नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड अब केवल तीर्थाटन और साहसिक पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दुनिया के नक्शे पर एक ‘ग्लोबल वेडिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में उभरने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य के विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट साझा की। इस मुलाकात के दौरान सीएम धामी ने प्रधानमंत्री के “वेड इन इंडिया” के आह्वान को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की विस्तार से जानकारी दी।
‘वेड इन इंडिया’: वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन की ओर कदम
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व में सुझाव दिया था कि भारतीयों को विदेशों के बजाय देश के भीतर ही विवाह समारोह आयोजित करने चाहिए। इसी विजन को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि उत्तराखंड में चोपता, दुगलबिट्टा, पटवाडांगर और शारदा कॉरिडोर जैसे क्षेत्रों को विशेष रूप से वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि रामनगर, देहरादून, ऋषिकेश और त्रियुगीनारायण पहले से ही जोड़ों की पहली पसंद बने हुए हैं। अब राज्य सरकार एक समर्पित ‘वेडिंग डेस्टिनेशन पॉलिसी’ तैयार कर रही है, जिससे बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
आध्यात्मिक और आर्थिक क्षेत्रों का विस्तार
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए सीएम धामी ने तीन नए ‘आध्यात्मिक आर्थिक क्षेत्रों’ (Spiritual Economic Zones) की पहचान की है:
- बेल केदार
- अंजनीसैंण (टिहरी)
- लोहाघाट-श्यामलाताल
इन क्षेत्रों में पर्यटन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि आदि कैलाश यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी उछाल आया है। वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 36,453 श्रद्धालुओं ने आदि कैलाश के दर्शन किए, जो राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में बढ़ते पर्यटन का प्रमाण है।
डिफेंस हब बनेंगे कोटद्वार, हरिद्वार और देहरादून
उत्तराखंड की सामरिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि राज्य को रक्षा उपकरण निर्माण (Defense Manufacturing) के केंद्र के रूप में विकसित करने में सहयोग दिया जाए। उन्होंने कोटद्वार, हरिद्वार और देहरादून को रक्षा उपकरण उत्पाद इंडस्ट्रियल हब बनाने का प्रस्ताव रखा। सीएम ने तर्क दिया कि राज्य के पास कुशल मानव संसाधन और आवश्यक ढांचा मौजूद है, जो रक्षा क्षेत्र की इकाइयों के लिए उपयुक्त है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने रायवाला क्षेत्र में बीआइ-डक ब्रिज के निर्माण और उत्तरकाशी की चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी के विस्तार की आवश्यकता पर भी बल दिया।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान: ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’
राज्य के स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए मुख्यमंत्री ने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के प्रयासों की जानकारी दी। इसके माध्यम से उत्तराखंड के हस्तशिल्प, आर्गेनिक भोजन और स्थानीय उत्पादों को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाया जा रहा है।
विकास के अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:
- होम स्टे क्रांति: राज्य में अब तक 6,000 से अधिक होम स्टे पंजीकृत हो चुके हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रहे हैं।
- सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: अल्मोड़ा के चौबटिया में सेब, चेरी, प्लम और नाशपाती के लिए अत्याधुनिक केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।
- सौर ऊर्जा: सौर परियोजनाओं के माध्यम से हजारों परिवारों को सीधे स्वरोजगार से जोड़ा गया है।
- अग्निवीर आरक्षण: राज्य की सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10% आरक्षण की नियमावली लागू कर दी गई है।
सरलीकरण और सुशासन पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड जनविश्वास विधेयक के माध्यम से कई जटिल कानूनों को सरल बनाया गया है। औद्योगिक श्रम, खनन, राजस्व और शहरी विकास के क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए गए हैं। साथ ही, ‘उत्तरास्टेज’ नाम से देश का पहला निःशुल्क मार्केटिंग पोर्टल भी शुरू किया गया है, जो उद्यमियों के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।
सीएम धामी ने कुंभ मेले की तैयारियों के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई 500 करोड़ रुपये की सहायता के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि केंद्र के मार्गदर्शन में उत्तराखंड जल्द ही देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।







