पेट्रोलियम मंत्रालय ने पैनिक बुकिंग और अफवाहों पर लगाया विराम; LPG और CNG की निर्बाध आपूर्ति के लिए उठाए गए ठोस कदम
नई दिल्ली। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिरता के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर आम जनता को बड़ा आश्वासन दिया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संकट का भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) की आपूर्ति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक खरीदारी से बचें।
पर्याप्त भंडार और रिफाइनरियों की फुल क्षमता
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि भारत के पास कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने जानकारी दी कि देश की सभी रिफाइनरियां वर्तमान में अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। भारत की वार्षिक रिफाइनिंग क्षमता लगभग 26 करोड़ टन है, जो घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल किसी भी तरह की बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। देश के सभी पेट्रोलियम टर्मिनलों और पेट्रोल पंपों पर स्टॉक की स्थिति सामान्य है, इसलिए उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
पैनिक खरीदारी और अफवाहों पर लगाम
पिछले दो दिनों के दौरान देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गई थीं। यह स्थिति मुख्य रूप से आपूर्ति रुकने की अफवाहों और पैनिक खरीदारी के कारण पैदा हुई थी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसी कतारें बेवजह हैं और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पूरी तरह से सुचारू है। संयुक्त सचिव ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे सामान्य रूप से ईंधन की खरीद करें और भविष्य की चिंता में अतिरिक्त स्टॉक जमा न करें।
LPG आपूर्ति: कमर्शियल कोटा बढ़ा, घरेलू बुकिंग सामान्य
एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने रणनीतिक बदलाव किए हैं।
- कोटा में वृद्धि: सरकार ने कमर्शियल एलपीजी की मात्रा को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला 21 मार्च को लिया गया था ताकि औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में ईंधन की कमी न हो।
- प्राथमिकता: राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ढाबों, होटलों, औद्योगिक कैंटीनों और प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता के आधार पर गैस आवंटित करें।
- वितरण: अब तक 26 राज्यों को लगभग 22,000 टन कमर्शियल एलपीजी आवंटित की जा चुकी है। केवल मंगलवार को ही 30,000 से अधिक 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर जारी किए गए हैं।
- घरेलू एलपीजी: घरेलू गैस सिलेंडरों की कोई किल्लत नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, ऑनलाइन बुकिंग दर 92 प्रतिशत पर है और होम डिलीवरी पूरी तरह सामान्य गति से चल रही है।
PNG और CNG पर सरकार का विशेष जोर
सरकार अब उपभोक्ताओं को एलपीजी से पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की ओर शिफ्ट करने के लिए बड़े प्रोत्साहन दे रही है।
- नए कनेक्शन: पिछले 25 दिनों में रिकॉर्ड 2.5 लाख नए पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं।
- शिफ्टिंग: लगभग 2.2 लाख उपभोक्ताओं ने एलपीजी छोड़कर पीएनजी को अपनाया है।
- आसान प्रक्रिया: सरकार ने एक नया गजट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत आवेदन शुल्क कम कर दिया गया है और मंजूरी की समयसीमा को भी घटा दिया गया है।
- सीएनजी: वाहनों के लिए सीएनजी की आपूर्ति भी शत-प्रतिशत सुनिश्चित की जा रही है। कई गैस कंपनियां 500 रुपये तक की मुफ्त गैस या सिक्योरिटी डिपॉजिट माफी जैसे आकर्षक ऑफर दे रही हैं।
राज्यों को सहयोग का प्रस्ताव
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के सामने एक आकर्षक प्रस्ताव रखा है। यदि राज्य सरकारें अपने क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क के विस्तार में सहयोग करती हैं, तो केंद्र उन्हें अतिरिक्त 10 प्रतिशत व्यावसायिक एलपीजी देने के लिए तैयार है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों की ओर बदलाव भी तेज होगा।
निष्कर्ष: केंद्र सरकार के इन कदमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत की ऊर्जा व्यवस्था मजबूत है। सरकार की मुस्तैदी और पर्याप्त बफर स्टॉक ने यह सुनिश्चित किया है कि आम आदमी की जेब और रसोई पर मिडिल ईस्ट संकट का साया न पड़े।











