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Rishikesh Four Lane Project: फोरलेन सड़क के लिए नहीं कटेंगे पेड़, CM धामी ने लगाई रोक… अब कैसे आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट?

On: July 18, 2026 3:37 PM
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Rishikesh Four Lane Project showing the Dehradun-Rishikesh road corridor with roadside trees as CM Dhami pauses tree cutting amid environmental concerns.

Rishikesh Four Lane Project को लेकर उत्तराखंड सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन सड़क परियोजना के तहत प्रस्तावित पेड़ों की कटाई पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिलहाल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। पिछले कई दिनों से इस परियोजना का स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा था। बढ़ते जनदबाव और पर्यावरण संरक्षण की मांग को देखते हुए सरकार ने फिलहाल पेड़ों की कटाई रोककर सभी संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद ही आगे का फैसला लेने की बात कही है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य के विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना भी सरकार की प्राथमिकता है। यही कारण है कि Rishikesh Four Lane Project को लेकर अब नए सिरे से विचार-विमर्श किया जाएगा।

Rishikesh Four Lane Project में क्यों रुकी पेड़ों की कटाई?

देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन सड़क परियोजना का उद्देश्य दोनों शहरों के बीच यातायात को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाना है। यह मार्ग चारधाम यात्रा, जौलीग्रांट एयरपोर्ट और पर्यटन गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि सड़क चौड़ीकरण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाने की योजना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना था कि वर्षों पुराने पेड़ों की कटाई से क्षेत्र की हरियाली, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होगा।

विरोध लगातार बढ़ता गया और धरना-प्रदर्शन का रूप ले लिया। इसके बाद सरकार ने पूरे मामले की समीक्षा करने का निर्णय लिया।

मुख्यमंत्री बोले—विकास और पर्यावरण दोनों जरूरी

Rishikesh Four Lane Project पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पर्वतीय राज्य में विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पर्यावरण विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से विस्तृत चर्चा की जाए। सभी सुझावों का अध्ययन करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार न्यायालय के सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन करेगी और किसी भी निर्णय में जनभावनाओं की अनदेखी नहीं की जाएगी।

सड़क चौड़ीकरण के विरोध में कई दिनों से जारी था आंदोलन

ऋषिकेश-भानियावाला मार्ग के सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के विरोध में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन चल रहा था। आंदोलन में स्थानीय निवासी, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और कई जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सड़क निर्माण का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे चाहते हैं कि ऐसा वैकल्पिक डिजाइन तैयार किया जाए जिससे कम से कम पेड़ों की कटाई करनी पड़े।

उनका तर्क था कि उत्तराखंड पहले ही जलवायु परिवर्तन और भूस्खलन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय समस्याएं पैदा कर सकती है।

क्या है पूरा Rishikesh Four Lane Project?

Rishikesh Four Lane Project के तहत भानियावाला, जौलीग्रांट और ऋषिकेश के बीच सड़क को फोर या सिक्स लेन में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक दबाव को कम करना और यात्रा को अधिक सुरक्षित एवं तेज बनाना है।

चारधाम यात्रा के दौरान इस मार्ग पर भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक गुजरते हैं। इसके अलावा जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक पहुंचने वाले यात्रियों के लिए भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार का मानना है कि सड़क चौड़ी होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और क्षेत्र के पर्यटन तथा आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

सरकार अब तलाशेगी वैकल्पिक समाधान

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब संबंधित विभाग सड़क निर्माण के ऐसे विकल्पों पर भी विचार करेंगे जिनसे पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों, एलिवेटेड रोड, सीमित चौड़ीकरण या सड़क के डिजाइन में बदलाव जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। यदि ऐसे समाधान अपनाए जाते हैं तो बड़ी संख्या में पेड़ों को बचाया जा सकता है।

सरकार ने संकेत दिए हैं कि परियोजना पूरी तरह बंद नहीं की गई है, बल्कि इसे अधिक संतुलित और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन सबसे बड़ी चुनौती

उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में विकास परियोजनाओं को लागू करना हमेशा चुनौतीपूर्ण माना जाता है। सड़क, सुरंग और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं राज्य के विकास के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इनका सीधा प्रभाव जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों पर भी पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य की परियोजनाओं में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) को और अधिक मजबूत बनाना होगा ताकि विकास और प्रकृति दोनों के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।स्थानीय लोगों की क्या है मांग?

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की मांग है कि सरकार परियोजना का ऐसा मॉडल तैयार करे जिससे कम से कम पेड़ों की कटाई हो। उनका कहना है कि यदि पेड़ हटाना बिल्कुल आवश्यक हो, तो उसके बदले बड़े पैमाने पर प्रभावी पुनर्वनीकरण (Compensatory Plantation) सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा स्थानीय लोगों ने परियोजना की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और सभी हितधारकों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने की भी मांग की है।

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