ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम में बनेगा भव्य प्री-वेडिंग डेस्टिनेशन: गंगा तट पर मिलेगा समुद्री 'बीच' जैसा अनुभव - Doonprimenews
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ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम में बनेगा भव्य प्री-वेडिंग डेस्टिनेशन: गंगा तट पर मिलेगा समुद्री ‘बीच’ जैसा अनुभव

On: March 25, 2026 11:00 AM
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ऋषिकेश स्वर्गाश्रम में गंगा किनारे प्री-वेडिंग शूट कराते कपल और रेतीला तट।

नगर पंचायत स्वर्गाश्रम की अनूठी पहल: शिव-गंगा तट को चुना गया, उत्तराखंड की लोक संस्कृति और नैसर्गिक सौंदर्य को मिलेगा वैश्विक मंच
ऋषिकेश/पौड़ी। विश्व प्रसिद्ध भव्य गंगा आरती और योग-अध्यात्म की नगरी के रूप में विख्यात स्वर्गाश्रम (पौड़ी) अब एक नई पहचान ओढ़ने जा रहा है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए देश-दुनिया के पर्यटकों की पहली पसंद रहने वाले इस क्षेत्र को अब आधिकारिक तौर पर ‘प्री-वेडिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित किया जाएगा। नगर पंचायत स्वर्गाश्रम (जौंक) ने पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर लाने के लिए ‘शिव-गंगा तट’ को इस खास प्रोजेक्ट के लिए चयनित किया है।

शिव-गंगा तट: जहाँ रेतीले किनारे देंगे ‘समुद्री बीच’ का अहसास
स्वर्गाश्रम के वार्ड नंबर-तीन में स्थित शिव-गंगा तट अपनी विशिष्ट भौगोलिक बनावट के लिए जाना जाता है। यहाँ गंगा के किनारे फैले सफेद रेतीले तट किसी समुद्री बीच (Sea Beach) जैसा अनुभव कराते हैं। विदेशी पर्यटक अक्सर यहाँ घंटों बैठकर ध्यान और योग करते नजर आते हैं। अब इसी नैसर्गिक सौंदर्य का उपयोग नवविवाहित जोड़ों और शादी के बंधन में बंधने जा रहे युवाओं के प्री-वेडिंग शूट के लिए किया जाएगा।
नगर पंचायत का मानना है कि यहाँ का शांत वातावरण, गंगा की अविरल धारा और हिमालय की गोद में बसा यह स्थल प्री-वेडिंग फोटोशूट के लिए दुनिया के बेहतरीन लोकेशंस को टक्कर दे सकता है।

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

नगर पंचायत बोर्ड का ऐतिहासिक फैसला

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

स्वर्गाश्रम नगर पंचायत की पिछली बोर्ड बैठक में निकाय अध्यक्ष और सभासदों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्वर्गाश्रम क्षेत्र में केवल धार्मिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि आधुनिक पर्यटन (Wedding Tourism) को भी प्रोत्साहित करना है। प्री-वेडिंग शूटिंग के माध्यम से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि सोशल मीडिया के युग में उत्तराखंड की सुंदर वादियों का प्रचार-प्रसार भी बड़े स्तर पर होगा।

पर्यावरण और मूल स्वरूप का रखा जाएगा विशेष ध्यान
अक्सर देखा गया है कि विकास कार्यों के नाम पर प्राकृतिक स्थलों के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जाती है, लेकिन स्वर्गाश्रम नगर पंचायत ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है।

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अधिशासी अधिकारी दीपक कुमार ने स्पष्ट किया कि प्री-वेडिंग डेस्टिनेशन के विकास के दौरान किसी भी तरह का पक्का निर्माण (Construction) नहीं किया जाएगा। गंगा तट की मर्यादा और पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोपरि है। यहाँ केवल अस्थायी सजावट (Temporary Decoration) की अनुमति होगी, जिससे गंगा की धारा या तट के पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान न पहुँचे। इसके अलावा, यहाँ शूटिंग करने वालों के लिए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कड़े नियम लागू किए जाएंगे।

लोक संस्कृति की झलक और सेल्फी प्वाइंट्स

इस प्रोजेक्ट का एक और मुख्य आकर्षण यहाँ विकसित होने वाला ‘सेल्फी प्वाइंट’ होगा। सभासद जितेंद्र सिंह धाकड़ के अनुसार, इस स्थल को उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति (Folk Culture) के आधार पर डिजाइन किया जाएगा। यहाँ राज्य की पारंपरिक वेशभूषा, वाद्य यंत्रों और कलाकृतियों के चित्र लगाए जाएंगे। इससे पर्यटक न केवल अपनी यादें कैमरों में कैद करेंगे, बल्कि वे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को भी अपने साथ ले जाएंगे।

स्वर्गाश्रम: योग, ध्यान और अब ‘वेडिंग हब’

नगर पंचायत अध्यक्ष बिंदिया अग्रवाल ने इस योजना पर खुशी जताते हुए कहा, “स्वर्गाश्रम पहले से ही योग और परमार्थ निकेतन की गंगा आरती के लिए विख्यात है। यहाँ आने वाले पर्यटकों को एक विशेष शांति का अनुभव होता है। हमारा प्रयास है कि प्री-वेडिंग डेस्टिनेशन के जरिए हम इस सुंदरता को नई पीढ़ी तक पहुँचाएं। शूटिंग के लिए आने वाले जोड़ों को उत्तराखंड की लोक संस्कृति से जुड़ी विशेष स्मृतियाँ (Souvenirs) भी भेंट की जाएंगी।”

पर्यटन और रोजगार की नई उम्मीदें

विशेषज्ञों का मानना है कि ऋषिकेश और स्वर्गाश्रम को प्री-वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में प्रमोट करने से स्थानीय रोजगार में भी वृद्धि होगी। फोटोग्राफर्स, इवेंट प्लानर्स, टैक्सी ऑपरेटर्स और स्थानीय हस्तशिल्प व्यापारियों के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
निष्कर्ष: उत्तराखंड सरकार लगातार ‘वेडिंग टूरिज्म’ को बढ़ावा देने की बात करती रही है। ऐसे में स्वर्गाश्रम नगर पंचायत की यह पहल इस दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी। बिना प्रकृति को नुकसान पहुँचाए, गंगा के पावन तट पर शुरू होने वाली यह योजना स्वर्गाश्रम के पर्यटन इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगी।

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