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बड़ी खबर सर्दी के मौसम में वन्यजीवों के शिकार की आशंका बढ़ने को देखते हुए वन विभाग ने कालसी वन प्रभाग की तिमली रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। शिकार की रोकथाम के लिए बनाई गई टीम जंगल की सभी बीट पर निरंतर नजर रखे हुए है।


वहीं दूसरी ओर,विभाग के उच्च अधिकारी भी इस प्रकार की घटनाओं की रोकथाम को प्रतिदिन टीम में शामिल कर्मचारियों से अपडेट ले रहे हैं। सभी की नजर जंगलों पर है।


बता दें की कालसी वन प्रभाग की तिमली रेंज का जंगल वन्यजीवों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 9,930 हेक्टेयर में फैले हुए रेंज के संरक्षित वन क्षेत्र को धौला, कुल्हाल, मटकमाजरी, आदुवाला, शाहपुर-कल्याणपुर, दर्रारीट, तिमली, जानसन, सभावाला, चिड़िभेली, धर्मावाला, मेंदनीपुर, माजरी-जाटोवाला नामक कुल 13 बीट में बांटा गया है।


दरअसल,जंगल में गुलदार, हिरण प्रजाति के सांभर, चीतल, बारहसिंघा, घुरड़, काकड़ के अलावा भारी संख्या में नील गाय, जंगली सूअर मौजूद हैं। इसके अलावा मोर, जंगली मुर्गे व तीतर जैसे कई प्रजातियों के पक्षी भी जंगल में हैं।सर्दी के मौसम में शिकार की आंशका बढ़ने को देखते हुए वन विभाग ने जंगल की सभी बीट में गश्त को बढ़ा दिया है। इसके अलावा शिकार की रोकथाम के लिए एक विशेष दल का गठन करके हर एक बीट पर नजर रखी जा रही है।

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कालसी वन प्रभाग की उप प्रभागीय वनाधिकारी डा. शिप्रा ने बताया कि तिमली रेंज का जंगल वन्यजीवों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए जंगल की सुरक्षा के मामले में हर स्तर पर इंतजाम किए गए हैं। विशेष दल रात व दिन के समय लगातार गश्त कर रहा है।

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