देहरादून |
उत्तराखंड की पर्यटन राजधानी मसूरी जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। आने वाले समय में देहरादून से मसूरी की दूरी तय करने में घंटों का समय नहीं, बल्कि मात्र 30 मिनट लगेंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की प्रतिबद्धता के बाद, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने प्रस्तावित झाझरा-मसूरी टू-लेन मार्ग पर काम की गति तेज कर दी है। इस नए मार्ग के बनने से मसूरी जाने के लिए कुल तीन विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
तीन मार्गों से होगा मसूरी का सफर
वर्तमान में देहरादून से मसूरी जाने के लिए मुख्य रूप से राजपुर रोड का ही सहारा लिया जाता है, जिससे पीक सीजन में भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। लेकिन भविष्य में यातायात तीन अलग-अलग रास्तों में बंट जाएगा:
- राजपुर रोड (पारंपरिक मार्ग): यह सबसे पुराना रूट है जो देहरादून शहर के बीच से होकर कुठालगेट के रास्ते मसूरी पहुंचता है। वर्तमान में 90% ट्रैफिक इसी रास्ते पर निर्भर है।
- किमाड़ी मार्ग (वैकल्पिक रास्ता): यह मार्ग शांतिपूर्ण है और भीड़ से बचने के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन मानसून के दौरान भूस्खलन के कारण यह अक्सर बंद हो जाता है, जिससे यह ‘ऑल-वेदर’ विकल्प नहीं बन पाया है।
- झाझरा-मसूरी टू-लेन हाईवे (नया कॉरिडोर): यह प्रस्तावित मार्ग भविष्य का मुख्य कॉरिडोर होगा। यह देहरादून शहर के बाहर से ट्रैफिक को सीधे मसूरी पहुंचाएगा, जिससे यात्रियों को शहर के भीतर घुसने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
झाझरा-मसूरी हाईवे: क्यों है यह खास?
लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 42 किलोमीटर लंबा हाईवे आधुनिक इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना होगा। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसमें बनने वाली दो विशाल सुरंगें हैं:
- जार्ज एवरेस्ट सुरंग: जार्ज एवरेस्ट के नीचे 2.9 किमी लंबी सुरंग बनाई जाएगी।
- मसूरी हिल सेक्शन सुरंग: शहर के करीब पहुंचने के लिए 2 किमी की एक और सुरंग का निर्माण होगा।
ये सुरंगें न केवल यात्रा की दूरी को कम करेंगी, बल्कि पहाड़ों की घुमावदार चढ़ाई को सुरक्षित और तेज बना देंगी। NHAI के परियोजना निदेशक सौरभ सिंह के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की सभी औपचारिक प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं और जल्द ही धरातल पर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
देहरादून शहर को मिलेगी ‘जाम’ से संजीवनी
अक्सर देखा जाता है कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से आने वाले पर्यटक देहरादून शहर के भीतर से होकर मसूरी जाते हैं। इससे राजपुर रोड और चकराता रोड पर जाम की स्थिति बनी रहती है।
- ट्रैफिक डायवर्जन: नया मार्ग बनने से बाहरी ट्रैफिक सीधे झाझरा से डायवर्ट हो जाएगा।
- स्थानीय राहत: शहर के स्थानीय निवासियों को रोजाना के ट्रैफिक नरक से मुक्ति मिलेगी।
- गंगोत्री-उत्तरकाशी का नया लिंक: यह हाईवे आगे जाकर उत्तरकाशी और गंगोत्री रूट से भी जुड़ेगा, जिससे चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी सुगम रास्ता मिलेगा।
सुरक्षा और भू-वैज्ञानिक सर्वे पर जोर
हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए, वाडिया हिमालयी भू-विज्ञान संस्थान इस पूरे रूट का विस्तृत भू-वैज्ञानिक सर्वे कर रहा है। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले मिट्टी की मजबूती, चट्टानों की संरचना और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों (Landslide zones) की गहन जांच की जा रही है। विशेषकर गलोगी क्षेत्र जैसे ‘बॉटलनेक’ पॉइंट्स को ध्यान में रखते हुए डिजाइन तैयार किया गया है
बढ़ते पर्यटन के भार को झेलने की तैयारी
मसूरी पर पर्यटकों का दबाव साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- वर्ष 2000 में यहाँ लगभग 8.5 लाख पर्यटक आते थे।
- 2019 में यह संख्या बढ़कर 30.2 लाख तक पहुंच गई।
- 2025 में भी यह आंकड़ा 21 लाख के पार रहा है।
इतने बड़े पैमाने पर पर्यटकों की आवाजाही के लिए मौजूदा सड़कें पर्याप्त नहीं हैं। नया हाईवे न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगा।
निष्कर्ष
झाझरा-मसूरी टू-लेन मार्ग उत्तराखंड के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। 30 मिनट की यह सुखद यात्रा मसूरी को विश्व स्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाने में मदद करेगी। अब पर्यटकों को जाम में फंसकर घंटों बर्बाद नहीं करने होंगे, और वे सीधे हिमालय की गोद में पहुंच सकेंगे।






