उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में जारी भारी बारिश ने अब मैदानी क्षेत्रों में भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। हरिद्वार में मंगलवार को लगातार हो रही बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। देर रात से जारी मूसलधार बारिश के चलते चंडी पुल की एप्रोच रोड धंस गई, जिसके कारण इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। प्रशासन ने एहतियातन ट्रैफिक को नए पुल से डायवर्ट कर दिया।
बारिश के चलते हरिद्वार की कई सड़कें जलमग्न हो गईं, वहीं जगह-जगह भू-धंसाव की घटनाएं सामने आ रही हैं। चंडी देवी मंदिर के पैदल मार्ग पर भी भू-धंसाव हुआ, जिसके बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए इस मार्ग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। दूसरी ओर, भारी जलभराव से चंद्राचार्य चौक, कनखल और ज्वालापुर के बाजार प्रभावित हुए, जहां कई वाहन पानी में फंस गए और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
श्यामपुर थाने के प्रभारी नितेश शर्मा ने बताया कि चंडी पुल का एप्रोच मार्ग धंसने के कारण ट्रैफिक को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा, बाद में वाहनों को वन-वे मार्ग से निकाला गया।
लगातार हो रही बारिश से नदियां और नाले उफान पर हैं। हरिद्वार स्थित भीमगोड़ा बैराज पर गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर पार कर गया है। मंगलवार को गंगा 293.10 मीटर पर बह रही थी, जबकि चेतावनी स्तर 293 मीटर और खतरे का स्तर 294 मीटर है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के सब डिवीजन ऑफिसर भारत भूषण के अनुसार, पहाड़ी इलाकों में दो दिनों से हो रही लगातार बारिश के चलते गंगा अपने चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही है। जिला प्रशासन ने बाढ़ चौकियों और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है और तराई क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गंगा से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।
भीमगोड़ा बैराज पर सिंचाई विभाग के अधिकारी जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और हर अपडेट जिला प्रशासन को भेजा जा रहा है। इस बीच, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों को फील्ड में मौजूद रहने और बाढ़ चौकियों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नागरिकों से नदी तटीय इलाकों से दूर रहने और केवल निर्धारित स्थलों पर ही स्नान करने की अपील की है।






