अंकिता भंडारी केस से जुड़े विवाद में पूर्व विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार; कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर भेजा जेल - Doonprimenews
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अंकिता भंडारी केस से जुड़े विवाद में पूर्व विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार; कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर भेजा जेल

On: June 15, 2026 10:08 AM
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​देहरादून।

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले से जुड़े एक नए और बेहद संवेदनशील विवाद में ज्वालापुर सीट से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। देहरादून की डालनवाला पुलिस द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूर्व विधायक को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां उनके वकीलों की ओर से दाखिल की गई जमानत अर्जी को अदालत ने नामंजूर कर दिया।

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​इस हाई-प्रोफाइल मामले में सुरेश राठौर के साथ-साथ एक अन्य सह-आरोपी उर्मिला सनावर के खिलाफ भी शिकंजा पूरी तरह कस चुका है। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ जबरन वसूली और ब्लैकमेलिंग (एक्सटॉर्शन) की कड़ी धाराएं जोड़ दी हैं, जिससे उनकी कानूनी राह बेहद कठिन हो गई है।

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​कई थानों में दर्ज हैं मुकदमे, सोशल मीडिया पर फैलाया गया था जाल


​सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर की मुश्किलें केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन दोनों आरोपियों के खिलाफ उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों में कानून का डंडा चला है। हरिद्वार के झबरेड़ा और बहादराबाद थानों के साथ-साथ देहरादून के नेहरू कॉलोनी और डालनवाला थानों में भी इन दोनों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं।


​आरोप है कि दोनों ने मिलीभगत कर सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ऐसे ऑडियो और वीडियो क्लिप्स वायरल किए थे, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई शीर्ष और कद्दावर नेताओं के संबंध में बेहद आपत्तिजनक, भ्रामक और छवि धूमिल करने वाली सामग्री प्रसारित की गई थी।

इन वीडियोज में अंकिता भंडारी हत्याकांड का संदर्भ लेते हुए नेताओं पर बेबुनियाद आरोप मढ़े गए थे। शिकायतकर्ताओं का साफ तौर पर कहना है कि इस सोची-समझी साजिश के तहत किए गए कृत्य से न केवल सार्वजनिक रूप से उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि को अपूरणीय क्षति पहुंची है, बल्कि पार्टी की साख पर भी बट्टा लगाने का प्रयास किया गया। इसी आधार पर विभिन्न नेताओं और समर्थकों ने कई थानों में कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।


​राजनीतिक रसूख और पद पाने के लिए ‘रंगदारी’ का खेल


​मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस ने जब तकनीकी और जमीनी साक्ष्यों को खंगाला, तो इस पूरे खेल के पीछे एक बड़ी राजनीतिक और आर्थिक साजिश की बू आई। न्यायालय में आरोपियों की कस्टडी और रिमांड के लिए पेश की गई दलीलों में पुलिस ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।


​पुलिस के अनुसार, पूर्व विधायक सुरेश राठौर का मुख्य मकसद पार्टी से अपने निष्कासन को समाप्त करवाना और संगठन के भीतर दोबारा कोई बड़ा और रसूखदार पद हासिल करना था। इसी राजनैतिक लालसा और दबाव बनाने की रणनीति के तहत इस पूरी साजिश को रचा गया। पुलिस ने अदालत को बताया कि यह केवल कोई सामान्य वीडियो शेयरिंग या अभिव्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे सीधे तौर पर ‘एक्सटॉर्शन’ (जबरन वसूली और दबाव बनाने) की आपराधिक मंशा साफ झलकती है।


​पुलिस की मजबूत दलील: वीडियो में नाम लेना और रिकॉर्डिंग करना सोची-समझी साजिश


​अदालत के समक्ष पूर्व विधायक के वकीलों ने उन्हें राहत देने और जमानत पर रिहा करने की पुरजोर पैरवी की, लेकिन सरकारी वकील और पुलिस की दलीलों के आगे उनकी एक न चली। पुलिस ने न्यायालय के सामने अकाट्य तर्क पेश करते हुए कहा कि अगर पूर्व विधायक और उनकी सहयोगी की मंशा साफ होती या वे केवल किसी जानकारी को साझा कर रहे होते, तो वे इसे इस तरह सुनियोजित रूप से अंजाम नहीं देते।


​पुलिस ने दलील दी कि वायरल किए गए वीडियो में बाकायदा नेताओं के नाम लिए गए हैं, पूरी बातचीत को एक खास एजेंडे के तहत रिकॉर्ड किया गया और फिर उसे बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया पर वायरल कराया गया। यदि इसके पीछे ब्लैकमेलिंग या दबाव बनाकर एक्सटॉर्शन करने की मंशा नहीं थी, तो इस तरह नाम लेकर रिकॉर्डिंग करने और उसे जानबूझकर पब्लिक डोमेन में वायरल करने का कोई दूसरा तार्किक कारण नजर नहीं आता। इस मजबूत दलील और जांच अधिकारियों द्वारा सौंपे गए डिजिटल साक्ष्यों को देखते हुए माननीय न्यायालय ने पूर्व विधायक को कतई राहत देने से इनकार कर दिया और उनकी जमानत अर्जी को खारिज करते हुए सीधे सलाखों के पीछे भेज दिया।


​राजनीतिक गलियारों में मंचा हड़कंप, जांच जारी


​भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की इस तरह हुई अचानक गिरफ्तारी और फिर कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज कर जेल भेजे जाने की इस घटना ने उत्तराखंड के सियासी और सामाजिक गलियारों में भारी हड़कंप मचा दिया है।

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अंकिता भंडारी हत्याकांड पहले से ही राज्य का एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा रहा है, ऐसे में इस मामले की आड़ में राजनीतिक रोटियां सेकने और ब्लैकमेलिंग के इस नए मोड़ ने पुलिस प्रशासन को भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर ला दिया है।


​डालनवाला और नेहरू कॉलोनी पुलिस अब इस मामले से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं, डिजिटल फुटप्रिंट्स और इसमें शामिल संभावित अन्य चेहरों की भी तलाश कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फॉरेंसिक जांच की मदद से उन कड़ियों को जोड़ा जा रहा है, जिन्होंने इस भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री को वायरल करने में मदद की थी। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

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