नई दिल्ली:
मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन और डिजिटल क्रिएटर समय रैना की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अदालत को गुमराह करने और दिए गए निर्देशों का उल्लंघन करने के मामले में समय रैना पर सख्त रुख अपनाते हुए 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कॉमेडियन ने “अदालत को मजाक समझ रखा है” (taken the court for a ride) और बेंच के सामने झूठे बयान दिए हैं।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस जेवी मोहाना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए समय रैना को दो सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में राशि जमा नहीं की गई, तो उनके खिलाफ दंडात्मक (coercive) कार्रवाई की जाएगी।
’सोचकर चिंता होती है कि यह किस तरह के यूथ आइकन हैं’
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में उस वक्त माहौल काफी गंभीर हो गया जब याचिकाकर्ता ‘क्योर एसएमए (SMA) फाउंडेशन’ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने समय रैना के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 28 वर्षीय कॉमेडियन ने अदालत को दिए पिछले आश्वासनों के बावजूद, स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी (SMA) से पीड़ित व्यक्तियों या फाउंडेशन से संपर्क करने की कोई जहमत नहीं उठाई।
एडवोकेट अपराजिता सिंह ने दलील दी, “समय रैना लगातार अपने शोज कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्होंने न तो एसएमए फाउंडेशन से संपर्क किया और न ही इस बीमारी से पीड़ित लोगों से। मुझे नहीं पता कि वह किस तरह के यूथ आइकन हैं। यह सोचकर भी मुझे डर लगता है।”
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि समय रैना ने पहले बेंच के सामने जो प्रतिबद्धताएं (commitments) जताई थीं, उनका वास्तविक आचरण उसके बिल्कुल उलट रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को गुमराह करने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा विवाद? (क्रोनोलॉजी और पृष्ठभूमि)
यह पूरा कानूनी विवाद समय रैना के बेहद लोकप्रिय और चर्चित यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ (India’s Got Latent) के दो एपिसोड्स से जुड़ा है, जो साल 2025 में स्ट्रीम किए गए थे।
• विवादास्पद टिप्पणियां: इन एपिसोड्स के दौरान स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी (SMA) जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित मरीजों, विशेषकर एक नवजात शिशु के इलाज का मजाक उड़ाया गया था।
• दिव्यांगों पर तंज: शो में सिर्फ बीमारी ही नहीं, बल्कि दृष्टिबाधित (blind) और भेंगेपन (cross-eyed) से पीड़ित लोगों को लेकर भी आपत्तिजनक और असंवेदनशील टिप्पणियां की गई थीं।
• याचिकाकर्ताओं का रुख: इस कंटेंट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखा गया था। जिसके बाद क्योर एसएमए फाउंडेशन के साथ-साथ प्रसिद्ध कंटेंट क्रिएटर्स रणवीर अल्लाहबादिया और आशीष चंचलानी ने भी इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
हेट स्पीच की तर्ज पर दिव्यांगों के लिए भी बने सख्त कानून: सुप्रीम कोर्ट
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व की सुनवाइयों में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक बेहद महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया था। उन्होंने केंद्र सरकार और सॉलिसिटर जनरल से कहा था कि जिस तरह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST Act) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों को रोकने के लिए सख्त कानून हैं, उसी तरह दिव्यांग व्यक्तियों (Persons with Disabilities) की गरिमा की रक्षा के लिए भी एक कड़ा कानून होना चाहिए।
चीफ जस्टिस ने पूछा था, “क्यों न एससी/एसटी एक्ट की तर्ज पर एक ऐसा कानून बनाने पर विचार किया जाए, जिसमें दिव्यांगों को नीचा दिखाने या उनका मजाक उड़ाने पर स्पष्ट और कड़े दंड का प्रावधान हो?” इस पर सरकार की तरफ से भी सहमति जताई गई थी कि किसी की भी गरिमा की कीमत पर ‘ह्यूमर’ या मनोरंजन की इजाजत नहीं दी जा सकती।
माफीनामा भी नहीं आया काम
अदालती कार्रवाई और बढ़ते विवाद के बीच अक्टूबर 2025 में समय रैना और शो से जुड़े अन्य कॉमेडियन्स ने एक संयुक्त बयान जारी कर खेद व्यक्त किया था।
संयुक्त बयान में कहा गया था:
“हम—समय रैना, विपुल गोयल, सोनाली ठक्कर, निशांत तंवर और बलराज घई—हमारे शो के कारण पहुंची ठेस और दर्द के लिए गहरा खेद व्यक्त करते हैं। भविष्य में हम अधिक सतर्क रहेंगे और इस समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का पूरा प्रयास करेंगे। आपकी ताकत हमें बेहतर बनने की प्रेरणा देती है।”
हालांकि, इस माफीनामे के बाद भी जब कोर्ट के धरातली निर्देशों (ग्राउंड रियलिटी पर काम करने) का पालन नहीं किया गया और कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की गई, तो अदालत ने अब यह सख्त रुख अख्तियार किया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला डिजिटल स्पेस में कॉमेडी और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर असंवेदनशीलता पर लगाम लगाने के लिए एक नजीर साबित होगा।











