अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

देहरादून में अवैध मदरसों पर कसता शिकंजा: बाहरी बच्चों को ‘कट्टर’ बनाने की आशंका, 35 संस्थानों की फाइलें दोबारा खुलीं

On: April 17, 2026 9:31 AM
Follow Us:
देहरादून के एक मदरसे में जांच करते सरकारी अधिकारी और बैठे हुए छात्र।

​देहरादून |

​उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अवैध रूप से संचालित हो रहे मदरसों को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सवा साल पहले जिले में अवैध पाए गए 35 मदरसों की फाइलें एक बार फिर खोल दी गई हैं। इस कार्रवाई के पीछे सबसे बड़ी वजह बाहरी राज्यों से बच्चों को लाकर उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेलने की आशंका जताई जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद अब प्रशासन इन संस्थानों के कामकाज, फंडिंग और वहां रह रहे छात्रों की गहनता से जांच कर रहा है।

​35 मदरसों पर लटकी तलवार, 3000 छात्रों का भविष्य अधर में

​जनवरी 2025 में जिला प्रशासन द्वारा की गई एक व्यापक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि देहरादून जिले में संचालित कुल 90 मदरसों में से 35 ऐसे हैं, जिनका उत्तराखंड मदरसा बोर्ड में कोई पंजीकरण नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, इन अपंजीकृत मदरसों में 3,000 से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे थे।

​शासन को संदेह है कि इन अवैध संस्थानों में न केवल नियमों की अनदेखी की जा रही है, बल्कि अन्य राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल) से बच्चों को लाकर उन्हें संदिग्ध गतिविधियों और कट्टरता की शिक्षा दी जा रही है। इसी के चलते शासन ने अब “डेमोग्राफिक चेंज” और सुरक्षा कारणों के मद्देनजर अलग से जांच के आदेश दिए हैं।

​तहसीलवार स्थिति: विकासनगर बना मुख्य केंद्र

​जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा उपजिलाधिकारियों (SDMs) से तलब की गई रिपोर्ट में मदरसों की जो स्थिति सामने आई है, वह चिंताजनक है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में अवैध मदरसों का जाल इस प्रकार फैला है:

  • ​विकासनगर: यहाँ सबसे अधिक 60 मदरसे संचालित हैं, जिनमें से 18 का पंजीकरण नहीं है। यहाँ छात्रों की संख्या भी सर्वाधिक (6031) है।
  • ​देहरादून सदर: 23 मदरसों में से 10 बिना पंजीकरण के चल रहे हैं, जहाँ 2750 छात्र पढ़ रहे हैं।
  • ​डोईवाला: यहाँ स्थिति और भी गंभीर है; यहाँ के सभी 6 मदरसे अपंजीकृत पाए गए।
  • ​कालसी: यहाँ एक मदरसा संचालित है और वह भी बिना पंजीकरण के चल रहा है।

​कुल मिलाकर जिले के 90 मदरसों में 9,720 छात्र नामांकित हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा उन संस्थानों में है जिनकी कोई आधिकारिक मान्यता ही नहीं है।

​सुविधाओं का अभाव और ‘आवासीय’ होने पर संदेह

​प्रशासनिक जांच में केवल पंजीकरण की ही कमी नहीं पाई गई, बल्कि इन संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं का भी भारी अभाव दिखा। कई मदरसों में खेल सामग्री, पर्याप्त पुस्तकालय और बैठने के उचित संसाधन तक नहीं थे।

​सबसे गंभीर मुद्दा इन मदरसों का ‘आवासीय’ स्वरूप है। रिपोर्ट के अनुसार, कई मदरसे हॉस्टल की तरह चल रहे हैं जहाँ बाहरी राज्यों के बच्चे रह रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन बच्चों को यहाँ लाने का स्रोत क्या है, इनके अभिभावकों की लिखित सहमति है या नहीं, और इनके दाखिले की प्रक्रिया क्या रही—इन सभी बिंदुओं पर अब विस्तृत ‘सत्यापन’ (Verification) किया जाएगा।

​सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद एक्शन

​हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ था, जिसमें बाहरी राज्यों के बच्चों को उत्तराखंड के मदरसों में लाने और उन्हें कट्टरपंथी बनाए जाने का दावा किया गया था। इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए धामी सरकार ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। सरकार ने केवल देहरादून ही नहीं, बल्कि हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल जैसे सीमावर्ती जिलों में भी व्यापक सत्यापन अभियान चलाने को कहा है।

​शासन का रुख स्पष्ट है: “यदि किसी भी संस्थान में नियमों का उल्लंघन पाया गया, या बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर उन्हें गलत दिशा में ले जाने की पुष्टि हुई, तो उन संस्थानों को तत्काल सील कर उनके संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

ये भी पढ़े➜एशिया के रईसों की जंग: गौतम अदाणी ने फिर छीना मुकेश अंबानी से ताज, जानें कैसे पलटी अरबपतियों की बाजी

​आगे की राह और प्रशासन की तैयारी

​जिलाधिकारी ने साफ कर दिया है कि जिले के सभी उपजिलाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में फिर से इन 35 अवैध मदरसों का भौतिक सत्यापन करेंगे। इस बार जांच के दायरे में निम्नलिखित बिंदु प्रमुख रहेंगे:

  • ​पंजीकरण की स्थिति: क्या पिछले एक साल में किसी ने नवीनीकरण कराया?
  • ​छात्रों का डेटा: बाहरी राज्यों के बच्चों का आधार कार्ड और स्थायी पता।
  • ​फंडिंग का स्रोत: इन मदरसों को चलाने के लिए धन कहाँ से आ रहा है?
  • ​पाठ्यक्रम: क्या यहाँ केवल धार्मिक शिक्षा दी जा रही है या आधुनिक शिक्षा भी शामिल है?

​उत्तराखंड सरकार का यह कदम राज्य की सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस जांच रिपोर्ट के बाद कितने अवैध संस्थानों पर ताले लटकते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Rampur Tiraha Kand 32nd anniversary as CM Pushkar Singh Dhami pays tribute to Uttarakhand movement martyrs

Rampur Tiraha Kand: 32वीं बरसी पर सीएम धामी ने शहीदों को किया नमन, बोले- शहीदों के सपनों का बनाएंगे उत्तराखंड

​Roorkee Accident News: मलकपुर चुंगी पर नशे में धुत कार चालक ने मचाया तांडव, 5 लोग गंभीर रूप से घायल

​Uttarakhand Statehood Martyrs: देहरादून में सीएम धामी ने राज्य आंदोलनकारी शहीदों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

​DBS College Student Clash: देहरादून के डीबीएस कॉलेज में छात्र गुटों की तकरार, कमरे में घुसकर मारपीट और अपहरण का आरोप

​”महा वीकेंड” पर पर्यटकों की भारी भीड़ से मसूरी पैक: लंबा जाम लगा, देहरादून पुलिस ने जारी किया Mussoorie Traffic Plan

​Lucknow Murder Case: 17 साल के नाबालिग ने रिंच से वार कर ली मां की जान, फिर पुलिस को कॉल कर बोला- ‘मर्डर कर दिया है, आ जाओ’

Leave a Comment