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​उत्तराखंड में मानसून का तांडव: उत्तरकाशी में उफनते नालों के बीच जान हथेली पर रखकर आवाजाही को मजबूर लोग, रुद्रप्रयाग में स्कूल बंद

On: July 10, 2026 5:45 AM
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​मुख्य बिंदु:

  • ​मोरी विकासखंड की बड़ासु पट्टी के 5 गांवों पर संपर्क टूटने का खतरा गहराया।
  • ​सांकरी–गंगाड़–ओसला मोटर मार्ग के दो खड्डों पर पुल न होने से ग्रामीण बेबस।
  • ​राजमा, सेब और चौलाई की नकदी फसलों के बर्बाद होने की आशंका से किसान चिंतित।
  • ​लगातार मूसलधार बारिश के बाद रुद्रप्रयाग जिले के सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित।

​उत्तरकाशी/रुद्रप्रयाग:

उत्तराखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही पहाड़ों से लेकर मैदान तक तबाही का दौर शुरू हो गया है। भारी बारिश के कारण राज्य की नदियां, बरसाती नाले और खड्ड उफान पर हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे गंभीर स्थिति उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड और रुद्रप्रयाग से सामने आ रही है, जहाँ सड़कें दरिया बन चुकी हैं और लोग अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते नालों को पार करने पर मजबूर हैं।

​मोरी विकासखंड के दूरस्थ गांवों में संपर्क संकट, सड़कें बनीं दरिया

​उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड के अंतर्गत आने वाली बड़ासु पट्टी के सुदूरवर्ती गांवों के सामने एक बार फिर देश-दुनिया से कट जाने का संकट खड़ा हो गया है। सांकरी–गंगाड़–ओसला मोटर मार्ग पर स्थित हलारा खड्ड और पूर्ति खड्ड में अचानक जलस्तर बढ़ने से स्थिति बेहद भयावह हो गई है। पहाड़ी से आने वाले मलबे और पानी के तेज बहाव ने सड़क को पूरी तरह से जलमग्न कर दिया है।

​हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों के पास उफनते हुए इन खड्डों को पार करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। पैदल राहगीरों के साथ-साथ दुपहिया और चौपहिया वाहनों के बहने का खतरा हर पल बना रहता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, एक बाइक को इस तेज बहाव से बाहर निकालने के लिए कम से कम 5 से 10 लोगों को अपनी जान दांव पर लगानी पड़ रही है। यदि क्षेत्र में बारिश का यही सिलसिला जारी रहा, तो पवाणी, ओसला, गंगाड़, ढाटमीर और तालुका समेत पांच मुख्य गांवों का संपर्क मोरी विकासखंड मुख्यालय से पूरी तरह टूट जाएगा।

​स्थायी पुल न होने से हर साल दोहराई जाती है त्रासदी

​क्षेत्र के स्थानीय निवासियों—नौनियाल राणा, जनक रावत, जयचंद राणा और वरदान सिंह ने प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि यह समस्या नई नहीं है। हर साल मानसून आते ही इन दोनों खड्डों पर पुल न होने का खामियाजा हजारों ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है।

​ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन से इन दोनों स्थानों पर स्थायी पुल निर्माण और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की मांग कर रहे हैं। लेकिन हर बार उन्हें केवल खोखले आश्वासन ही मिलते हैं।

प्रशासन मानसून के समय कुछ अस्थायी इंतजाम करके अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर लेता है, जो पहली ही तेज बारिश में बह जाते हैं। जब तक हलारा और पूर्ति खड्ड पर पक्के पुलों का निर्माण नहीं होता, तब तक क्षेत्र का विकास और ग्रामीणों की सुरक्षा हमेशा खतरे में रहेगी।

​किसानों, मरीजों और स्कूली बच्चों पर मंडराया संकट

​इस मार्ग के बंद होने की आशंका ने स्थानीय किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। वर्तमान में क्षेत्र में सेब, राजमा और चौलाई जैसी प्रमुख नकदी फसलों को तैयार करने का काम चल रहा है। आने वाले दिनों में इन तैयार उत्पादों को मुख्य बाजारों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

यदि सड़क मार्ग इसी तरह बाधित रहा, तो किसानों की फसलें समय पर बाजार नहीं पहुंच पाएंगी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

​इसके अलावा, मार्ग अवरुद्ध होने से क्षेत्र के बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, स्कूली बच्चों की पढ़ाई और दैनिक उपभोग की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

​रुद्रप्रयाग में मूसलधार बारिश: स्कूल बंद, नदियां उफान पर

​दूसरी ओर, रुद्रप्रयाग जिले में भी लगातार हो रही भारी बारिश ने कहर बरपाया है। मूसलधार बारिश के चलते जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है। मौसम के मिजाज और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कदम उठाया है और शुक्रवार को जनपद के सभी शासकीय व अशासकीय विद्यालयों में एहतियातन अवकाश घोषित कर दिया है।

​क्षेत्र में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां डेंजर लेवल के आसपास बह रही हैं। नदियों और बरसाती गदेरों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों से सख्त अपील की गई है कि वे किसी भी स्थिति में नदियों, गदेरों और बरसाती नालों के समीप न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।

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​प्रशासनिक कदम: जिलाधिकारी ने दिए सख्त निर्देश

​मोरी क्षेत्र में पैदा हुए इस गंभीर संकट पर संज्ञान लेते हुए उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को मौके पर तत्काल आवश्यक और प्रभावी कदम उठाने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

​”बरसात के इस मौसम में ग्रामीणों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि सड़क पर आवाजाही को हर हाल में सुचारू रखा जाए। इसके साथ ही, आपदा प्रबंधन मद से आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्थाएं विकसित करने और पूरी स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने की हिदायत दी गई है।”

— प्रशांत आर्य, जिलाधिकारी

​उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अगले कुछ दिन बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। यदि प्रशासन ने समय रहते स्थायी और ठोस कदम नहीं उठाए, तो मोरी के इन पांच गांवों के हजारों ग्रामीणों के लिए यह मानसून किसी बड़ी आपदा में बदल सकता है।

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