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​उत्तराखंड में मलबे की मार: ऋषिकेश-यमुनोत्री समेत 100 से अधिक सड़कें ठप

On: July 13, 2026 5:49 AM
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Massive landslide destroying a mountain highway in Uttarakhand during heavy monsoon rain, with rescue workers and a JCB clearing debris.

​उत्तराखंड इस मानसूनी आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। राज्य के पर्वतीय जिलों में लगातार हो रहे भूस्खलन और पहाड़ी से गिरते पत्थरों के कारण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश भर में 100 से अधिक संपर्क मार्ग बंद हैं, जिनमें से अधिकांश ग्रामीण इलाकों की जीवनरेखा हैं।

  • ​उत्तरकाशी और यमुनोत्री मार्ग: ऋषिकेश-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग स्यानाचट्टी के पास भारी मलबा आने से बंद हो गया है, जिससे चारधाम यात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही थम गई है। जिले की 10 ग्रामीण सड़कें भी पूरी तरह ब्लॉक हैं।
  • ​कुमाऊं और गढ़वाल का हाल: अल्मोड़ा में 5, रुद्रप्रयाग में 4, चमोली में 12 और पिथौरागढ़ में 14 प्रमुख सड़कें बंद हैं। नैनीताल जिले के हल्द्वानी-भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामगढ़ पुल के पास सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
  • ​देहरादून और टिहरी: राजधानी देहरादून के 10 ग्रामीण मार्ग और टिहरी जिले के 9 रास्तों पर मलबा आने से संपर्क टूट गया है। प्रशासन लगातार जेसीबी मशीनों के जरिए रास्ता साफ करने में जुटा है, लेकिन लगातार गिरते पत्थर काम में बाधा बन रहे हैं।

​कश्मीर के पहलगाम में बादल फटने से हाहाकार, घरों में घुसा सैलाब

​जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले से भी तबाही की दर्दनाक तस्वीरें सामने आ रही हैं। शनिवार रात पहलगाम के अवूरा इलाके में अचानक बादल फटने (Cloudburst) से भीषण बाढ़ आ गई। मलबे और पानी के तेज बहाव ने कई मकानों और व्यावसायिक इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया।

​स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात के समय एक जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई और देखते ही देखते पानी का सैलाब बस्तियों में घुस गया। कई मकान आंशिक रूप से ढह गए हैं और अब भी कमरों में कई फीट तक कीचड़ और पानी भरा हुआ है। इस आपदा के कारण पहलगाम-अवूरा-बिजबिहाड़ा मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।

पूरे क्षेत्र में बिजली और पेयजल की आपूर्ति ठप है। प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए प्रभावित होटलों में ठहरे पर्यटकों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

​हिमाचल में भारी भूस्खलन: नेशनल हाईवे-5 बंद, रोहतांग में बर्फबारी

​हिमाचल प्रदेश में भी मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। शिमला, चंबा, लाहौल-स्पीति और कुल्लू समेत कई जिलों में रविवार को झमाझम बारिश हुई। वहीं, लाहौल घाटी और रोहतांग दर्रे पर सीजन की ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है।

​आपदा की स्थिति यह है कि पठानकोट-भरमौर और शिमला-रामपुर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण बंद है। किन्नौर जिले के रल्ली (लाल ढांक) में पहाड़ी से विशाल चट्टानें गिरने के कारण जिला मुख्यालय रिकांगपिओ, पूह, काजा और पूरी स्पीति वैली का संपर्क राज्य के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट गया है। धर्मशाला में दिन के समय छाए घने कोहरे की वजह से दृश्यता (Visibility) इतनी कम हो गई कि चालकों को दिन में भी गाड़ियों की हेडलाइट जलाकर सफर करना पड़ा।

​देश के 70% हिस्से में मानसून सुस्त, उत्तर भारत में क्यों थमी है बारिश?

​एक तरफ जहां पहाड़ों पर आफत बरस रही है, वहीं देश के मैदानी और मध्य भागों में मानसून कमजोर पड़ गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से से मानसून के बादल गायब हैं।

​कमजोरी की मुख्य वजह: 9 जुलाई के बाद से बंगाल की खाड़ी में कोई नया और मजबूत कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure System) नहीं बना है। इसके कारण मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने के लिए जरूरी नमी नहीं मिल पा रही है।

साथ ही, मानसून की ट्रफ रेखा अपनी सामान्य स्थिति से खिसक कर उत्तर की ओर (हिमालय की तलहटी में) चली गई है। यही वजह है कि मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत में बारिश थम गई है और पूरी नमी उत्तर भारत तथा पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों में केंद्रित हो गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में तीन नए चक्रवाती सिस्टम बन रहे हैं, यदि इनमें से कोई एक भी बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो जुलाई के आखिरी हफ्ते में मानसून दोबारा पूरे देश में सक्रिय हो सकता है।

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​प्रशासन की सख्त चेतावनी: नदी-नालों और संवेदनशील रास्तों से दूर रहें

​आगामी दिनों के मौसम को देखते हुए मौसम विज्ञान केंद्र शिमला और देहरादून ने स्थानीय नागरिकों सहित सैलानियों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है। हालांकि 13 से 18 जुलाई के बीच हिमाचल में बहुत भारी बारिश का अलर्ट नहीं है, लेकिन पहाड़ों पर पहले से मौजूद नमी के कारण भूस्खलन का खतरा अत्यधिक बना हुआ है।

​प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि पर्यटक और स्थानीय लोग नदियों, बरसाती नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास न जाएं। पहाड़ी रास्तों पर सफर करने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि कम दृश्यता और फिसलन के कारण दुर्घटनाओं का अंदेशा बढ़ गया है। आपदा प्रबंधन टीमों को चौबीसों घंटे अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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