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तमिलनाडु में ऐतिहासिक न्याय: नाबालिग से दरिंदगी और हत्या के दोषी को महज 75 दिनों में ‘दोहरी फांसी’ की सजा, 1000 घंटे की CCTV फुटेज से खुला था राज

On: May 26, 2026 5:54 AM
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तमिलनाडु के तूतीकोरिन कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला दोहरी फांसी की सजा

​तूतीकोरिन।

​महिला सुरक्षा और त्वरित न्याय की दिशा में तमिलनाडु की एक विशेष अदालत ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो देश के कानूनी इतिहास में नजीर बनेगा। कोर्ट ने एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार और उसकी नृशंस हत्या के मामले में आरोपी धर्ममुनीश्वरन को ‘दोहरी मौत की सजा’ (Double Death Penalty) सुनाई है। रूह कंपा देने वाली इस वारदात के ठीक 75 दिनों के भीतर अदालत ने सभी गवाहों और वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर दोषी को फांसी के फंदे तक पहुंचा दिया। इस मामले में पुलिस की तत्परता और आधुनिक तकनीक का तालमेल काबिलेतारीफ रहा, जिसने अंधाधुंध केस को सुलझाकर महज 21 दिनों में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

​शौच के लिए निकली नाबालिग को बनाया था शिकार

​यह दिल दहला देने वाली घटना तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के एक सुदूरवर्ती वेदानथम गांव की है। पीड़ित नाबालिग लड़की हमेशा की तरह घर से बाहर शौच के लिए निकली थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे आरोपी धर्ममुनीश्वरन ने सूनसान रास्ते का फायदा उठाकर उसे जबरन रोक लिया। आरोपी ने पहले नाबालिग के साथ बर्बरतापूर्वक बलात्कार किया और फिर अपनी पहचान छुपाने के उद्देश्य से उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था। चूंकि वारदात सूनसान इलाके में हुई थी, इसलिए शुरुआत में पुलिस के पास कातिल तक पहुंचने का कोई सीधा सुराग या चश्मदीद गवाह नहीं था।

​1000 घंटे की CCTV फुटेज और विंडमिल कैमरे से मिला सुराग

​इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने के लिए तूतीकोरिन पुलिस ने एक विशाल खोजी अभियान शुरू किया। पुलिस टीमों ने वेदानथम गांव से लेकर तूतीकोरिन शहर के बीच के पूरे रूट पर लगे अलग-अलग कैमरों की लगभग 1,000 घंटे की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को खंगालना शुरू किया।

​दिन-रात की कड़ी मशक्कत के बाद, आखिरकार पुलिस को सबसे बड़ी कामयाबी घटना स्थल के पास ही स्थित एक ‘विंडमिल फार्म’ (पवन चक्की केंद्र) में लगे अकेले कैमरे से मिली। इस कैमरे की फुटेज की बारीकी से जांच करने पर पुलिस को एक संदिग्ध युवक दिखाई दिया।

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  • ​वारदात से पहले की रेकी: फुटेज में दोषी धर्ममुनीश्वरन 10 मार्च को दोपहर लगभग 2:30 बजे गांव की सीमा में प्रवेश करते हुए कैद हुआ था, जो कि वारदात के समय से करीब 4 घंटे पहले का वक्त था।
  • ​वारदात के बाद का मूवमेंट: इसके बाद, अगली सुबह यानी 11 मार्च को सुबह 6:30 बजे वह उसी रास्ते से गांव से बाहर निकलते हुए देखा गया। वीडियो में उसकी ‘चेक वाली शर्ट’ साफ दिखाई दे रही थी, जिसे पुलिस ने अपनी तफ्तीश का मुख्य आधार बनाया।

​डीएनए और फॉरेंसिक जांच ने कोर्ट में साबित किया गुनाह

​साक्ष्यों को पुख्ता करने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक और फॉरेंसिक जांच का सहारा लिया, जिसने अदालत में आरोपी के बचने के सारे रास्ते बंद कर दिए।

  • ​रक्त के नमूने: गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी की वही ‘चेक शर्ट’ बरामद की गई, तो फॉरेंसिक लैब में उस पर लगे खून के धब्बे पीड़िता के ब्लड ग्रुप से पूरी तरह मैच हो गए।
  • ​डीएनए मैपिंग (DNA): पीड़िता के शरीर से एकत्र किए गए सीमन सैंपल की जब डीएनए जांच कराई गई, तो वह शत-प्रतिशत धर्ममुनीश्वरन के डीएनए से मेल खा गए। इन अकाट्य वैज्ञानिक प्रमाणों के सामने बचाव पक्ष की दलीलें पूरी तरह ढह गईं।

​बाइक चुराकर की थी रेकी, नंबर प्लेट भी बदला था

​पुलिस तफ्तीश में यह भी खुलासा हुआ कि यह कोई अचानक हुआ अपराध नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी साजिश थी। आरोपी धर्ममुनीश्वरन बीते फरवरी महीने से ही अपने दोस्तों के साथ लगातार वेदानथम गांव आ रहा था और आने-जाने वाले रास्तों की रेकी कर रहा था। वारदात को अंजाम देने के लिए उसने रामनाथपुरम जिले के पार्थिबनूर इलाके से एक मोटरसाइकिल चुराई थी। पकड़े जाने के डर से उसने उस चोरी की बाइक की असली नंबर प्लेट (5370) को बदलकर फर्जी नंबर (6870) लगा दिया था, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके। लेकिन तकनीक और फॉरेंसिक विज्ञान के आगे उसकी हर चालाकी नाकाम रही।

​कानूनी मिसाल: 21 दिन में चार्जशीट, 75 दिन में न्याय

​इस केस को जिस गति से अंजाम तक पहुंचाया गया, वह भारतीय न्याय प्रणाली में एक मिसाल है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चौबीसों घंटे काम किया और घटना के मात्र 21 दिनों के भीतर अदालत में वैज्ञानिक सबूतों के साथ एक बेहद मजबूत चार्जशीट पेश कर दी।

फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत मामले की रोजाना सुनवाई हुई और अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि यह मामला ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में आता है। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे समाज विरोधी तत्वों के लिए मौत की सजा ही एकमात्र उचित न्याय है और दोषी को दोहरी फांसी की सजा मुकर्रर की।

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