चीन और रूस के बीच देखने को मिलेगी कांटे की टक्कर, दोनों एक दूसरे पर करेंगे बारूद की बौछार - Doon Prime News
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चीन और रूस के बीच देखने को मिलेगी कांटे की टक्कर, दोनों एक दूसरे पर करेंगे बारूद की बौछार

आर्मी

यूक्रेन में जंग और ताइवान से तनातनी के बीच अब चीन और रूस में सबसे बड़ी टक्कर शुरू हो चुकी है। जी हां आपको बता दें कि चीन के विध्वंसक टैंक और रूस के विस्फोटक टैंकों के बीच मुकाबला तय हो गया है। दुनिया में अशांति फैलाने वाले यह दोनों देश अब ऐसे पड़ाव पर आ गए हैं, जहां दोनों देशों के टाइम एक दूसरे पर बारूद की बरसात करते हुए दिखने वाले हैं।

बता दें कि इस महीने के अंत में रूस में ‘वोस्तोक 2022’ नाम से एक मिलिट्री ड्रिल होने वाली है जिसमें रूस और चीन अपने सबसे बेहतरीन टैंकों को भेजने वाले हैं। बताया जा रहा है कि इस युद्धाभ्यास में चीन का टाइप 96 -बी टैंक शामिल होगा तो वहीं रूस का T-72बी 3 टैंक हिस्सा होगा।

अब हर किसी के मस्तिष्क में यही सवाल उठ रहा है कि किसका टैंक ज्यादा विध्वनशक है? अगर चीन के टाइम की बात करें तो इसमें ट्रांसमिशन गया और एडवांस फायर कंट्रोल सिस्टम है अगर चीन के टैंक की बात करें तो इसमें ट्रांसमिशन गियर और एडवांस फायर कंट्रोल सिस्टम है। साथ ही शक्तिशाली 730 हॉर्स पावर का इंजन भी लगा हुआ है। इस टैंक की ऑपरेशन रेंज 400 किलोमीटर है।40रन के इस चीनी टैंक की रफ्तार 1 घंटे में 65 किलोमीटर बताई जा रही है। वहीं अमेरिका भी इस टैंक को कागज का शेर बता चुका है। हालांकि वर्ष 2017में एक सैन्य अभ्यास में यह भारतीय भीष्म से हार चुका है।

चीन के पास है ऐसे हजार टैंक्स
बता दें कि इस टैंक को चीन अपनी रेड आर्मी की रीढ़ मानता है और उसके पास ऐसे हजार टैंक्स हैं। यदि रूस के T-72B3 टैंक की हम बात करें तो रूस के इस टैंक की खासियत यह है की इसमें 125 एमएम की गन फिट है। यह 7.62 एमएम की मशीन गन से लैस है। ये टैंक गनर और कमांडर के लिए गाइडेड वेपन सिस्टम है। वहीं 5000 मीटर वाली लेजर गाइडेड मिसाइल फायर करने में भी सक्षम है। यह डिजिटल बैलिस्टिक कंप्यूटर सिस्टम से भी दुश्मन पर हमला करता है।

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70 किलोमीटर प्रति घंटे की है रफ़्तार
यह टैंक ऑटोमेटिक फायर कंट्रोल सिस्टम से लैस है। वेदर सोर्स की वजह से यह खराब मौसम में भी काम करता है और 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। वहीं 46 टन वाले इस टाइम की रेंज 500 किलोमीटर है। रॉकेट और ग्रेनेड का भी इस पर असर नहीं होता। इतना ही नहीं रूस का यह टाइम चीन से कई मायनों में बेहतर है क्योंकि यह पानी में भी दुश्मन के चिथड़े उड़ा सकता है। ऐसे में अब देखना यह है कि टैंकों की टक्कर में चीन या रूस में से कौन जीतता है।

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