देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बेलगाम दौड़ते भारी वाहनों ने एक और हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन ली हैं। बुधवार सुबह शहर के व्यस्ततम इलाकों में शुमार कांवली रोड पर एक तेज रफ्तार ट्रक ने एक निर्दोष मजदूर को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद मौके पर ही मजदूर ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद स्थानीय निवासियों और श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। उग्र भीड़ ने सड़क पर टायर जलाकर घंटों प्रदर्शन किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सुबह काम पर निकले मजदूर की घर वापसी नहीं हुई
जानकारी के अनुसार, गांधीग्राम क्षेत्र के रहने वाले 50 वर्षीय सकल सिंह साहनी मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। बुधवार सुबह भी वह रोज की तरह अपने घर से काम की तलाश में निकले थे। वह अभी बल्लीवाला चौक से कुछ ही दूरी पर पहुंचे थे कि पीछे से काल बनकर आए एक बेकाबू ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रक की रफ्तार इतनी अधिक थी कि चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और सकल सिंह ट्रक के पिछले पहियों की चपेट में आ गए। हादसे में उनके सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से पर गंभीर चोटें आईं, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
हादसे के बाद ट्रक चालक फरार, मची अफरा-तफरी
दुर्घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। खौफनाक मंजर देख आसपास के लोग सहम गए। चालक ने ट्रक रोकने के बजाय भागने की कोशिश की, जिस दौरान ट्रक आगे जाकर एक लोडर वाहन से भी टकरा गया। खुद को घिरता देख चालक ट्रक को सड़क के बीचों-बीच छोड़कर मौके से फरार हो गया। हादसे की सूचना जैसे ही गांधीग्राम और आसपास के श्रमिकों को मिली, बड़ी संख्या में लोग कांवली रोड पर जमा हो गए।
आक्रोशित भीड़ का हंगामा: घंटों बाधित रहा यातायात
मजदूर की मौत से गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आक्रोशित भीड़ ने पुलिस को शव उठाने से रोक दिया और सड़क के बीचों-बीच पुराने टायर रखकर उनमें आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि शहर के भीतर भारी वाहनों की एंट्री और उनकी बेलगाम रफ्तार पर कोई रोक-टोक नहीं है।
हंगामे के कारण कांवली रोड और बल्लीवाला चौक के आसपास लंबा जाम लग गया। कई एम्बुलेंस और स्कूली बसें भी जाम में फंसी नजर आईं। सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन लोग ट्रक मालिक की गिरफ्तारी और मुआवजे की मांग पर अड़े रहे।
स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप: “मौत की सड़क” बनता कांवली रोड
प्रदर्शन में शामिल स्थानीय श्रमिकों और निवासियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि:
- कांवली रोड और आसपास के क्षेत्रों में भारी डंपर और ट्रक निर्धारित समय सीमा के बाद भी तेजी से दौड़ते हैं।
- घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इन वाहनों की रफ्तार पर अंकुश लगाने के लिए कोई स्पीड ब्रेकर या पुलिस चेकपोस्ट सक्रिय नहीं है।
- कई बार शिकायत करने के बावजूद यातायात पुलिस द्वारा ओवरस्पीडिंग करने वाले भारी वाहनों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
कई घंटों की मशक्कत और आश्वासन के बाद पुलिस ने भीड़ को शांत कराया और मृतक सकल सिंह साहनी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ट्रक को जब्त कर लिया गया है और फरार चालक की तलाश के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
कोतवाली पुलिस के अनुसार:
”हादसा बेहद दुखद है। ट्रक को कब्जे में लेकर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। फरार चालक की पहचान की जा रही है और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यातायात व्यवस्था को सुचारू करने के लिए क्षेत्र में भारी वाहनों के समय पर सख्ती से निगरानी की जाएगी।”
निष्कर्ष: सिस्टम पर उठते सवाल
देहरादून में लगातार बढ़ते सड़क हादसों ने स्मार्ट सिटी के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। एक गरीब मजदूर की मौत ने फिर से यह बहस छेड़ दी है कि क्या शहर की सड़कों पर इंसानी जान की कीमत भारी वाहनों के मुनाफे से कम है? जब तक यातायात नियमों का सख्ती से पालन नहीं होगा और बेकाबू वाहनों पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक ऐसे ‘सकल सिंह’ काल के गाल में समाते रहेंगे।
मृतक के परिवार में अब मातम छाया हुआ है। उनके पीछे पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, जिनके सिर से घर के एकमात्र कमाने वाले का साया हमेशा के लिए उठ गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस घटना से सबक लेकर क्या ठोस कदम उठाता है।





