर्माने की यह पूरी 50 हजार रुपये की राशि मृतक अशोक के पीड़ित परिजनों (स्वजनों) को दी जाएगी, ताकि उन्हें थोड़ी आर्थिक सहायता मिल सके।

ये भी पढ़े➜दिल्ली के गोविंदपुरी में सनसनीखेज वारदात: मां-बेटे की चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या, खून से लथपथ मिलीं लाशें

​समाज के लिए एक बड़ा संदेश

​यह फैसला समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि क्षणिक गुस्सा और मामूली बातों पर आपा खो देना हंसते-खेलते परिवारों को कैसे तबाह कर सकता है। एक तरफ जहां मिर्च जैसी छोटी सी बात पर एक युवक की जान चली गई, वहीं दूसरी तरफ हत्यारे को अब अपनी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे गुजारनी होगी। नैनीताल कोर्ट के इस फैसले की क्षेत्र में काफी चर्चा हो रही है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

BSNL 4G network connectivity reaches 2,600 villages in Uttarakhand

उत्तराखंड में BSNL 4G का बड़ा विस्तार, 2,600 गांव जुड़े, 85 नए टावरों पर काम जारी!

Chamoli Tunnel Accident rescue operation at Vishnugad-Pipalkoti hydroelectric project with SDRF teams and CM Pushkar Singh Dhami

चमोली सुरंग हादसा: विष्णुगाड-पीपलकोटी प्रोजेक्ट में 7 मजदूरों की मौत, सीएम धामी ने की 4-4 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा

नैनीताल के रामगढ़ में बड़ा हादसा: 100 फीट गहरी खाई में गिरा हरियाणा के पर्यटकों से भरा टेंपो ट्रैवलर, 22 घायल, दो की हालत नाजुक

​देहरादून में जमीन दिलाने के नाम पर 2.20 करोड़ की ठगी: दो लोगों पर मुकदमा दर्ज, दूसरी घटना में बुजुर्ग के घर से गहने-नकदी ले उड़ा नर्सिंग स्टाफ

देहरादून के मोहब्बेवाला में दिल दहला देने वाला हादसा: सफाई मशीन पर पलटा बेकाबू कंटेनर, ऑपरेटर का सिर धड़ से अलग

Rescue teams conducting operations after the Chamoli tunnel accident at Vishnugad Pipalkoti hydro project

Chamoli Tunnel Landslide: सात शव बरामद और तीन लापता, टनल के अंदर पहुंचे सीएम धामी

Leave a Comment