हल्द्वानी: उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गरमा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी रैली के बाद रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण कराए जाने को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। खरगे ने इस मुद्दे को संसद तक पहुंचाया, जिसके बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
खरगे ने राज्यसभा में घटना का उल्लेख करते हुए इसे सामाजिक भेदभाव से जोड़कर सवाल उठाया। वहीं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सदन में मामले की जांच कराने की बात कही और कहा कि ऐसी घटना केवल कांग्रेस से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह सभी के सम्मान से जुड़ा मामला है।
8 अगस्त को हल्द्वानी पहुंचे थे मल्लिकार्जुन खरगे
कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत हल्द्वानी में बड़ी जनसभा आयोजित की थी। मल्लिकार्जुन खरगे ने 8 अगस्त 2026 को रामलीला मैदान में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित किया। पार्टी की ओर से इस कार्यक्रम को उत्तराखंड में चुनावी अभियान को गति देने वाले महत्वपूर्ण आयोजन के तौर पर देखा गया था। इससे पहले कांग्रेस ने खरगे के दौरे और रैली की तैयारियों को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित किए थे।
रैली में कांग्रेस ने राज्य सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर हमला बोला। पार्टी की रणनीति आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार की नीतियों, युवाओं से जुड़े मुद्दों और कथित अनियमितताओं को जनता के बीच उठाने की है।
रैली के बाद क्या हुआ?
विवाद उस समय शुरू हुआ जब रैली के कुछ दिन बाद रामलीला मैदान में एक धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों ने वहां हवन किया और गंगाजल का छिड़काव किया। इसे शुद्धिकरण कार्यक्रम बताया गया। यह आयोजन खरगे की रैली के बाद हुआ था, जिसके कारण राजनीतिक विवाद और तेज हो गया।
आयोजकों की ओर से कथित तौर पर यह तर्क दिया गया कि रैली के दौरान कुछ आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे और रामलीला मैदान को राजनीतिक कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल किए जाने पर भी आपत्ति थी। उनका कहना था कि मैदान एक सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाला स्थल है।
हालांकि, शुद्धिकरण की कार्रवाई को कांग्रेस ने अलग नजरिए से देखा। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद पूरे आयोजन स्थल का शुद्धिकरण करने की जरूरत क्यों पड़ी।
Uttarakhand Kharge Rally: खरगे ने राज्यसभा में उठाया मामला
मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर तब ध्यान खींचा जब मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में इसका जिक्र किया। खरगे ने खुद को अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाला बताते हुए कहा कि इस तरह की घटना केवल उनका व्यक्तिगत अपमान नहीं है, बल्कि सामाजिक समानता और सम्मान से जुड़े बड़े सवाल खड़े करती है। उन्होंने कथित शुद्धिकरण को भेदभाव की मानसिकता से जोड़कर सवाल उठाया।
खरगे के बयान के बाद संसद में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस देखने को मिली। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि घटना सामाजिक बराबरी के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है।
भाजपा ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राज्यसभा में प्रतिक्रिया दी। नड्डा ने मामले को गंभीर बताया और जांच कराने का भरोसा दिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यदि किसी तरह की आपत्तिजनक या भेदभावपूर्ण गतिविधि हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए।
इससे पहले सामने आई रिपोर्टों में भाजपा से जुड़े लोगों के कार्यक्रम में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, किसी राजनीतिक दल या संगठन की ओर से जिम्मेदारी तय होने से पहले इस मामले के तथ्यों की आधिकारिक जांच महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल विवाद का बड़ा हिस्सा इसी बात पर केंद्रित है कि शुद्धिकरण कार्यक्रम किसके कहने या आयोजन से हुआ और उसका उद्देश्य वास्तव में क्या था।
कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना
कांग्रेस ने घटना को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी नेता की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल को शुद्ध करने की बात कही जाती है तो इससे सामाजिक भेदभाव और जातिगत सोच का संदेश जाता है।
कांग्रेस नेताओं ने इसे केवल मल्लिकार्जुन खरगे का मामला नहीं बल्कि दलित सम्मान और संवैधानिक समानता से जुड़ा मुद्दा बताया है। पार्टी का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति की जाति या सामाजिक पहचान के आधार पर भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
युवाओं के आरोपों ने भी बढ़ाया विवाद
इस बीच शुद्धिकरण कार्यक्रम में शामिल कुछ युवाओं ने भी आरोप लगाए हैं कि उन्हें कार्यक्रम के उद्देश्य की पूरी जानकारी पहले नहीं दी गई थी। कुछ युवकों ने दावा किया कि उन्हें वहां बुलाकर बाद में हवन में शामिल किया गया और उन्हें लगा कि उनके साथ गलत तरीके से व्यवहार किया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो विवाद का एक नया पहलू सामने आ सकता है। इससे यह सवाल भी उठेगा कि कार्यक्रम में शामिल लोगों को आयोजन के उद्देश्य और प्रकृति के बारे में कितनी जानकारी थी।
मायावती ने भी जताई आपत्ति
इस विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने घटना को दलितों के प्रति भेदभाव से जोड़ते हुए सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों पर सवाल उठाया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी इस मामले पर संज्ञान लेने की अपील की।
इस प्रतिक्रिया के बाद विवाद उत्तराखंड की राजनीति से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक न्याय और जातिगत भेदभाव की बहस का हिस्सा बन गया है।
2027 चुनाव से पहले सियासी तापमान बढ़ा
उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर चुके हैं। कांग्रेस ने खरगे की रैली से पहले परिवर्तन संकल्प यात्रा के जरिए कई विधानसभा क्षेत्रों में अभियान चलाया था। पार्टी का लक्ष्य राज्य सरकार के खिलाफ विभिन्न मुद्दों को लेकर जनसमर्थन जुटाना है।
ऐसे समय में Uttarakhand Kharge Rally के बाद सामने आया शुद्धिकरण विवाद दोनों दलों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। कांग्रेस इसे सामाजिक सम्मान और बराबरी का मुद्दा बना रही है, जबकि भाजपा की ओर से मामले की जांच की बात कही गई है।
जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल Uttarakhand Kharge Rally के बाद हुए कथित शुद्धिकरण को लेकर राजनीतिक आरोप तेज हैं, लेकिन घटना से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कार्यक्रम किस संगठन ने आयोजित किया, उसमें कौन लोग शामिल थे और इसका वास्तविक उद्देश्य क्या था।
एक राजनीतिक कार्यक्रम के बाद धार्मिक अनुष्ठान को लेकर पैदा हुआ यह विवाद अब जाति, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे कई संवेदनशील सवालों से जुड़ चुका है। आने वाले दिनों में जांच और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं इस विवाद की दिशा तय कर सकती हैं।








