यरूशलेम/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल कट्ज़ ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने ईरान के टॉप सिक्योरिटी चीफ और कद्दावर नेता अली लारीजानी को एक सटीक सैन्य कार्रवाई में मार गिराया है।
इस खबर के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है।
हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इस दावे पर कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन सामने नहीं आया है, लेकिन इजरायली मीडिया इस ऑपरेशन को इजरायल की अब तक की सबसे बड़ी खुफिया और सैन्य जीत बता रहा है।
कैसे दिया गया इस ऑपरेशन को अंजाम?
इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आईडीएफ ने एक खुफिया जानकारी के आधार पर अली लारीजानी के ठिकाने को निशाना बनाया। शुरुआती खबरों में केवल हमले की बात कही गई थी और लारीजानी की स्थिति को लेकर संशय बना हुआ था। लेकिन कुछ ही घंटों बाद इजरायली रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस हमले में लारीजानी की मौत हो चुकी है।
रक्षा मंत्री कट्ज़ ने इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए इसे इजरायल की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम बताया है। इजरायल का मानना है कि लारीजानी न केवल ईरान की सुरक्षा नीतियों के रणनीतिकार थे, बल्कि वे इजरायल के खिलाफ सक्रिय सशस्त्र समूहों के संचालन में भी अहम भूमिका निभा रहे थे।
ईरान की चुप्पी और ‘शहादत’ का संदेश
हैरान करने वाली बात यह है कि ईरान ने अब तक लारीजानी की मौत पर चुप्पी साध रखी है। हालांकि, यह घटना अली लारीजानी के उस कड़े संदेश के ठीक एक दिन बाद हुई है, जिसमें उन्होंने मुस्लिम जगत से एकजुट होने की अपील की थी।
अपनी मौत की खबर से ठीक पहले दिए गए संदेश में लारीजानी ने कहा था कि “अमेरिका और इजरायल के खिलाफ इस जंग में तेहरान अपने कदम पीछे नहीं खींचेगा।” उन्होंने मुस्लिम देशों द्वारा ईरान को अपेक्षित समर्थन न दिए जाने पर गहरा दुख और निराशा भी व्यक्त की थी।
लारीजानी का अंतिम बयान: “धोखे से हुआ हमला”
सोमवार को दिए गए अपने एक बयान में लारीजानी ने अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि जब ईरान बातचीत की मेज पर था, तब उस पर धोखे से हमला किया गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस अमेरिकी-इजरायली गठबंधन का एकमात्र मकसद ईरान को पूरी तरह तबाह करना है।
लारीजानी ने हाल ही में ईरान के कई नागरिकों और सैन्य कमांडरों की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें ‘इस्लामी क्रांति के महान आत्म-बलिदानी’ बताया था। अब उनके खुद के मारे जाने के दावे ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है।
कौन थे अली लारीजानी?
अली लारीजानी ईरान की राजनीति और सुरक्षा तंत्र का एक ऐसा नाम थे, जिनकी पकड़ तेहरान के सत्ता गलियारों में बहुत मजबूत मानी जाती थी।
- वे ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव रह चुके थे।
- वे कई वर्षों तक ईरान की संसद के अध्यक्ष रहे।
- उन्हें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का मुख्य वार्ताकार भी माना जाता था। अली लारीजानी को मार गिराने का इजरायली दावा यदि सच साबित होता है, तो यह जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ईरान के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत और रणनीतिक नुकसान होगा।
मुस्लिम जगत की बेरुखी पर जताई थी नाराजगी
अपनी मृत्यु से पूर्व के घटनाक्रमों में लारीजानी काफी आक्रामक नजर आ रहे थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बात पर अफसोस जताया था कि जब ईरान पर हमले हो रहे थे, तब मुस्लिम बहुल देशों ने उसे अकेला छोड़ दिया। उनका मानना था कि यह लड़ाई केवल ईरान की नहीं बल्कि पूरे इस्लामी जगत की है, जिसे इजरायल और पश्चिम मिलकर कमजोर कर रहे हैं।
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आगे क्या? युद्ध के मुहाने पर दुनिया
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद ईरान की प्रतिक्रिया बेहद उग्र हो सकती है।
- ईरान का पलटवार: क्या ईरान सीधे तौर पर इजरायल पर मिसाइल हमला करेगा?
- प्रॉक्सि वॉर: क्या लेबनान (हिजबुल्लाह) और यमन (हुती) के जरिए इजरायल पर हमले तेज होंगे?
- अमेरिका की भूमिका: अगर तेहरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो क्या अमेरिका सीधे युद्ध में कूदेगा?
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें तेहरान के उस आधिकारिक बयान पर टिकी हैं, जो अली लारीजानी की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करेगा। यदि यह दावा सही निकलता है, तो मध्य पूर्व में एक नया और विनाशकारी मोर्चा खुलना लगभग तय है।











