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उत्तराखंड: 72 वर्षों पुराना नियम फिर चर्चा में, गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की तैयारी

On: January 6, 2026 9:32 AM
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हरिद्वार और ऋषिकेश को पवित्र सनातन नगरी घोषित करने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने मंथन तेज कर दिया है। इसके तहत हर की पैड़ी सहित सभी गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह व्यवस्था कोई नई नहीं है, बल्कि इसका आधार करीब 72 वर्ष पुरानी नगर पालिका नियमावली में पहले से मौजूद है।

1953 की नगर पालिका उपविधि में पहले से दर्ज है प्रतिबंध

हरिद्वार नगर पालिका की वर्ष 1953 की उपविधि के अध्ययन में सामने आया है कि उस समय धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के उद्देश्य से हर की पैड़ी और कुशावर्त घाट क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। सरकारी कार्य से आने वाले अधिकारियों को छोड़कर अन्य अहिंदुओं को इन पवित्र स्थलों में प्रवेश की अनुमति नहीं थी।

इस उपविधि में यह भी प्रावधान है कि प्रांतीय म्युनिसिपैलिटी एक्ट 1916 की धारा 299(1) के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर 10 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति बार-बार नियम तोड़ता है, तो पहली बार के बाद प्रतिदिन पांच रुपये तक का अतिरिक्त दंड भी लगाया जा सकता है।

सभी 105 घाटों पर नियम लागू करने की मांग

नगर पालिका उपविधि के आधार पर श्री गंगा सभा और अन्य धार्मिक संगठनों ने मांग उठाई है कि यह प्रतिबंध केवल हर की पैड़ी तक सीमित न रहकर हरिद्वार और ऋषिकेश के सभी गंगा घाटों पर लागू किया जाए। संगठनों का कहना है कि 1953 में गंगा के केवल पांच से सात घाट थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 105 हो चुकी है। ऐसे में धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए सभी घाटों पर एक समान नियम लागू होना चाहिए।

1916 के ब्रिटिश कालीन समझौते का भी हवाला

इस मांग के समर्थन में वर्ष 1916 में पं. मदन मोहन मालवीय और ब्रिटिश शासन के बीच हुए समझौते का भी उल्लेख किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ब्रिटिश शासन के दौरान भी तीर्थ नगरी की पवित्रता बनाए रखने के लिए गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए थे। अब उन्हीं नियमों को नए सिरे से सख्ती के साथ लागू करने की बात कही जा रही है।

मांस और शराब बिक्री पर भी चिंता

श्री गंगा सभा ने हर की पैड़ी, अन्य गंगा घाटों, पार्किंग स्थलों और मेला भूमि में शराब और मांस परोसे जाने की घटनाओं पर भी गंभीर चिंता जताई है। नगर पालिका उपविधि (1953) के अनुसार ज्वालापुर क्षेत्र को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर मांस बिक्री का लाइसेंस नहीं दिया जा सकता।

नियमों के तहत मांस विक्रेताओं को अपनी दुकान पर अपना पूरा नाम, पता और बेचे जा रहे मांस के प्रकार को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य है।

कुंभ क्षेत्र को घोषित किया जाए निषेध क्षेत्र

श्री गंगा सभा की ओर से यह भी मांग की गई है कि कुंभ क्षेत्र को गैर-हिंदू प्रवेश निषेध क्षेत्र घोषित किया जाए। सभा का कहना है कि तीर्थ नगरी की सांस्कृतिक और धार्मिक गरिमा की रक्षा के लिए पुराने नगर पालिका बायलॉज का सख्ती से पालन जरूरी है।

सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि प्रस्तावित कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए कुंभ क्षेत्र का विकास पूरी तरह धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप किया जाना चाहिए, ताकि सनातन परंपराओं की पवित्रता बनी रह सके।

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