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नैनीताल में सनसनी: कलेक्ट्रेट पार्किंग में अधिवक्ता ने खुद को मारी गोली, सुसाइड नोट में पत्नी के लिए लिखी भावुक बात

On: April 27, 2026 9:50 AM
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नैनीताल कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस जांच और खड़ी कार

​नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर और न्यायिक जगत को स्तब्ध कर दिया है। सोमवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर की पार्किंग में एक वरिष्ठ अधिवक्ता का शव उनकी अपनी ही कार के भीतर खून से लथपथ मिला। प्राथमिक जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। मृतक अधिवक्ता के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने अपनी गंभीर बीमारी का जिक्र करते हुए अपनी पत्नी का ख्याल रखने की भावुक अपील की है।

​पार्किंग में खून से सनी कार देख उड़े होश

​जानकारी के अनुसार, सोमवार को नैनीताल कलेक्ट्रेट और जिला न्यायालय परिसर में कामकाज सामान्य रूप से चल रहा था। अधिवक्ता और कर्मचारी अपने-अपने कार्यों में व्यस्त थे। इसी बीच करीब 11:30 बजे जब कुछ अधिवक्ता पार्किंग क्षेत्र से गुजर रहे थे, तो उनकी नजर एक खड़ी कार पर पड़ी। कार के भीतर लॉन्ग व्यू कंपाउंड निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी बेसुध पड़े थे और उनका शरीर खून से लथपथ था।

​पास जाकर देखने पर अधिवक्ताओं के होश उड़ गए क्योंकि उनके हाथ में एक पिस्टल भी मौजूद थी। देखते ही देखते कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया और भारी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।

​सुसाइड नोट में छलका बीमारी का दर्द

​सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। पुलिस को वाहन के बोनट पर एक सुसाइड नोट रखा हुआ मिला। सुसाइड नोट में अधिवक्ता ने अपनी इस जानलेवा कदम के पीछे का कारण अपनी लगातार खराब सेहत और बीमारी को बताया है। नोट में उन्होंने लिखा है कि वह अपनी बीमारी से काफी परेशान हो चुके थे और अब इसे सहन नहीं कर पा रहे थे।
​नोट का सबसे मार्मिक हिस्सा वह था जहाँ उन्होंने अपनी पत्नी के लिए लिखा। अधिवक्ता ने सुसाइड नोट में परिजनों और परिचितों से अनुरोध किया कि “मेरी पत्नी का ध्यान रखना।” इस अंतिम संदेश ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों को नम कर दिया।

​मिलनसार स्वभाव के थे अधिवक्ता भाकुनी

​अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी के इस आत्मघाती कदम ने कानूनी बिरादरी को गहरा सदमा दिया है। बार एसोसिएशन से जुड़े उनके सहयोगियों का कहना है कि भाकुनी बेहद मिलनसार, मृदुभाषी और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वह मानसिक रूप से इतने बड़े दबाव से गुजर रहे हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में चर्चा थी कि वह हमेशा दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहते थे, ऐसे में उनका इस तरह चले जाना सभी के लिए अपूरणीय क्षति है।

​पुलिस की कार्रवाई और जांच

​पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हालांकि मामला प्रथम दृष्टया आत्महत्या का लग रहा है और सुसाइड नोट में बीमारी का जिक्र है, लेकिन फिर भी हर पहलू से जांच की जा रही है।

​पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जिस पिस्टल का इस्तेमाल किया गया, वह लाइसेंसी थी या नहीं और घटना के समय वहां आसपास कोई मौजूद था या नहीं। घटनास्थल को फिलहाल सील कर दिया गया है।

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​न्यायिक कार्यों में छाया शोक

​इस घटना के बाद कलेक्ट्रेट और जिला न्यायालय परिसर में शोक की लहर दौड़ गई। कई अधिवक्ताओं ने इस दुखद समाचार के बाद खुद को न्यायिक कार्यों से अलग रखा। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने भी अधिवक्ता के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

​संपादकीय दृष्टिकोण: मानसिक स्वास्थ्य और बीमारी का दबाव

​यह घटना एक बार फिर समाज में मानसिक स्वास्थ्य और लंबी बीमारी से जूझ रहे व्यक्तियों की काउंसलिंग की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करती है। अक्सर शारीरिक कष्ट व्यक्ति को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ देते हैं कि वह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो जाता है। ऐसे समय में परिवार और मित्रों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।

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