चंपावत (उत्तराखंड): देवभूमि उत्तराखंड के चंपावत जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने समाज और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक 10वीं की छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) की रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात को अंजाम दिया गया। आरोपियों ने न केवल मासूम के साथ दरिंदगी की, बल्कि उसके हाथ-पैर बांधकर उसे निर्वस्त्र हालत में एक कमरे में बंद कर दिया। इस मामले में पुलिस ने भाजपा मंडल उपाध्यक्ष समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
सहेली की मेहंदी रस्म में गई थी छात्रा
पीड़िता, जो चंपावत में एक दुकान पर आइसक्रीम बेचकर अपने बीमार और बुजुर्ग पिता का सहारा बनी हुई थी, मंगलवार को एक सहेली की मेहंदी रस्म में शामिल होने के लिए सल्ली गांव गई थी।
पीड़िता के पिता के अनुसार, दोपहर ढाई बजे तक जब वह घर नहीं लौटी, तो उन्होंने फोन किया। छात्रा ने बताया कि वह सहेली के घर है। लेकिन रात करीब डेढ़ बजे उसके फोन से एक कॉल आई और फिर फोन बंद हो गया, जिससे पिता को अनहोनी की आशंका हुई।
दरिंदगी की पराकाष्ठा: हाथ-पैर बांधकर कमरे में किया कैद
ग्रामीणों की सूचना पर जब पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया, तो छात्रा एक बंद कमरे में अत्यंत दयनीय स्थिति में मिली। आरोपियों ने उसके हाथ-पैर रस्सी से बांध रखे थे और वह निर्वस्त्र थी। पीड़िता ने बताया कि आरोपियों ने उसका फोन छीन लिया और विरोध करने पर उसके साथ बुरी तरह मारपीट की। दरिंदगी करने के बाद आरोपी कमरे में ताला लगाकर फरार हो गए थे।
भाजपा पदाधिकारी समेत तीन नामजद
पुलिस ने पीड़िता के बयान और तहरीर के आधार पर तीन आरोपियों के खिलाफ पोक्सो (POCSO) और बीएनएस (BNS) की संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया है:
- पूरन सिंह रावत: जो क्षेत्र का पूर्व प्रधान है और वर्तमान में भाजपा का मंडल उपाध्यक्ष बताया जा रहा है।
- नवीन सिंह: जो डेयरी का काम करता है।
- विनोद सिंह रावत: जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।
कोतवाली बना अखाड़ा, भारी तनाव
इस घटना के बाद चंपावत में भारी जन आक्रोश है। बुधवार सुबह जब पीड़ित पक्ष की मदद कर रहे पूर्व मंडल अध्यक्ष कमल रावत कोतवाली पहुंचे, तो आरोपी पक्ष के करीब 8-10 लोगों ने कोतवाली के भीतर ही उन पर हमला कर दिया। पुलिस के सामने ही हुई इस मारपीट और गाली-गलौज से कोतवाली परिसर अखाड़े में तब्दील हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी।
पिता की इकलौती उम्मीद थी पीड़िता
पीड़ित पिता की कहानी भी अत्यंत मार्मिक है। 52 वर्ष की आयु में उन्हें संतान सुख मिला था, लेकिन बेटी के जन्म के 6 महीने बाद ही पत्नी का देहांत हो गया। उन्होंने मेहनत-मजदूरी कर अपनी इकलौती बेटी को पाला, जो अब खुद काम करके अपने 70 वर्षीय बीमार पिता का इलाज करा रही थी। घटना के बाद से बुजुर्ग पिता गहरे सदमे में हैं और अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
पुलिस प्रशासन का पक्ष
चंपावत की पुलिस अधीक्षक (SP) रेखा यादव ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल फील्ड यूनिट को साक्ष्य जुटाने के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा:
”हमने आरोपियों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 70(2), 127(2), 351(2) और पोक्सो अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत कर लिया है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और काउंसलिंग कराई जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, जल्द ही उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”
निष्कर्ष
यह घटना न केवल सुरक्षा के दावों की पोल खोलती है, बल्कि सत्ता और रसूख के नशे में चूर अपराधियों के दुस्साहस को भी दर्शाती है। अब सबकी नजरें पुलिस की कार्रवाई और पीड़िता को मिलने वाले न्याय पर टिकी हैं।





