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​उत्तराखंड: नानकमत्ता में चला धामी सरकार का बुलडोजर, नानकसागर बांध क्षेत्र में बनी अवैध मजार और भवन ध्वस्त

On: June 20, 2026 5:54 AM
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​मुख्य बिंदु:

  • ​उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और उत्तराखंड प्रशासन की संयुक्त बड़ी कार्रवाई।
  • ​सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल नानकमत्ता साहिब के पास जलाशय क्षेत्र में था अवैध अतिक्रमण।
  • ​भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चली जेसीबी, पूरे अभियान की कराई गई वीडियोग्राफी।

​उधम सिंह नगर (उत्तराखंड)।

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के ‘अतिक्रमण विरोधी अभियान’ के तहत एक बार फिर बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। प्रदेश के पवित्र सिख तीर्थ स्थल नानकमत्ता में नानकसागर बांध क्षेत्र के भीतर सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई मजार और एक पक्के भवन को प्रशासन ने जमींदोज कर दिया है।

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के नेतृत्व में चलाए गए इस ध्वस्तीकरण अभियान में उत्तराखंड के स्थानीय प्रशासन और भारी पुलिस बल ने कानून व्यवस्था बनाए रखने में पूरा सहयोग किया। बुधवार सुबह तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

​जलाशय और सुरक्षा क्षेत्र में था अवैध निर्माण

​प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिस जमीन पर मजार और पक्के भवन का निर्माण किया गया था, वह भूमि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकार क्षेत्र और विभागीय अभिलेखों में दर्ज है। नानकसागर बांध और उसके आसपास का जलाशय क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस सरकारी और प्रतिबंधित भूमि पर बिना किसी अनुमति के लंबे समय से अतिक्रमण कर अवैध ढांचा खड़ा कर दिया गया था।


​मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने पहले इसकी गहन जांच की और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान किया। पूरी कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही बुधवार को ध्वस्तीकरण (Demolition) का अंतिम आदेश जारी कर धरातल पर कार्रवाई अमल में लाई गई।

​भारी पुलिस बल की तैनाती, छावनी में तब्दील हुआ इलाका

​चूंकि यह मामला धार्मिक रूप से संवेदनशील और सिखों के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल नानकमत्ता साहिब के नजदीक का था, इसलिए प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी। किसी भी प्रकार के विरोध, अफवाह या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तड़के ही भारी संख्या में पुलिस बल, प्रांतीय रक्षक दल (PRD) और महिला पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया था।


​कार्रवाई शुरू होते ही बांध क्षेत्र की तरफ आने-जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई और आम लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। उच्च अधिकारियों की सीधी निगरानी में एक के बाद एक कई जेसीबी मशीनों को मौके पर उतारा गया, जिन्होंने कुछ ही घंटों में अवैध मजार और उसके पास बने पक्के भवन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

​यूपी और उत्तराखंड के अधिकारियों की मौजूदगी में संयुक्त एक्शन

​इस बड़े अभियान की सबसे खास बात दोनों राज्यों के विभागों का आपसी तालमेल रही। मौके पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ उत्तराखंड प्रशासन के राजस्व विभाग के अधिकारी, मजिस्ट्रेट और पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) खुद मोर्चा संभाले हुए थे।

पूरे ध्वस्तीकरण अभियान की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन द्वारा इसकी बकायदा वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई, ताकि बाद में कोई भ्रामक स्थिति पैदा न हो सके।

​धार्मिक स्थलों की आड़ में अतिक्रमण पर धामी सरकार सख्त

​उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य में सरकारी जमीनों, वन भूमि और नदी-घाटों के किनारे ‘लैंड जिहाद’ या किसी भी प्रकार के अवैध धार्मिक अतिक्रमण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी कड़ी में कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक सरकारी जमीनों को मुक्त कराने का अभियान युद्ध स्तर पर जारी है।


​प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा, “सरकारी और विभागीय भूमि पर किसी भी वर्ग या समुदाय द्वारा किया गया अवैध निर्माण स्वीकार्य नहीं है। बांध, जलाशय और नदी बेसिन की सुरक्षा सर्वोपरि है। इन क्षेत्रों को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और भविष्य में भी ऐसा करने वालों पर सीधे कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।”

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​भूमि को लिया कब्जे में, दिनभर रही चर्चा

​मलबे को हटाने और स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित करने के बाद, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने संबंधित भूमि को आधिकारिक रूप से अपने कब्जे में ले लिया है। विभाग द्वारा अब उस जगह पर अपनी बाउंड्री या चेतावनी बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में दोबारा वहां कोई कब्जा न कर सके। वहीं, दूसरी ओर नानकमत्ता और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में इस बड़ी बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दिनभर स्थानीय लोगों और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

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