खड़गपुर (पश्चिम बंगाल)। देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई उपलब्धि नहीं बल्कि एक मेधावी छात्र की रहस्यमयी मौत है। शनिवार सुबह कैंपस के अटल बिहारी वाजपेयी हॉल के सामने गुजरात के अहमदाबाद निवासी 21 वर्षीय छात्र जयवीर सिंह डोरिया का खून से लथपथ शव मिलने से हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच में अंदेशा जताया जा रहा है कि छात्र ने आठ मंजिला इमारत से कूदकर जान दी है।
सुबह-सुबह कैंपस में पसरा सन्नाटा
जानकारी के अनुसार, जयवीर सिंह डोरिया आईआईटी खड़गपुर में मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग के तृतीय वर्ष का छात्र था। शनिवार तड़के कैंपस के सुरक्षा गार्डों ने अटल बिहारी वाजपेयी हॉल के पास एक युवक को लहूलुहान स्थिति में जमीन पर पड़ा देखा। उन्होंने तुरंत संस्थान के अधिकारियों और हिजली चौकी की पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने आनन-फानन में छात्र को कैंपस के ही बीसी रॉय अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आत्महत्या या कुछ और? पुलिस जांच में जुटी
पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक साक्ष्यों को देखकर यह मामला आत्महत्या का लग रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि जयवीर ने इमारत की आठवीं मंजिल से छलांग लगाई होगी। हालांकि, मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद हुआ है या नहीं, इस पर पुलिस ने अभी चुप्पी साध रखी है। पश्चिम मेदिनीपुर जिले की पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम (ऑटोप्सी) के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।
16 महीनों में 8 मौतें: आखिर क्या है वजह?
आईआईटी खड़गपुर में पिछले कुछ समय से जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, वे डराने वाली हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 16 महीनों के भीतर इस संस्थान में यह 8वीं संदिग्ध मौत है।
- इन 8 में से 7 छात्रों की मौत कैंपस के भीतर ही हुई है।
- मरने वालों में छात्र और शोधार्थी (Researchers) दोनों शामिल हैं।
- पांच मामलों में छात्रों के शव फंदे से लटके हुए पाए गए थे।
लगातार हो रही इन मौतों ने संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। आखिर देश के सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा को पास कर यहाँ पहुँचने वाले ‘प्रतिभाशाली’ छात्र ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठा रहे हैं?
संस्थान की व्यवस्थाओं पर सवाल
आईआईटी खड़गपुर प्रशासन का दावा है कि कैंपस में छात्रों के लिए काउंसलिंग की बेहतर सुविधा मौजूद है और डिप्रेशन (अवसाद) को रोकने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं। लेकिन धरातल पर ये योजनाएं विफल साबित होती दिख रही हैं। जयवीर की मौत के बाद संस्थान के अधिकारियों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जिससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी रोष और अनिश्चितता का माहौल है।
अहमदाबाद में शोक की लहर
जयवीर के परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है। अहमदाबाद में रहने वाले उसके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक होनहार बेटा जो इंजीनियर बनकर परिवार का नाम रोशन करने का सपना लेकर बंगाल गया था, उसकी इस तरह घर वापसी होगी, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। सहपाठियों का कहना है कि जयवीर पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से वह शांत रहता था या नहीं, इस पर पुलिस सहपाठियों से पूछताछ कर रही है।
विशेषज्ञों की राय: पढ़ाई का दबाव या अकेलापन?
शिक्षाविदों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि आईआईटी जैसे संस्थानों में पढ़ाई का अत्यधिक बोझ, प्लेसमेंट की चिंता और घर से दूर रहने का अकेलापन छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर कर देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल काउंसलिंग सेंटर खोल देना काफी नहीं है, बल्कि एक ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जहां छात्र बिना किसी डर के अपनी समस्याओं को साझा कर सकें।
निष्कर्ष
जयवीर सिंह डोरिया की मौत केवल एक पुलिस केस नहीं है, बल्कि यह देश के शीर्ष संस्थानों की कार्यप्रणाली के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। क्या हम सिर्फ इंजीनियर बना रहे हैं या हम उन्हें जीवन की चुनौतियों से लड़ना भी सिखा पा रहे हैं? जब तक इन सवालों के जवाब नहीं तलाशे जाएंगे, तब तक कैंपस में ऐसी दुखद घटनाओं का सिलसिला रोकना मुश्किल होगा।








